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Amroha News: झोलाछापों को उम्रकैद के बाद पीड़ित नेम सिंह को मिल रही धमकी, बोले- अब बेटे को खतरा

Moradabad  Bureau मुरादाबाद ब्यूरो
Updated Mon, 05 Oct 2026 01:58 AM IST
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Victim Nem Singh receiving threats after quacks sentenced to life imprisonment.
अमरोहा। गलत ऑपरेशन के दौरान पत्नी रूबी की मौत और नवजात बेटे को मृत समझकर छोड़ देने के मामले में दो झोलाछापों को उम्रकैद की सजा मिलने के बाद गुरैठा निवासी नेम सिंह को अब धमकियां मिलने लगी हैं। नेम सिंह का कहना है कि कुछ लोग फोन कर पूछ रहे हैं कि विल्सन और मुस्तफा को उम्रकैद क्यों करा दी। उन्होंने आशंका जताई है कि अब उनके नौ वर्षीय बेटे निर्दोष को भी खतरा हो सकता है। उन्होंने प्रशासन से परिवार की सुरक्षा की मांग की है।
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नेम सिंह की शादी वर्ष 2016 में बुलंदशहर निवासी रूबी से हुई थी। शादी के बाद पत्नी के गर्भवती होने पर दोनों परिवार में आने वाले नन्हे मेहमान को लेकर खुश थे। तीन अक्तूबर 2017 को प्रसव पीड़ा होने पर रूबी को रहरा के युग मेडिकल सेंटर में भर्ती कराया गया। नेम सिंह के मुताबिक विल्सन ने जच्चा-बच्चा की जिम्मेदारी लेते हुए कहा था कि उसके पास बड़े-बड़े डॉक्टर काम करते हैं। उनकी सहमति के बिना विल्सन ने मुस्तफा को बुलाकर रूबी का ऑपरेशन कराया गया। मुस्तफा भी झोलाछाप था। ऑपरेशन के नाम पर 22 हजार रुपये लिए गए और सोने की अंगूठी भी ले ली गई थी।
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ऑपरेशन के दौरान बेटे का जन्म हुआ, लेकिन रूबी की मौत हो गई। इसके बाद दोनों ने नवजात को भी मृत समझकर ट्रे में डाल दिया। परिवार के सभी लोग परेशान थे। तभी नवजात के रोने की आवास आने लगी। नेम सिंह की चाची ने बच्चे को देखा तो वह जीवित मिला। परिजन उसे कपड़ों में लपेटकर संभल के निजी अस्पताल ले गए, जहां उपचार के बाद उसकी जान बच गई। हालत बिगड़ने की बात कहकर विल्सन और मुस्तफा ने रूबी को मेरठ रेफर कर दिया था, लेकिन वहां पहुंचने पर डॉक्टरों ने घंटों पहले मौत होने की बात कहकर रूबी को मृत घोषित कर दिया था।
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नेम सिंह ने बताया कि पत्नी की मौत के बाद से वह बेटे निर्दोष की अकेले परवरिश कर रहे हैं। दिल्ली के मुखर्जी नगर में मेहनत-मजदूरी करते हैं। बेटे की परवरिश प्रभावित न हो, इसलिए उन्होंने दूसरी शादी भी नहीं की। नौ वर्षीय निर्दोष अक्सर अपनी मां को याद करता है। नेम सिंह बोले कि वह इतने वर्षों से परमात्मा से इंसाफ की गुहार लगा रहे थे। अदालत के फैसले से उन्हें इंसाफ मिला है, लेकिन अब धमकियों ने चिंता बढ़ा दी है।

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चौकी इंचार्ज ने बताया था बच्चे को निर्दोष, इसलिए बेटे का नाम निर्दाेष रखा
नेम सिंह ने बताया कि घटना के बाद तत्कालीन चौकी इंचार्ज किरन पाल ने जांच के दौरान बच्चे को निर्दोष बताया था। इसी वजह से उन्होंने बेटे का नाम भी निर्दोष रख दिया। नेम सिंह का कहना है कि जिस बच्चे को आरोपियों ने मृत समझकर छोड़ दिया था, वही आज उनके जीवन का सहारा है। बच्चे की परवरिश के लिए उन्होंने अपने गांव की चार बीघा जमीन और घर की ईंटें भी बेच दी हैं।

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झोलाछापों को उम्रकैद के बाद अगर कोई पीड़ित को धमकी दे रहा है तो जांच कराई जाएगी। मामले में पीड़ित की ओर से कोई तहरीर या शिकायत नहीं मिली है। अगर तहरीर मिलती है तो प्राथमिकी दर्ज कर कार्रवाई की जाएगी।
-पंकज त्यागी, सीओ
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