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हिंदी भाषा के प्रचार में हिंदी फिल्मों की है अहम भूमिका : आरिफ
Sun, 15 Sep 2024 05:16 AM IST
मुरादाबाद ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अमरोहा
संवाद न्यूज एजेंसी, अमरोहा
Updated Sun, 15 Sep 2024 05:16 AM IST
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मंडी धनौरा (अमरोहा)। केरल के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने कहा है कि हिंदी भाषा के प्रचार में हिंदी फिल्मों में अहम योगदान है। गैर हिंदी भाषी राज्यों के लोग भी हिंदी फिल्मों के गीतों को समझते हैं और गुनगुनाते भी हैं। कहा कि हिंदी को समृद्ध बनाने के लिए देश की दूसरी भाषाओं का भी सम्मान व आदर करना होगा।
वह शनिवार को नगर के एक बरातघर में संस्कार भारती व हिंदी विश्व मंच की ओर से आयोजित हिंदी महोत्सव में मुख्य अतिथि के रूप में विचार व्यक्त कर रहे थे। आरिफ मोहम्मद खान ने कहा कि दुनिया की सबसे पहली पुस्तक ऋग्वेद है। इससे पहले सभी कुछ मौखिक था। इसी प्रकार अमीर खुसरो हिंदी के पहले कवि थे, जिनकी रचनाएं प्रकाशित हुई हैं। कहा कि भारत बहुभाषी देश है। यहां तमाम तरह की बोली, भाषा, परंपराएं, रस्मो-रिवाज, दर्शन व साहित्य के बावजूद हिंदी देश को एकसूत्र में पिरोने का कार्य कर रही है। विविधता का आदर करना प्रत्येक देशवासी का कर्तव्य है। यदि हिंदी को समृद्ध बनाना है तो देश के अन्य भाषाओं को भी आदर व सम्मान देना होगा।
केरल का एक किस्सा साझा करते हुए कहा कि वह एक दिन केरल में कही जा रहे थे। उनको एक हिंदी फिल्म का बहुचर्चित गीत सुनाई दिया। उत्सुकता हुई कि केरल में हिंदी का गीत कौन सुन रहा है। देखा एक दुकान पर वह फिल्मी गीत बज रहा था और वहां खड़े केरल के लोग उसका आनंद ले रहे थे। इससे साफ है कि हिंदी के प्रचार में हिंदी फिल्मों की अहम भूमिका है। उन्होंने लोगाें से हिंदी का अधिक से अधिक प्रयोग करने की अपील की। वहीं, इस अवसर पर कार्यक्रम संयोजक डॉ. यतींद्र कटारिया की पुस्तक हिंदी विश्व यात्रा और मैं का विमोचन भी किया। साथ ही महोत्सव में हिंदी साहित्यकारों व कवियों को प्रशस्ति पत्र व प्रतीक चिह्न देकर सम्मानित किया गया। इनमें चेतन आनंद, संजीव कुमारी, राकेश छोकर, राकेश आर्य, राजेंद्र टंडन, अनुराग मिश्रा, वीपी चौधरी, अभिताभ खरे आदि शामिल हैं। अध्यक्षता विधान परिषद सदस्य व पूर्व केबिनेट मंत्री चौधरी वीरेंद्र सिंह ने की।
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मंडी धनौरा। केरल के राज्यपाल द्वारा अपने भाषण के दौरान संस्कृत के दर्जनों श्लोकों का वर्णन करने से श्रोता बेहद आश्चर्य चकित व अभिभूत थे। राज्यपाल ने भाषण के दौरान संस्कृत के श्लोकों के जरिए अपनी बात समझाई। उनका कहना था कि व्यक्ति को बहुभाषी होना चाहिए। अपने परिवार का उदाहरण देते हुए कहा कि उनके पोते-पोती जब अपनी नानी के घर जाते हैं तो निजी बातें अपनी भाषा में करते हैं, ताकि परिजन को उनकी बातों का अर्थ समझ में न आए। माथे पर तिलक और भाषण से उनका अंदाज लोगों को खूब भाया।
एमएलसी वीरेंद्र सिंह, राहुल अग्रवाल, मीना आर्य, नरेंद्र कटारिया, डाॅ. मोहम्मद इस्माईल सैफी, धीरज त्यागी, डॉ. आदित्य चौहान, यशवीर खटाना, डॉ. दिनेश नागर, सुभाष बंसल, कपिल त्यागी, राखी अग्रवाल, मोनिका अग्रवाल आदि मौजूद थी।
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वह शनिवार को नगर के एक बरातघर में संस्कार भारती व हिंदी विश्व मंच की ओर से आयोजित हिंदी महोत्सव में मुख्य अतिथि के रूप में विचार व्यक्त कर रहे थे। आरिफ मोहम्मद खान ने कहा कि दुनिया की सबसे पहली पुस्तक ऋग्वेद है। इससे पहले सभी कुछ मौखिक था। इसी प्रकार अमीर खुसरो हिंदी के पहले कवि थे, जिनकी रचनाएं प्रकाशित हुई हैं। कहा कि भारत बहुभाषी देश है। यहां तमाम तरह की बोली, भाषा, परंपराएं, रस्मो-रिवाज, दर्शन व साहित्य के बावजूद हिंदी देश को एकसूत्र में पिरोने का कार्य कर रही है। विविधता का आदर करना प्रत्येक देशवासी का कर्तव्य है। यदि हिंदी को समृद्ध बनाना है तो देश के अन्य भाषाओं को भी आदर व सम्मान देना होगा।
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केरल का एक किस्सा साझा करते हुए कहा कि वह एक दिन केरल में कही जा रहे थे। उनको एक हिंदी फिल्म का बहुचर्चित गीत सुनाई दिया। उत्सुकता हुई कि केरल में हिंदी का गीत कौन सुन रहा है। देखा एक दुकान पर वह फिल्मी गीत बज रहा था और वहां खड़े केरल के लोग उसका आनंद ले रहे थे। इससे साफ है कि हिंदी के प्रचार में हिंदी फिल्मों की अहम भूमिका है। उन्होंने लोगाें से हिंदी का अधिक से अधिक प्रयोग करने की अपील की। वहीं, इस अवसर पर कार्यक्रम संयोजक डॉ. यतींद्र कटारिया की पुस्तक हिंदी विश्व यात्रा और मैं का विमोचन भी किया। साथ ही महोत्सव में हिंदी साहित्यकारों व कवियों को प्रशस्ति पत्र व प्रतीक चिह्न देकर सम्मानित किया गया। इनमें चेतन आनंद, संजीव कुमारी, राकेश छोकर, राकेश आर्य, राजेंद्र टंडन, अनुराग मिश्रा, वीपी चौधरी, अभिताभ खरे आदि शामिल हैं। अध्यक्षता विधान परिषद सदस्य व पूर्व केबिनेट मंत्री चौधरी वीरेंद्र सिंह ने की।
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मंडी धनौरा। केरल के राज्यपाल द्वारा अपने भाषण के दौरान संस्कृत के दर्जनों श्लोकों का वर्णन करने से श्रोता बेहद आश्चर्य चकित व अभिभूत थे। राज्यपाल ने भाषण के दौरान संस्कृत के श्लोकों के जरिए अपनी बात समझाई। उनका कहना था कि व्यक्ति को बहुभाषी होना चाहिए। अपने परिवार का उदाहरण देते हुए कहा कि उनके पोते-पोती जब अपनी नानी के घर जाते हैं तो निजी बातें अपनी भाषा में करते हैं, ताकि परिजन को उनकी बातों का अर्थ समझ में न आए। माथे पर तिलक और भाषण से उनका अंदाज लोगों को खूब भाया।
एमएलसी वीरेंद्र सिंह, राहुल अग्रवाल, मीना आर्य, नरेंद्र कटारिया, डाॅ. मोहम्मद इस्माईल सैफी, धीरज त्यागी, डॉ. आदित्य चौहान, यशवीर खटाना, डॉ. दिनेश नागर, सुभाष बंसल, कपिल त्यागी, राखी अग्रवाल, मोनिका अग्रवाल आदि मौजूद थी।