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डेंगू से हुई मौत को ठुकरा रहे सरकारी आकड़े, हकीकत कुछ और
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अमरोहा। जनपद में डेंगू और बुखार का प्रकोप बढ़ता जा रहा है। लगातार डेंगू और बुखार पीड़ितों की मौतें भी हो रही हैं। हर रोज अलग-अलग इलाकों से मौत की खबर आ रही है, लेकिन स्वास्थ्य महकमे के जिम्मेदार इसे मानने को तैयार नहीं हैं। उनका कहना है कि जिन लोगों की मौत हुई है, उन्हें अन्य बीमारियां थीं। विभाग डेंगू से केवल एक मौत होने का दावा कर रहा है।
शहर से लेकर ग्रामीण इलाकों तक में डेंगू का डंक मुसीबत बना हुआ है। लेकिन डेंगू पीड़ितों की वास्तविक संख्या भी बताने में महकमा हिचक रहा है। सरकारी आंकड़े कुछ हैं, जबकि हकीकत कुछ और है। स्वास्थ्य विभाग सिर्फ सरकारी पैथोलॉजी की लैब रिपोर्ट तक ही सिमटा है। जिला अस्पताल में होने वाली डेंगू की जांच में पॉजिटिव मिलने वाले मरीजों की जानकारी ही स्वास्थ्य विभाग जनपद के आला प्रशासनिक अधिकारियों को देता है।
बड़ी संख्या में ग्रामीण इलाकों से लेकर जिला मुख्यालय तक संचालित पैथोलॉजी में होने वाली डेंगू की जांचें और पॉजिटिव मरीजों का आंकड़ा लगता है कि स्वास्थ्य महकमे के पास नहीं है या इस पर पर्दा डाला जा रहा है। जबकि डेंगू से अब तक डेंगू से 32 लोगों की मौत हो चुकी है। यह वे लोग हैं, जिनके परिजन मेरठ व अन्य शहरों अस्पतालों में डेंगू की पुष्टि के बाद मौत होने का दावा किया है। जबकि सरकारी रिकार्ड में बुखार के मरीजों की कुल 17 हजार के करीब है। जबकि हकीकत में यह आंकड़ा 30 हजार के करीब है।
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सीएमओ डॉ. संजय अग्रवाल ने बताया कि डेंगू की एलाइजा जांच सिर्फ जिला चिकित्सालय की पैथोलॉजी में ही होती है। प्राइवेट पैथोलॉजी या अन्य सीएचसी पर डेंगू की एनएस-1 जांच कराई जाती है। जिनकी रिपोर्ट पॉजिटिव आती है उनका एलाइजा टेस्ट जिला अस्पताल की लैब में कराया जाता है। एलाइजा टेस्ट में डेंगू पॉजिटिव आने पर ही संबंधित को डेंगू पीड़ित माना जाता है। उन्होंने दावा किया कि जरूरी नहीं कि एनएस-1 की जांच पॉजिटिव आने पर एलाइजा टेस्ट की रिपोर्ट भी पॉजिटिव आए।
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शहर से लेकर ग्रामीण इलाकों तक में डेंगू का डंक मुसीबत बना हुआ है। लेकिन डेंगू पीड़ितों की वास्तविक संख्या भी बताने में महकमा हिचक रहा है। सरकारी आंकड़े कुछ हैं, जबकि हकीकत कुछ और है। स्वास्थ्य विभाग सिर्फ सरकारी पैथोलॉजी की लैब रिपोर्ट तक ही सिमटा है। जिला अस्पताल में होने वाली डेंगू की जांच में पॉजिटिव मिलने वाले मरीजों की जानकारी ही स्वास्थ्य विभाग जनपद के आला प्रशासनिक अधिकारियों को देता है।
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बड़ी संख्या में ग्रामीण इलाकों से लेकर जिला मुख्यालय तक संचालित पैथोलॉजी में होने वाली डेंगू की जांचें और पॉजिटिव मरीजों का आंकड़ा लगता है कि स्वास्थ्य महकमे के पास नहीं है या इस पर पर्दा डाला जा रहा है। जबकि डेंगू से अब तक डेंगू से 32 लोगों की मौत हो चुकी है। यह वे लोग हैं, जिनके परिजन मेरठ व अन्य शहरों अस्पतालों में डेंगू की पुष्टि के बाद मौत होने का दावा किया है। जबकि सरकारी रिकार्ड में बुखार के मरीजों की कुल 17 हजार के करीब है। जबकि हकीकत में यह आंकड़ा 30 हजार के करीब है।
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सीएमओ डॉ. संजय अग्रवाल ने बताया कि डेंगू की एलाइजा जांच सिर्फ जिला चिकित्सालय की पैथोलॉजी में ही होती है। प्राइवेट पैथोलॉजी या अन्य सीएचसी पर डेंगू की एनएस-1 जांच कराई जाती है। जिनकी रिपोर्ट पॉजिटिव आती है उनका एलाइजा टेस्ट जिला अस्पताल की लैब में कराया जाता है। एलाइजा टेस्ट में डेंगू पॉजिटिव आने पर ही संबंधित को डेंगू पीड़ित माना जाता है। उन्होंने दावा किया कि जरूरी नहीं कि एनएस-1 की जांच पॉजिटिव आने पर एलाइजा टेस्ट की रिपोर्ट भी पॉजिटिव आए।