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प्रेग्नेंट है लावारिस किशोरी, दरिंदगी का शक गहराया
ब्यूरो/अमर उजाला अमरोहा
Updated Sun, 23 Oct 2016 11:35 PM IST
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जिस किशोरी को मुरादाबाद नारी निकेतन से मेंटल बताकर वापस भेज दिया गया था, वह प्रेग्नेंट है। इसके बाद वहशियों की दरिंदगी के शिकार का शक गहरा गया है। पुलिस उसकी भाषा नहीं समझ पा रही है। किशोरी मैथिली या बांग्ला बोल रही है। खाना पूड़ी खिलाता था... कहकर पीड़िता खामोश हो जाती है। इससे पुलिस अंदाजा लगा रही है कि उसके साथ गलत काम हुआ है।
बहरहाल दूसरे दिन भी पीड़िता जनपद अस्पताल में पुलिस की निगहबानी में रही। बगैर परीक्षण डाक्टर उसको मेंटल घोषित करने की बात से इंकार कर रहे हैं।
गत 20 अक्टूबर को हसनपुर कोतवाली क्षेत्र के गांव गुलामपुर में रात करीब 12 बजे एक ग्रामीण के घर में भटकते हुए किशोरी पहुंच गई थी। ग्रामीण उसकी भाषा नहीं समझ पाए थे। सीओ हसनपुर ने रात में ही किशोरी को लेने के लिए पुलिस भेज दी थी।
जिसे अगले दिन कोर्ट में पेश किया था, जिस पर अदालत ने उसको नारी निकेतन भेजने के आदेश दिए थे। महिला कांस्टेबल उसको लेकर मुरादाबाद संवासिनी गृह पहुंची थी, मगर वहां किशोरी को मेंटल बताकर वापस लौटा दिया था। पुलिस पूछताछ में उसने अपना नाम सीमा जिला खगड़िया बिहार बताया था। गांव का नाम वह स्पष्ट रूप से नहीं बता पा रही थी।
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नारी निकेतन स्टाफ की हरकत की सूचना महिला कांस्टेबल ने पुलिस अधिकारियों को दी थी, जिस पर एसपी डा. शिवा शिम्पी चनप्पा ने उसको जिला अस्पताल में ठहराने को कहा था। रविवार को दूसरे दिन भी किशोरी अस्पताल में ही रही। अधिकारिक सूत्रों पर भरोसा करें तो किशोरी गर्भवती है। शायद उसके साथ बलात्कार किया गया है।
इधर पुलिस का कहना है कि वह सब बात जान रही है, मगर उसकी भाषा कोई नहीं समझ पा रहा है। यही परेशानी सच्चाई की तह तक पहुंचने में रुकावट खड़ी कर रही है। महिला कांस्टेबल के मुताबिक किशोरी बिहार की या फिर बांग्ला भाषा बोल रही है। इधर, हसनपुर के एसडीएम अशोक मौर्य का कहना है कि, किशोरी को उसकी सुरक्षा के लिए नारी निकेतन भेजा गया था। लेकिन यदि किशोरी के मेंटल होने की बात से उसे लौटाया गया है, तो उसका मानसिक परीक्षण कराया जाना चाहिए।
एसपी डॉ. एस चन्नप्पा का कहना है कि, किशोरी के मेडिकल के आदेश दिए गए हैं। मेडिकल के बाद जो भी रिपोर्ट आएगी, उसी के आधार पर अगली कार्रवाई की जाएगी।
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बहरहाल दूसरे दिन भी पीड़िता जनपद अस्पताल में पुलिस की निगहबानी में रही। बगैर परीक्षण डाक्टर उसको मेंटल घोषित करने की बात से इंकार कर रहे हैं।
गत 20 अक्टूबर को हसनपुर कोतवाली क्षेत्र के गांव गुलामपुर में रात करीब 12 बजे एक ग्रामीण के घर में भटकते हुए किशोरी पहुंच गई थी। ग्रामीण उसकी भाषा नहीं समझ पाए थे। सीओ हसनपुर ने रात में ही किशोरी को लेने के लिए पुलिस भेज दी थी।
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जिसे अगले दिन कोर्ट में पेश किया था, जिस पर अदालत ने उसको नारी निकेतन भेजने के आदेश दिए थे। महिला कांस्टेबल उसको लेकर मुरादाबाद संवासिनी गृह पहुंची थी, मगर वहां किशोरी को मेंटल बताकर वापस लौटा दिया था। पुलिस पूछताछ में उसने अपना नाम सीमा जिला खगड़िया बिहार बताया था। गांव का नाम वह स्पष्ट रूप से नहीं बता पा रही थी।
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नारी निकेतन स्टाफ की हरकत की सूचना महिला कांस्टेबल ने पुलिस अधिकारियों को दी थी, जिस पर एसपी डा. शिवा शिम्पी चनप्पा ने उसको जिला अस्पताल में ठहराने को कहा था। रविवार को दूसरे दिन भी किशोरी अस्पताल में ही रही। अधिकारिक सूत्रों पर भरोसा करें तो किशोरी गर्भवती है। शायद उसके साथ बलात्कार किया गया है।
इधर पुलिस का कहना है कि वह सब बात जान रही है, मगर उसकी भाषा कोई नहीं समझ पा रहा है। यही परेशानी सच्चाई की तह तक पहुंचने में रुकावट खड़ी कर रही है। महिला कांस्टेबल के मुताबिक किशोरी बिहार की या फिर बांग्ला भाषा बोल रही है। इधर, हसनपुर के एसडीएम अशोक मौर्य का कहना है कि, किशोरी को उसकी सुरक्षा के लिए नारी निकेतन भेजा गया था। लेकिन यदि किशोरी के मेंटल होने की बात से उसे लौटाया गया है, तो उसका मानसिक परीक्षण कराया जाना चाहिए।
एसपी डॉ. एस चन्नप्पा का कहना है कि, किशोरी के मेडिकल के आदेश दिए गए हैं। मेडिकल के बाद जो भी रिपोर्ट आएगी, उसी के आधार पर अगली कार्रवाई की जाएगी।