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Amroha News: आयुष्मान आरोग्य मंदिरों पर तालों में कैद स्वास्थ्य सेवाएं
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अमरोहा। ग्रामीणों की सहूलियत के लिए बनाए गए अधिकांश आयुष्मान आरोग्य मंदिरों (हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर) पर अनदेखी के चलते ताले लटके हैं तो कुछ पर सीएचओ की तैनाती नहीं हो सकी है। ऐसे में ग्रामीणों को सामान्य बीमारियों के इलाज के लिए भी ग्रामीणों को कई किलोमीटर दूर सीएचसी या जिला अस्पताल की दौड़ लगानी पड़ रही है।
शुक्रवार को जिले के विभिन्न ब्लॉकों में की गई पड़ताल में कई आयुष्मान आरोग्य मंदिर बंद मिले, जबकि जहां सीएचओ नहीं हैं वहां एएनएम के भरोसे व्यवस्थाएं चल रही हैं। स्वास्थ्य विभाग इन केंद्रों के संचालन पर हर माह लाखों रुपये खर्च कर रहा है, लेकिन जमीनी स्तर पर मरीजों को अपेक्षित लाभ नहीं मिल पा रहा। ग्रामीणों का कहना है कि गांवों में स्वास्थ्य केंद्र होने के बावजूद इलाज के लिए बाहर जाना पड़ता है, जिससे समय और धन दोनों की बर्बादी होती है। बुजुर्गों, महिलाओं और गंभीर मरीजों को सबसे अधिक परेशानी उठानी पड़ रही है।
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घर के पास इलाज देने की थी योजना
शासन ने आयुष्मान आरोग्य मंदिर स्थापित करने का उद्देश्य ग्रामीणों को उनके घर के नजदीक सामान्य बीमारियों का उपचार, आवश्यक दवाएं तथा गैर-संचारी रोगों की जांच और उपचार उपलब्ध कराना तय किया था। इन केंद्रों पर शुगर, उच्च रक्तचाप, एनीमिया समेत अन्य बीमारियों की नियमित जांच और दवा वितरण की व्यवस्था की गई थी, जिससे लोगों को छोटी-छोटी स्वास्थ्य समस्याओं के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र या जिला अस्पताल तक न जाना पड़े।
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मंडी धनौरा: 14 आयुष्मान आरोग्य मंदिरों पर सीएचओ नहीं, एएनएम के भरोसे स्वास्थ्य सेवाएं
मंडी धनौरा ग्रामीणों को उनके गांव में ही प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से संचालित आयुष्मान आरोग्य मंदिरों की व्यवस्था संसाधनों के अभाव में प्रभावित हो रही है। सीएचसी मंडी धनौरा के अंतर्गत संचालित 33 आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में से केवल 19 पर ही सीएचओ तैनात हैं, जबकि 14 केंद्रों का संचालन एएनएम के भरोसे चल रहा है। इन दिनों एएनएम की ड्यूटी पल्स पोलियो अभियान में लगाए जाने के कारण कई आरोग्य मंदिर बंद पड़े हैं, जिससे ग्रामीणों को इलाज और दवाओं के लिए दूसरे स्वास्थ्य केंद्रों का सहारा लेना पड़ रहा है।
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हसनपुर: ग्रामीणों को नहीं मिल रहीं स्वास्थ्य सेवाएं
हसनपुर और बुरावली ब्लॉक क्षेत्रों में बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से संचालित आयुष्मान आरोग्य केंद्रों की व्यवस्था ब्लॉक क्षेत्र में पूरी तरह पटरी पर नहीं आ सकी है। हसनपुर ब्लॉक के 23 केंद्रों में से तीन पर अभी तक सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी (सीएचओ) की तैनाती नहीं हो पाई है। वहीं बुरावली के आयुष्मान आरोग्य मंदिर पर भी सीएचओ नहीं होने से ग्रामीणों को इलाज और दवाओं के लिए करीब 10 किलोमीटर दूर रहरा सीएचसी पर जाना पड़ रहा है। इससे मरीजों, खासकर बुजुर्गों और महिलाओं को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
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दवाओं की कमी से मरीज परेशान
डिडौली। नेशनल हाईवे से करीब दो किलोमीटर दूरी पर स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) पतेई खालसा में स्वास्थ्य सेवाओं की पड़ताल के दौरान दवाओं की कमी सामने आई। गुरुवार को निरीक्षण के समय लैब टेक्नीशियन एवं चिकित्सक डॉ. तैयब अली केंद्र पर मौजूद मिले, जबकि प्रभारी चिकित्सक डॉ. खुशनाज अकबर जोया में ड्यूटी पर होने के कारण अनुपस्थित रहे। पीएचसी में कुल चार कर्मचारियों का स्टाफ तैनात है। यहां प्रतिदिन करीब 40 से 50 मरीज ओपीडी में उपचार के लिए पहुंचते हैं। केंद्र पर मुख्य रूप से बुखार, खांसी, नजला-जुकाम तथा चर्म रोग से संबंधित मरीज उपचार कराने आते हैं।
कई मरीजों ने बताया कि उन्हें यहां पर साधारण बीमारियों का ही उपचार मिलता है। गंभीर बीमारी में यहां से बाहर के लिए रेफर कर देते हैं। पीएचसी के चारों तरफ गंदगी पसरी रहती है। खांसी-गैस की दवा नहीं है।
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प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों से दवाओं की डिमांड भेजी जाती है तो दवाएं पहुंचाई जाती है। साफ-सफाई व्यवस्था को ठीक कराया जाएगा। कई जगह पर इंचार्ज चिकित्सक नहीं है। उनके संबंध में भी शासन को अवगत कराया जाएगा। डॉ. रमाकांत सागर, सीएमओ
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शुक्रवार को जिले के विभिन्न ब्लॉकों में की गई पड़ताल में कई आयुष्मान आरोग्य मंदिर बंद मिले, जबकि जहां सीएचओ नहीं हैं वहां एएनएम के भरोसे व्यवस्थाएं चल रही हैं। स्वास्थ्य विभाग इन केंद्रों के संचालन पर हर माह लाखों रुपये खर्च कर रहा है, लेकिन जमीनी स्तर पर मरीजों को अपेक्षित लाभ नहीं मिल पा रहा। ग्रामीणों का कहना है कि गांवों में स्वास्थ्य केंद्र होने के बावजूद इलाज के लिए बाहर जाना पड़ता है, जिससे समय और धन दोनों की बर्बादी होती है। बुजुर्गों, महिलाओं और गंभीर मरीजों को सबसे अधिक परेशानी उठानी पड़ रही है।
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घर के पास इलाज देने की थी योजना
शासन ने आयुष्मान आरोग्य मंदिर स्थापित करने का उद्देश्य ग्रामीणों को उनके घर के नजदीक सामान्य बीमारियों का उपचार, आवश्यक दवाएं तथा गैर-संचारी रोगों की जांच और उपचार उपलब्ध कराना तय किया था। इन केंद्रों पर शुगर, उच्च रक्तचाप, एनीमिया समेत अन्य बीमारियों की नियमित जांच और दवा वितरण की व्यवस्था की गई थी, जिससे लोगों को छोटी-छोटी स्वास्थ्य समस्याओं के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र या जिला अस्पताल तक न जाना पड़े।
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मंडी धनौरा: 14 आयुष्मान आरोग्य मंदिरों पर सीएचओ नहीं, एएनएम के भरोसे स्वास्थ्य सेवाएं
मंडी धनौरा ग्रामीणों को उनके गांव में ही प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से संचालित आयुष्मान आरोग्य मंदिरों की व्यवस्था संसाधनों के अभाव में प्रभावित हो रही है। सीएचसी मंडी धनौरा के अंतर्गत संचालित 33 आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में से केवल 19 पर ही सीएचओ तैनात हैं, जबकि 14 केंद्रों का संचालन एएनएम के भरोसे चल रहा है। इन दिनों एएनएम की ड्यूटी पल्स पोलियो अभियान में लगाए जाने के कारण कई आरोग्य मंदिर बंद पड़े हैं, जिससे ग्रामीणों को इलाज और दवाओं के लिए दूसरे स्वास्थ्य केंद्रों का सहारा लेना पड़ रहा है।
हसनपुर: ग्रामीणों को नहीं मिल रहीं स्वास्थ्य सेवाएं
हसनपुर और बुरावली ब्लॉक क्षेत्रों में बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से संचालित आयुष्मान आरोग्य केंद्रों की व्यवस्था ब्लॉक क्षेत्र में पूरी तरह पटरी पर नहीं आ सकी है। हसनपुर ब्लॉक के 23 केंद्रों में से तीन पर अभी तक सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी (सीएचओ) की तैनाती नहीं हो पाई है। वहीं बुरावली के आयुष्मान आरोग्य मंदिर पर भी सीएचओ नहीं होने से ग्रामीणों को इलाज और दवाओं के लिए करीब 10 किलोमीटर दूर रहरा सीएचसी पर जाना पड़ रहा है। इससे मरीजों, खासकर बुजुर्गों और महिलाओं को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
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दवाओं की कमी से मरीज परेशान
डिडौली। नेशनल हाईवे से करीब दो किलोमीटर दूरी पर स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) पतेई खालसा में स्वास्थ्य सेवाओं की पड़ताल के दौरान दवाओं की कमी सामने आई। गुरुवार को निरीक्षण के समय लैब टेक्नीशियन एवं चिकित्सक डॉ. तैयब अली केंद्र पर मौजूद मिले, जबकि प्रभारी चिकित्सक डॉ. खुशनाज अकबर जोया में ड्यूटी पर होने के कारण अनुपस्थित रहे। पीएचसी में कुल चार कर्मचारियों का स्टाफ तैनात है। यहां प्रतिदिन करीब 40 से 50 मरीज ओपीडी में उपचार के लिए पहुंचते हैं। केंद्र पर मुख्य रूप से बुखार, खांसी, नजला-जुकाम तथा चर्म रोग से संबंधित मरीज उपचार कराने आते हैं।
कई मरीजों ने बताया कि उन्हें यहां पर साधारण बीमारियों का ही उपचार मिलता है। गंभीर बीमारी में यहां से बाहर के लिए रेफर कर देते हैं। पीएचसी के चारों तरफ गंदगी पसरी रहती है। खांसी-गैस की दवा नहीं है।
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प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों से दवाओं की डिमांड भेजी जाती है तो दवाएं पहुंचाई जाती है। साफ-सफाई व्यवस्था को ठीक कराया जाएगा। कई जगह पर इंचार्ज चिकित्सक नहीं है। उनके संबंध में भी शासन को अवगत कराया जाएगा। डॉ. रमाकांत सागर, सीएमओ