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Amroha News: स्वास्थ्य विभाग के ढुलमुल रवैये से फल-फूल रहा लिंग परीक्षण और गर्भपात का अवैध कारोबार

Moradabad  Bureau मुरादाबाद ब्यूरो
Updated Wed, 24 May 2023 12:51 AM IST
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Illegal business of gender test and abortion is flourishing due to wavering attitude of health department
अमरोहा। जिले में लिंग परीक्षण और गर्भपात कराने अवैध कारोबार तेजी से फल फूल रहा है। स्वास्थ्य विभाग का ढुलमुल रवैया भी इसके लिए बहुत हद तक जिम्मेदार है। आज तक विभाग की तरफ से अवैध कारोबार में लिप्त लोगों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई। जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की नाक के नीचे जिले में लिंग परीक्षण से लेकर गर्भपात, प्रसव के अवैध कारोबार चल रहा है। पिछले एक साल में तीन से अधिक कार्रवाई हरियाणा की टीम कर चुकी है। इसके लिए बाकायदा एजेंट सक्रिय हैं। महज दस से चालीस हजार रुपये में लिंग की जांच कराकर पता लगाया जा सकता है कि कोख में पल रहा लड़का है या लड़की। खास बात ये है कि जनपद में लिंग परीक्षण ज्यादातर बाहरी शहरों और राज्यों के लोगों का कराया जा रहा है। ताकि, शहर में इस खेल का ‘शोर’ सुनाई न हो। जिले में 75 से 80 अल्ट्रासाउंड सेंटर चल रहे हैं। इनमें से कम से कम दस सेंटरों में लिंग परीक्षण का खेल चल रहा है। ठेका लेकर दूरदराज के लोगों को लिंग परीक्षण के लिए अमरोहा लाया जाता है। यहां ग्राहक की एजेंट से मुलाकात कराई जाती है। इसके बाद एजेंट ग्राहक को अपने सेटिंग वाले अल्ट्रासाउंड सेंटर पर ले जाता है। जिस मशीन का स्वास्थ्य विभाग से पंजीकरण और ट्रैकर लगा होता है, उससे लिंग की जांच नहीं की जाती है। इस गोरखधंधा में लिप्त सेंटर दूसरी अल्ट्रासाउंड मशीन भी रखे रहते हैं, जिसमें ट्रैकर नहीं लगा होता है। उससे ही लिंग परीक्षण किया जाता है। जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के ढुलमुल रवैये की वजह से यह धंधा फलफूल रहा है। इसके अलावा गर्भपात का भी खेल भी जमकर चल रहा है।
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दस सेंटरों पर नहीं लगे ट्रैकर
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सूत्रों के अनुसार शहर में संचालित दस अल्ट्रासाउंड सेंटरों पर ट्रैकर तक नहीं लगे हैं। जबकि, बिना ट्रैकर के अल्ट्रासाउंड मशीन चलनी ही नहीं चाहिए। इसे स्वास्थ्य विभाग का लचर रवैया ही कहा जाएगा। इन सेंटरों को विभाग नोटिस जारी कर चुप्पी साध लेता है। किसी का भी लाइसेंस निरस्त नहीं किया गया। इससे स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान खड़े हो रहे हैं।
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केस-एक
छह सितंबर 2022 को हरियाणा राज्य के जनपद रोहतक व झज्जर की टीम ने उत्तर प्रदेश के जनपद अमरोहा के मंडी धनौरा के मोहल्ला महादेव स्थित भारत अल्ट्रासाउंड केंद्र पर छापा मारा था। टीम का आरोप था कि केंद्र संचालक हरियाणा की गर्भवती महिलाओं के भ्रूण लिंग की जांच कर रहा था। अल्ट्रासाउंड करने के एवज में 30 से 35 हजार रुपये ग्राहक से लिए जाते थे। टीम ने मौके से अल्ट्रासाउंड की पोर्टेबल मशीन भी बरामद हुई थी।

केस-दो
29 दिसंबर 2022 की शाम हापुड़ की स्वास्थ्य विभाग की टीम ने एसओजी टीम के साथ हसनपुर में संभल मार्ग पर अब्दुल्ला कॉलोनी में एक बंद पड़े घर में अवैध रूप से चल रहे भ्रूण लिंग परीक्षण सेंटर पर छापामार कर कार्रवाई की। इस दौरान दो महिलाओं समेत 6 लोगों को पकड़ा गया। मौके से छोटी अल्ट्रासाउंड मशीन, इनवर्टर-बैटरी बरामद किया गया था।
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ये रेट हैं तय
गर्भपात कराना: 15 से 20 हजार
लिंग की जांच: 10 से 40 हजार
अवैध डिलीवरी: 15 से 30 हजार
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ये है कानून
- गर्भधारण पूर्व और प्रसव पूर्व निदान तकनीक अधिनियम 1994 के तहत गर्भधारण पूर्व या बाद में लिंग चयन और जन्म से पहले कन्या भ्रूण हत्या के लिए लिंग परीक्षण कराना गुनाह है।
- भ्रूण परीक्षण के लिए सहयोग देना व विज्ञापन करना कानूनी अपराध है। इसके तहत तीन से पांच साल तक की जेल व दस हजार से एक लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है।
- गर्भवती स्त्री का जबरदस्ती गर्भपात करवाना अपराध है। ऐसा करने पर आजीवन कारावास की सजा हो सकती है।
- धारा 313 के तहत गर्भवती महिला की मर्जी के बिना गर्भपात करवाने वाले को आजीवन कारावास या जुर्माने से भी दंडित किया जा सकता है।
- धारा 314 के तहत गर्भपात करने के मकसद से किए गए कार्यों से अगर महिला की मौत हो जाती है तो दस साल की सजा या जुर्माना या दोनों हो सकता है।
- आईपीसी की धारा 315 के तहत शिशु को जीवित पैदा होने से रोकने या जन्म के बाद उसकी मृत्यु मकसद से किया गया कार्य अपराध है। इस पर दस साल की सजा या जुर्माना दोनों हो सकता है।

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जिले के सभी अस्पतालों और अल्ट्रासाउंड केंद्रों का सत्यापन कराया जाएगा कि उनके यहां क्या सुविधाएं हैं। यदि कहीं पर भी कमी मिलती है तो संबंधित अस्पताल के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। इसके अलावा लिंग परीक्षण से लेकर किसी भी तरह का गलत काम की किसी व्यक्ति के पास जानकारी है तो वह सीधे आकर सूचित करें। जानकारी देने वाले का नाम पूरी तरह गोपनीय रखा जाएगा। इसके बाद कार्रवाई की जाएगी। - डॉ. राजीव सिंघल, सीएमओ
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