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कर्जमाफी तो दूर, किसानों को कर्जदार बनाने में जुटी सरकार
ब्यूरो/अमर उजाला अमरोहा
Updated Sat, 11 Feb 2017 11:34 PM IST
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राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष सरदार वीएम सिंह ने कहा कि 15 साल में सरकार से नाखुश तीन लाख किसानों ने आत्महत्याएं की हैं, जिसका जीता जागता उदाहरण मुजफ्फरनगर में विजयवीर सिंह। किसानों का कर्ज माफ करने में सरकार ने कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई बल्कि उनको कर्जदार बनाने में जुट गई। अब वक्त आ गया है कि प्रदेश की तस्वीर को बदला जाए। अच्छी पैदावार के लिए बीज को बदलना बेहद जरूरी है।
रजबपुर के नेहरू स्मारक इंटर कालेज मैदान में नौगावां सादात विस सीट से पार्टी उम्मीदवार सोरन सिंह के समर्थन में आयोजित बैठक में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि किसान व मजदूरों को खड़ा करना ही पार्टी का एजेंडा है। इस समय किसान कहता है कि मैं गन्ना डालकर आया हूं, लेकिन प्रदेश में हमारी सरकार बनी तो कहेगा गन्ना बेचकर आया हूं।
बेचना यानी इस हाथ गन्ना दिया और उस हाथ पैसा लिया। 2014 में धान चार से पांच हजार रुपये कुंतल था। भाजपा सरकार से किसानों ने अपेक्षा लगा रखी थी इस बार छह हजार हो जाएगा। अच्छे दिन आएंगे, किन्तु नहीं आए। सरकार किसानों के कर्ज माफ करने में दिलचस्पी नहीं दिखा रही है बल्कि उनको कर्जदार बनाने में लगी है। गन्ने का रेट एक लाख रुपये प्रति हेक्टेयर किसान को मिलना चाहिए, तभी वह खुश रहेगा।
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उन्होंने कहा कि नोटबंदी से घर में ही विवाद हुआ है। आम आदमी ही लाइन में दिखा है, जबकि सूटबूट वाले नजर नहीं आए। यमुना एक्सप्रेस वे में खुद ही सपाइयों ने जमीन दी है और खुद ही मुआवजा रखा है। कहते हैं कि विकास हुआ है।
उन्होंने कहा कि प्रदेश में अगर हमारी सरकार आई तो वह किसान सरकार होगी। लोगों को रोजगार दिया जाएगा। कताई मिल को सुचारु कराएंगे और मजदूरों को रोजगार मिलेगा। अच्छी खेती के लिए बीज का बदलना बहुत जरूरी होता है। इसलिए सभी लोग प्रदेश के बीज को बदल डालो।
पहले कांग्रेस कहती थी कि 27 साल यूपी बेहाल, लेकिन अब ऐसा क्या हुआ जो कह रही है कि यूपी बहाल। उन्होंने पार्टी उम्मीदवार सोरन सिंह के पक्ष में मतदान करने की अपील की।
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रजबपुर के नेहरू स्मारक इंटर कालेज मैदान में नौगावां सादात विस सीट से पार्टी उम्मीदवार सोरन सिंह के समर्थन में आयोजित बैठक में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि किसान व मजदूरों को खड़ा करना ही पार्टी का एजेंडा है। इस समय किसान कहता है कि मैं गन्ना डालकर आया हूं, लेकिन प्रदेश में हमारी सरकार बनी तो कहेगा गन्ना बेचकर आया हूं।
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बेचना यानी इस हाथ गन्ना दिया और उस हाथ पैसा लिया। 2014 में धान चार से पांच हजार रुपये कुंतल था। भाजपा सरकार से किसानों ने अपेक्षा लगा रखी थी इस बार छह हजार हो जाएगा। अच्छे दिन आएंगे, किन्तु नहीं आए। सरकार किसानों के कर्ज माफ करने में दिलचस्पी नहीं दिखा रही है बल्कि उनको कर्जदार बनाने में लगी है। गन्ने का रेट एक लाख रुपये प्रति हेक्टेयर किसान को मिलना चाहिए, तभी वह खुश रहेगा।
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उन्होंने कहा कि नोटबंदी से घर में ही विवाद हुआ है। आम आदमी ही लाइन में दिखा है, जबकि सूटबूट वाले नजर नहीं आए। यमुना एक्सप्रेस वे में खुद ही सपाइयों ने जमीन दी है और खुद ही मुआवजा रखा है। कहते हैं कि विकास हुआ है।
उन्होंने कहा कि प्रदेश में अगर हमारी सरकार आई तो वह किसान सरकार होगी। लोगों को रोजगार दिया जाएगा। कताई मिल को सुचारु कराएंगे और मजदूरों को रोजगार मिलेगा। अच्छी खेती के लिए बीज का बदलना बहुत जरूरी होता है। इसलिए सभी लोग प्रदेश के बीज को बदल डालो।
पहले कांग्रेस कहती थी कि 27 साल यूपी बेहाल, लेकिन अब ऐसा क्या हुआ जो कह रही है कि यूपी बहाल। उन्होंने पार्टी उम्मीदवार सोरन सिंह के पक्ष में मतदान करने की अपील की।