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कमिश्नर के फर्जी हस्ताक्षरों से 10 वर्ष से अधिक समय तक बांटी 125 सेवानिवृत्त कर्मचारियों को पेंशन
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अमरोहा। नगर पालिका में तैनात चतुर्थ श्रेणी के कारनामों से प्रशासन तक में खलबली मच गई है। चपरासी ने कई फर्जीवाड़े किए हैं। उसका कारनामा फर्जी रसीदें छपवाकर लाखों रुपये हड़पने तक नहीं रहा है। बल्कि उसने कमिश्नर के फर्जी हस्ताक्षर कर दस साल से अधिक समय तक 125 सेवानिवृत्त कर्मचारियों को बगैर स्वीकृत हुए पेंशन बांटी। खुलासा होने के बाद अफसरों की कार्रवाई केवल आरोपी को निलंबित करने तक रही। इसके बाद भी आरोपी नगर पालिका अधिकारियों की शह पर उसी पटल पर संबद्ध रहा, जहां उसने लाखों रुपये का घोटाला किया था। अब राज्यपाल और मुख्यमंत्री से शिकायत के बाद प्रशासन में हड़कंप मचा है।
नगरपालिका में सरकारी रिकार्ड के मुताबिक 157 पेंशनधारक हैं। कर्मचारियों को हर माह पेंशन दिलवाने के लिए पेंशन अनुभाग पटल पर आरोपी कर्मचारी को जिम्मेेदारी सौंपी गई थी। राज्यपाल और मुख्यमंत्री से की गई शिकायत के मुताबिक आरोपी सेवानिवृत्त कर्मचारियों के अभिलेखों में हेराफेरी कर बिना सक्षम अधिकारियों एडीएम और मंडलायुक्त से स्वीकृति प्राप्त किए खुद ही कमिश्नर के नकली हस्ताक्षर बनाकर 10 साल से भी अधिक समय तक 125 कर्मचारियों की फर्जी तरीके से पेंशन निकालता रहा। मामले की जांच हुई तो पूरा मामला पकड़ में आ गया। जांच में पकड़ में आने पर बाद में पत्रावलियां स्वीकृत कराई गईं। खुलासा होने के बाद प्रकरण की जांच तत्कालीन एडीएम द्वारा की गई थी। उनके जांच में गबन का आरोप सिद्ध हो गए थे। बावजूद इसके नगर पालिका के तत्कालीन ईओ व अन्य जिम्मेदार अधिकारियों ने लीपापोती कर उसे बचा लिया। आरोपी को निलंबित कर कुछ दिन बाद भी बहाल कर दिया था। अधिकारियों ने खानापूर्ति करते हुए केवल कागजों में आरोपी का पदनाम बदल दिया। अफसरों की साठगांठ से आरोपी कर्मचारी चतुर्थ श्रेणी के पद पर तैनात होने के बावजूद पेंशन पटल पर काम कर रहा है, जहां उसने लाखों रुपये का घोटाला किया था।
एक भाजपा नेता ने दोनों मामलों में राज्यपाल और मुख्यमंत्री से शिकायत की थी। दोनों मामलों की संयुक्त जांच चल रही है। जल्द की जांच रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को भेजी जाएगी।- डॉ. बृजेश कुमार, ईओ नगर पालिका अमरोहा।
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नगरपालिका में सरकारी रिकार्ड के मुताबिक 157 पेंशनधारक हैं। कर्मचारियों को हर माह पेंशन दिलवाने के लिए पेंशन अनुभाग पटल पर आरोपी कर्मचारी को जिम्मेेदारी सौंपी गई थी। राज्यपाल और मुख्यमंत्री से की गई शिकायत के मुताबिक आरोपी सेवानिवृत्त कर्मचारियों के अभिलेखों में हेराफेरी कर बिना सक्षम अधिकारियों एडीएम और मंडलायुक्त से स्वीकृति प्राप्त किए खुद ही कमिश्नर के नकली हस्ताक्षर बनाकर 10 साल से भी अधिक समय तक 125 कर्मचारियों की फर्जी तरीके से पेंशन निकालता रहा। मामले की जांच हुई तो पूरा मामला पकड़ में आ गया। जांच में पकड़ में आने पर बाद में पत्रावलियां स्वीकृत कराई गईं। खुलासा होने के बाद प्रकरण की जांच तत्कालीन एडीएम द्वारा की गई थी। उनके जांच में गबन का आरोप सिद्ध हो गए थे। बावजूद इसके नगर पालिका के तत्कालीन ईओ व अन्य जिम्मेदार अधिकारियों ने लीपापोती कर उसे बचा लिया। आरोपी को निलंबित कर कुछ दिन बाद भी बहाल कर दिया था। अधिकारियों ने खानापूर्ति करते हुए केवल कागजों में आरोपी का पदनाम बदल दिया। अफसरों की साठगांठ से आरोपी कर्मचारी चतुर्थ श्रेणी के पद पर तैनात होने के बावजूद पेंशन पटल पर काम कर रहा है, जहां उसने लाखों रुपये का घोटाला किया था।
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एक भाजपा नेता ने दोनों मामलों में राज्यपाल और मुख्यमंत्री से शिकायत की थी। दोनों मामलों की संयुक्त जांच चल रही है। जल्द की जांच रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को भेजी जाएगी।- डॉ. बृजेश कुमार, ईओ नगर पालिका अमरोहा।
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