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हैंडपंप खुद ही प्यासे, कैसे बुझाएंगे पब्लिक की प्यास
ब्यूरो/अमर उजाला अमरोहा
Updated Thu, 23 Feb 2017 12:21 AM IST
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सूख्ाे हैंडपंप
- फोटो : अमर उजाला
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गर्मी दस्तक देने वाली है, मगर पब्लिक की प्यास बुझाने के लिए प्रशासन की तैयारियां नजर नहीं आ रही हैं। शहर से लेकर गांव तक जगह-जगह सरकारी हैंडपंप खराब पड़े हैं। ये हैंडपंप पानी नहीं उगलते, शोपीस बने हुए हैं। कहीं तकनीकी समस्या तो कहीं जलस्तर नीचे होना वजह बताई जा रही है। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि गर्मी में जब लोग पानी की तलाश में इन हैंडपंपों के पास पहुंचेगे तो ये प्यास कैसे बुझाएंगे।
अमर उजाला की टीम ने चार गांवों का जायजा लिया। एक जगह ऐसी पाई गई जहां हैंडपंप में सबमर्सिबल फिट था, लेकिन उसका पानी किसके घर में जा रहा है, ये बताने को कोई ग्रामीण तैयार नहीं हुआ। जहां हैंडपंप खड़ा था, वहां आस पास लंबी घास थी। अन्य जगहों पर खड़े हैंडपंप सफेद हाथी बन गए हैं, जिन्हें सुधारने के लिए जल निगम की ओर से कोई प्रयास नहीं किए जा जा रहे हैं।
घरेलू हैंडपंपों का गंदला पानी पीने को लोग मजबूर हैं। वहीं अफसर ग्राम सभा की जिम्मेदारी बताकर पल्ला झाड़ रहे हैं।विकास खंड जोया के गांव नीलीखेड़ी की आबादी ढाई हजार से ऊपर है। घरेलू नलों का पानी थोड़ी देर रखने पर ही गंदला हो जाता है। ग्रामीणों को पीने योग्य पानी मिले, इसको ध्यान में रखते हुए जल निगम की ओर से गांव में सरकारी हैंडपंप लगाए गए थे।
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दो हैंडपंप बेकार हो चुके हैं। नीलीखेड़ी और ढकिया मार्ग किनारे तीसरा हैंडपंप लगा था, जिसमें ग्रामीणों ने सबमर्सिबल की मोटर फिट कर रखी थी। इसका पानी कहां जाता है और किसने ये काम किया है। इस संबंध में ग्रामीणों ने कुछ भी नहीं बताया। हां, बाकी दो हैंडपंप का बोरिंग फेल होने की बात जरूर कही।
डिडौली कोतवाली के श्योनाली गांव काफी प्रसिद्ध है। यह गांव किसी और वजह से नहीं बल्कि यहां हाईवे किनारे स्थित ज्यारत पर लोग दूर दराज से आकर माथा टेकते हैं। घर में लगे हैंडपंपों का पानी ठीक नहीं है। दो सरकारी हैंडपंप खराब पाए गए हैं। इसके चलते ग्रामीणों को स्वच्छ पानी नहीं मिल पा रहा है। घर के नल का पानी ही ग्रामीण अपने उपयोग में ला रहे हैं। इनमें एक नल तकनीकी समस्या तो दूसरा पानी नीचे खिसने की वजह से बंद हुआ है।
गांवों में हैंडपंपों की मेंटीनेंस का काम जल निगम का नहीं है। उसका कार्य ग्राम पंचायत की ओर से ही किया जाता है। अगर हैंडपंप खराब हैं तो उनको ग्राम पंचायत ही सही कराएगी। उसके खाते में ही इसकी धनराशि आती है। प्रधान द्वारा ही उनको सुधरवाने की कार्रवाई कराई जाएगी।-डीके जैन, एक्सईएन जल निगम
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अमर उजाला की टीम ने चार गांवों का जायजा लिया। एक जगह ऐसी पाई गई जहां हैंडपंप में सबमर्सिबल फिट था, लेकिन उसका पानी किसके घर में जा रहा है, ये बताने को कोई ग्रामीण तैयार नहीं हुआ। जहां हैंडपंप खड़ा था, वहां आस पास लंबी घास थी। अन्य जगहों पर खड़े हैंडपंप सफेद हाथी बन गए हैं, जिन्हें सुधारने के लिए जल निगम की ओर से कोई प्रयास नहीं किए जा जा रहे हैं।
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घरेलू हैंडपंपों का गंदला पानी पीने को लोग मजबूर हैं। वहीं अफसर ग्राम सभा की जिम्मेदारी बताकर पल्ला झाड़ रहे हैं।विकास खंड जोया के गांव नीलीखेड़ी की आबादी ढाई हजार से ऊपर है। घरेलू नलों का पानी थोड़ी देर रखने पर ही गंदला हो जाता है। ग्रामीणों को पीने योग्य पानी मिले, इसको ध्यान में रखते हुए जल निगम की ओर से गांव में सरकारी हैंडपंप लगाए गए थे।
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दो हैंडपंप बेकार हो चुके हैं। नीलीखेड़ी और ढकिया मार्ग किनारे तीसरा हैंडपंप लगा था, जिसमें ग्रामीणों ने सबमर्सिबल की मोटर फिट कर रखी थी। इसका पानी कहां जाता है और किसने ये काम किया है। इस संबंध में ग्रामीणों ने कुछ भी नहीं बताया। हां, बाकी दो हैंडपंप का बोरिंग फेल होने की बात जरूर कही।
डिडौली कोतवाली के श्योनाली गांव काफी प्रसिद्ध है। यह गांव किसी और वजह से नहीं बल्कि यहां हाईवे किनारे स्थित ज्यारत पर लोग दूर दराज से आकर माथा टेकते हैं। घर में लगे हैंडपंपों का पानी ठीक नहीं है। दो सरकारी हैंडपंप खराब पाए गए हैं। इसके चलते ग्रामीणों को स्वच्छ पानी नहीं मिल पा रहा है। घर के नल का पानी ही ग्रामीण अपने उपयोग में ला रहे हैं। इनमें एक नल तकनीकी समस्या तो दूसरा पानी नीचे खिसने की वजह से बंद हुआ है।
गांवों में हैंडपंपों की मेंटीनेंस का काम जल निगम का नहीं है। उसका कार्य ग्राम पंचायत की ओर से ही किया जाता है। अगर हैंडपंप खराब हैं तो उनको ग्राम पंचायत ही सही कराएगी। उसके खाते में ही इसकी धनराशि आती है। प्रधान द्वारा ही उनको सुधरवाने की कार्रवाई कराई जाएगी।-डीके जैन, एक्सईएन जल निगम