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Amroha News: रोडवेज बसों में नहीं लिखा हेल्पलाइन नंबर
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अमरोहा। रोडवेज बसों में यात्रियों को सुविधा जनक यात्रा उपलब्ध कराने के लिए दावे तो किए जाते हैं, लेकिन चालक व परिचालकों द्वारा पूरा नहीं किया जा रहा है। बसों में टोल फ्री हेल्पलाइन और अधिकारियों के नंबर लिखने के आदेश हवाहवाई हैं। यहां अधिकांश बसों में हेल्पलाइन नंबर नहीं है। ऐसे में यात्री परेशानी होने की सूचना व शिकायत करने से वंचित रह जाते हैं।
अमरोहा डिपो में 97 बसें संचालित होती हैं। परिवहन निगम की ओर से सभी बसों पर में टोल फ्री हेल्पलाइन और अधिकारियों के नंबर लिखवाए जाते हैं। ताकि हादसे चालक-परिचालक से दुर्व्यवहार वाली स्थिति में यात्री या अन्य व्यक्ति सूचना व शिकायत के लिए संपर्क कर सके। लेकिन कई बसों में नंबर गायब हैं। यात्रियों को दिन व रात के सफर में हाईवे पर जहां-तहां उतारकर उन्हें भटकने को मजबूर करते हैं। इस पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने के लिए हेल्पलाइन नंबर जारी किए गए।
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ये नंबर लिखे जाने अनिवार्य
निगम द्वारा गाड़ियों से हेल्पलाइन नंबर 18001802877 व 149 नंबर प्रदर्शित करने का भी आदेश हैं, लेकिन बसों में कहीं भी अंकित नही मिल रहे हैं। चालकों-परिचालकों द्वारा इन हेल्पलाइन नंबरों को गायब करने का मुख्य कारण प्रथम शिकायत पर चालक को चेतावनी, दूसरी बार में 500 रुपये, तीसरी बार में 1000 रुपये अर्थदंड के साथ आरोपित करते हुए मार्ग परिवर्तन व कार्रवाई का प्रावधान है।
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बसों से फर्स्ट एड बॉक्स भी हैं गायब
रोडवेज बसों में फर्स्ट एड बॉक्स गायब हैं। ऐसे में यदि कोई हादसा होता है तो बस में बैठे यात्रियों को प्राथमिक उपचार मिलना मुश्किल है। सवारियों से टिकट के रुपये वसूलकर परिवहन निगम केवल उनको गंतव्य तक पहुंचाने का काम कर रहा है। यात्रियों को आवश्यक सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं। इस तरफ निगम के अफसर भी इस ओर ध्यान तक नहीं दे रहे हैं।
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इस संबंध में बस चालकों व परिचालकों को निर्देशित किया जाएगा। वह बसों पर विभागीय हेल्पलाइन नंबर तत्काल लिखवाएं। वहीं, जिन बसों में फर्स्ट एड बॉक्स नहीं है। उनकी जांच कराई जाएगी। -मोहम्मद शफी, एआरएम
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अमरोहा डिपो में 97 बसें संचालित होती हैं। परिवहन निगम की ओर से सभी बसों पर में टोल फ्री हेल्पलाइन और अधिकारियों के नंबर लिखवाए जाते हैं। ताकि हादसे चालक-परिचालक से दुर्व्यवहार वाली स्थिति में यात्री या अन्य व्यक्ति सूचना व शिकायत के लिए संपर्क कर सके। लेकिन कई बसों में नंबर गायब हैं। यात्रियों को दिन व रात के सफर में हाईवे पर जहां-तहां उतारकर उन्हें भटकने को मजबूर करते हैं। इस पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने के लिए हेल्पलाइन नंबर जारी किए गए।
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ये नंबर लिखे जाने अनिवार्य
निगम द्वारा गाड़ियों से हेल्पलाइन नंबर 18001802877 व 149 नंबर प्रदर्शित करने का भी आदेश हैं, लेकिन बसों में कहीं भी अंकित नही मिल रहे हैं। चालकों-परिचालकों द्वारा इन हेल्पलाइन नंबरों को गायब करने का मुख्य कारण प्रथम शिकायत पर चालक को चेतावनी, दूसरी बार में 500 रुपये, तीसरी बार में 1000 रुपये अर्थदंड के साथ आरोपित करते हुए मार्ग परिवर्तन व कार्रवाई का प्रावधान है।
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बसों से फर्स्ट एड बॉक्स भी हैं गायब
रोडवेज बसों में फर्स्ट एड बॉक्स गायब हैं। ऐसे में यदि कोई हादसा होता है तो बस में बैठे यात्रियों को प्राथमिक उपचार मिलना मुश्किल है। सवारियों से टिकट के रुपये वसूलकर परिवहन निगम केवल उनको गंतव्य तक पहुंचाने का काम कर रहा है। यात्रियों को आवश्यक सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं। इस तरफ निगम के अफसर भी इस ओर ध्यान तक नहीं दे रहे हैं।
इस संबंध में बस चालकों व परिचालकों को निर्देशित किया जाएगा। वह बसों पर विभागीय हेल्पलाइन नंबर तत्काल लिखवाएं। वहीं, जिन बसों में फर्स्ट एड बॉक्स नहीं है। उनकी जांच कराई जाएगी। -मोहम्मद शफी, एआरएम