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Amroha News: हाई रिस्क गांवों में टीबी रोगियों की पहचान और जांच जारी
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अमरोहा। जिले में टीबी रोगियों की पहचान करने के लिए सौ दिन का विशेष अभियान चलाया जा रहा है। खासतौर से स्वास्थ्य विभाग हाई रिस्क गांवों में विशेष निगरानी बनाए हुए है और कैंप लगाकर संदिग्ध मरीजों की जांच की जा रही है। लंबे समय से खांसी, बुखार और कमजोरी से पीड़ित लोगों की पहचान कर उन्हें अस्पताल में जांच के लिए भेजा जा रहा है। अगर जांच में टीबी की पुष्टि होती है तो मरीजों का तत्काल उपचार शुरू कराया जा रहा है, जिससे संक्रमण को फैलने से रोका जा सके।
जिले में 282 गांव हाईरिस्क की श्रेणी में है। इन गांवों में खासतौर से मरीजों की पहचान के लिए कैंप लगाए जा रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में टीबी खोज अभियान में करीब 500 टीबी के मरीज मिले हैं। जिनका उपचार शुरु कराया गया है। जिनको अगर एक सप्ताह से लगातार खांसी है और बुखार बार-बार आ रहा है। दवाई के बाद भी बुखार ठीक नहीं हो रहा है। अगर इनमें से किसी व्यक्ति में लक्षण मिलते है तो उसकी जांच कराकर उपचार कराया जाएगा। हसनपुर तहसील क्षेत्र में हाईरिस्क गांवों की संख्या 94 है। इन गांवों में विशेष तौर से कैंप लगाए जा रहे हैं और पोर्टेबल मशीन से जांच की जा रही है। सीएमओ डॉ. योगेंद्र सिंह ने बताया कि टीबी का उपचार फ्री में किया जाता है। जिला अस्पताल और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर इसके उपचार की व्यवस्था है। गांव-गांव लग रहे शिविरों के माध्यम से संदिग्ध मरीजों की पहचान की जा रही है। अगर किसी में टीबी की पुष्टि होती है तो उसका उपचार शुरु कराया जा रहा है। जिससे समय से इलाज मिल सके।
अब टीबी लाइलाज नहीं
सीएमओ डॉ. योगेंद्र सिंह ने बताया कि अब टीबी लाइलाज बीमारी नहीं है। सभी सरकारी अस्पतालों में इसका फ्री में उपचार किया जा रहा है। सरकार की तरफ से पौष्टिक आहार के लिए पैसे भी दिए जाते हैं। इसलिए अगर किसी को टीबी है तो परेशान होने की जरुरत नहीं है। समय से अपना उपचार शुरु कराएं और नियमित रुप से दवा का सेवन करने से मरीज ठीक हो जाता है। जिले में कई ग्राम पंचायत टीबी मुक्त हो चुकी है।
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जिले में 282 गांव हाईरिस्क की श्रेणी में है। इन गांवों में खासतौर से मरीजों की पहचान के लिए कैंप लगाए जा रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में टीबी खोज अभियान में करीब 500 टीबी के मरीज मिले हैं। जिनका उपचार शुरु कराया गया है। जिनको अगर एक सप्ताह से लगातार खांसी है और बुखार बार-बार आ रहा है। दवाई के बाद भी बुखार ठीक नहीं हो रहा है। अगर इनमें से किसी व्यक्ति में लक्षण मिलते है तो उसकी जांच कराकर उपचार कराया जाएगा। हसनपुर तहसील क्षेत्र में हाईरिस्क गांवों की संख्या 94 है। इन गांवों में विशेष तौर से कैंप लगाए जा रहे हैं और पोर्टेबल मशीन से जांच की जा रही है। सीएमओ डॉ. योगेंद्र सिंह ने बताया कि टीबी का उपचार फ्री में किया जाता है। जिला अस्पताल और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर इसके उपचार की व्यवस्था है। गांव-गांव लग रहे शिविरों के माध्यम से संदिग्ध मरीजों की पहचान की जा रही है। अगर किसी में टीबी की पुष्टि होती है तो उसका उपचार शुरु कराया जा रहा है। जिससे समय से इलाज मिल सके।
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अब टीबी लाइलाज नहीं
सीएमओ डॉ. योगेंद्र सिंह ने बताया कि अब टीबी लाइलाज बीमारी नहीं है। सभी सरकारी अस्पतालों में इसका फ्री में उपचार किया जा रहा है। सरकार की तरफ से पौष्टिक आहार के लिए पैसे भी दिए जाते हैं। इसलिए अगर किसी को टीबी है तो परेशान होने की जरुरत नहीं है। समय से अपना उपचार शुरु कराएं और नियमित रुप से दवा का सेवन करने से मरीज ठीक हो जाता है। जिले में कई ग्राम पंचायत टीबी मुक्त हो चुकी है।
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