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पंद्रह सौ रुपये देकर आठ साल पहले बनी थी पेंशन की लाभार्थी
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ढबारसी/अमरोहा। जिला प्रोबेशन विभाग में विधवा पेंशन में फर्जीवाड़े के खुलासे के बाद विभागीय अधिकारियों में हड़कंप मचा है। उच्चाधिकारियों के निर्देश पर एडीओ समाज कल्याण प्रकरण की जांच करने गांव पहुंचे। यहां महिला का पति जीवित पाया गया। उन्होंने लाभार्थी महिला के बयान दर्ज किए। उसके बयानों की वीडियो भी बनाई। जिसमें महिला ने बताया कि उसे नहीं पता कि उसे पेंशन विधवा की मिल रही है या वृद्धावस्था की। सात-आठ साल पहले एक दलाल उससे कागज और 1500 रुपये लेकर गया था, तभी से पेंशन उसके खाते में आ रही है। अब एडीओ पंचायत जांच रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को सौंपेंगे।
जिला समाज कल्याण विभाग की वृद्धावस्था और जिला प्रोबेशन विभाग की विधवा पेंशन प्रणाली में बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। समाज कल्याण विभाग में हसनपुर ब्लाक क्षेत्र के भीमा सुल्तानपुर और गंगेश्वरी के ढबारसी में गांव में अपात्र और मृतक लाभार्थियों के नाम पर पेंशन के बंदरबांट करने का खुलासा हुआ है। जबकि जिला प्रोबेशन विभाग में ढबारसी ग्राम पंचायत की वित्तीय वर्ष 2020-21 की सूची के आधार पर जीवित पति को स्वर्गीय बनाकर विधवा पेंशन लेने का मामला सामने आया है। जबकि उसका पति स्वस्थ और सकुशल घर में मौजूद हैं। पेंशन आवेदन के कागजों में जिंदा पति का मृत्यु प्रमाण पत्र लगाया गया है। दोनों विभागों में अधिकारी-कर्मचारियों की साठगांठ से यह फर्जीवाड़ा हो रहा है।
वित्तीय वर्ष 2020-21 की सूची के आधार पर कई लोगों की जाति बदलकर और उनके खाते बदलकर फर्जीवाड़ा किया गया है। इससे पहले ढबारसी में वर्षों पहले मरे 22 लोगों को वृद्धापेंशन दिए जाने का खुलासा हुआ था। अमर उजाला ने जीवित पति को स्वर्गीय बनाकर विधवा पेंशन लिए जाने का खुलासा किया तो विभागीय अधिकारियों को खलबली मच गई। आंख मूंदकर अपात्रों को पात्रता की श्रेणी में लाने वाले अफसरों की निंद्रा टूट गई। शुक्रवार को उच्चधिकारियों के निर्देश पर एडीओ परमानंद गांव में जांच करने पहुंचे। लाभार्थी महिला के घर पहुंचे तो उसका पति मौके पर मौजूद मिला। एडीओ ने महिला से बयान दर्ज किए और फोन से उसकी वीडियो भी बनाई। स्थानीय लोगों के मुुताबिक एडीओ ने महिला से पेंशन मिलने के बारे में पूछा तो उसने पिछले सात-आठ साल से पेंशन मिलना कबूल किया।
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पहचान पत्र, फोटो और पासबुक दी थी
ढबारसी। जीवित पति को स्वर्गीय बनाकर विधवा पेंशन लेने वाली महिला ने दावा किया की उसने 7-8 साल पहले पेंशन बनवाई थी। दलाल ने पेंशन बनवाने के एवज में 1500 रुपये भी लिए थे। इस दौरान उसने पेंशन बनवाने के लिए दलाल को केवल पहचान पत्र, बैंक की पास बुक और फोटो दिए थे।
मौत के बाद भी लाभार्थियों के नाम पर भी आ रही पेंशन
ढबारसी। ढबारसी ग्राम पंचायत में 41 महिलाओं को विधवा पेंशन मिल रही है। इसमें 51 वर्षीय एक महिला जीवित पति को स्वर्गीय बनाकर विधवा पेंशन ले रही थी। जबकि चार लाभार्थी महिलाओं की मौत हो चुकी है। लेकिन, जिला प्रोबेशन विभाग की वित्तीय वर्ष 2020-21 की सूची के आधार उनके नाम पर आज भी पेंशन आ रही है। इसमें कई मामले में ऐसे है बैंक खाता नंबर किसी दूसरे के हैं।
बड़ा सवाल
ढबारसी। अब जिला प्रोबेशन विभाग के सिस्टम पर सवाल यह है कि जब विधवा पेंशन की पात्रता के लिए पति का मृत्यु प्रमाण पत्र अनिवार्य है और महिला ने मृत्यु प्रमाण पत्र दिया ही नहीं। उसका पति जीवित है तो फिर कैसे उसकी विधवा पेंशन बना दी गई। क्या दलाल और विभागीय अधिकारी-कर्मचारियों ने फर्जीवाड़ा कर उसके पति का मृत्यु प्रमाण पत्र तैयार कर सरकार की वेबसाइट पर अपलोड कर दिया है। यह तो पहला मामला सामने आया है, अगर निष्पक्ष और ईमानदारी से जांच हुई तो कई ऐसे प्रकरण सामने आ जाएंगे।
ये कैसा सत्यापन, आठ साल से पकड़ में नहीं आई महिला
ढबारसी। जिला समाज कल्याण विभाग और जिला प्रोबेशन विभाग के अफसरों का दावा है कि हर साल लाभार्थियों का सत्यापन कराया जाता है। लाभार्थियों का सत्यापन सेक्रेटरी के अलावा ब्लाक स्तरीय टीम करती है। सवाल यह है कि पिछले सात-आठ सालों से यह महिला अधिकारियों के सत्यापन में कैसे पात्र साबित होती रही है।
जिंदा पति के बावजूद विधवा पेंशन लेने का मामला सही पाया गया है, जांच रिपोर्ट वरिष्ठ अधिकारियों को प्रेषित की जा रही है।
परमानन्द, एडीओ समाज कल्याण, गंगेश्वरी
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जिला समाज कल्याण विभाग की वृद्धावस्था और जिला प्रोबेशन विभाग की विधवा पेंशन प्रणाली में बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। समाज कल्याण विभाग में हसनपुर ब्लाक क्षेत्र के भीमा सुल्तानपुर और गंगेश्वरी के ढबारसी में गांव में अपात्र और मृतक लाभार्थियों के नाम पर पेंशन के बंदरबांट करने का खुलासा हुआ है। जबकि जिला प्रोबेशन विभाग में ढबारसी ग्राम पंचायत की वित्तीय वर्ष 2020-21 की सूची के आधार पर जीवित पति को स्वर्गीय बनाकर विधवा पेंशन लेने का मामला सामने आया है। जबकि उसका पति स्वस्थ और सकुशल घर में मौजूद हैं। पेंशन आवेदन के कागजों में जिंदा पति का मृत्यु प्रमाण पत्र लगाया गया है। दोनों विभागों में अधिकारी-कर्मचारियों की साठगांठ से यह फर्जीवाड़ा हो रहा है।
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वित्तीय वर्ष 2020-21 की सूची के आधार पर कई लोगों की जाति बदलकर और उनके खाते बदलकर फर्जीवाड़ा किया गया है। इससे पहले ढबारसी में वर्षों पहले मरे 22 लोगों को वृद्धापेंशन दिए जाने का खुलासा हुआ था। अमर उजाला ने जीवित पति को स्वर्गीय बनाकर विधवा पेंशन लिए जाने का खुलासा किया तो विभागीय अधिकारियों को खलबली मच गई। आंख मूंदकर अपात्रों को पात्रता की श्रेणी में लाने वाले अफसरों की निंद्रा टूट गई। शुक्रवार को उच्चधिकारियों के निर्देश पर एडीओ परमानंद गांव में जांच करने पहुंचे। लाभार्थी महिला के घर पहुंचे तो उसका पति मौके पर मौजूद मिला। एडीओ ने महिला से बयान दर्ज किए और फोन से उसकी वीडियो भी बनाई। स्थानीय लोगों के मुुताबिक एडीओ ने महिला से पेंशन मिलने के बारे में पूछा तो उसने पिछले सात-आठ साल से पेंशन मिलना कबूल किया।
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पहचान पत्र, फोटो और पासबुक दी थी
ढबारसी। जीवित पति को स्वर्गीय बनाकर विधवा पेंशन लेने वाली महिला ने दावा किया की उसने 7-8 साल पहले पेंशन बनवाई थी। दलाल ने पेंशन बनवाने के एवज में 1500 रुपये भी लिए थे। इस दौरान उसने पेंशन बनवाने के लिए दलाल को केवल पहचान पत्र, बैंक की पास बुक और फोटो दिए थे।
मौत के बाद भी लाभार्थियों के नाम पर भी आ रही पेंशन
ढबारसी। ढबारसी ग्राम पंचायत में 41 महिलाओं को विधवा पेंशन मिल रही है। इसमें 51 वर्षीय एक महिला जीवित पति को स्वर्गीय बनाकर विधवा पेंशन ले रही थी। जबकि चार लाभार्थी महिलाओं की मौत हो चुकी है। लेकिन, जिला प्रोबेशन विभाग की वित्तीय वर्ष 2020-21 की सूची के आधार उनके नाम पर आज भी पेंशन आ रही है। इसमें कई मामले में ऐसे है बैंक खाता नंबर किसी दूसरे के हैं।
बड़ा सवाल
ढबारसी। अब जिला प्रोबेशन विभाग के सिस्टम पर सवाल यह है कि जब विधवा पेंशन की पात्रता के लिए पति का मृत्यु प्रमाण पत्र अनिवार्य है और महिला ने मृत्यु प्रमाण पत्र दिया ही नहीं। उसका पति जीवित है तो फिर कैसे उसकी विधवा पेंशन बना दी गई। क्या दलाल और विभागीय अधिकारी-कर्मचारियों ने फर्जीवाड़ा कर उसके पति का मृत्यु प्रमाण पत्र तैयार कर सरकार की वेबसाइट पर अपलोड कर दिया है। यह तो पहला मामला सामने आया है, अगर निष्पक्ष और ईमानदारी से जांच हुई तो कई ऐसे प्रकरण सामने आ जाएंगे।
ये कैसा सत्यापन, आठ साल से पकड़ में नहीं आई महिला
ढबारसी। जिला समाज कल्याण विभाग और जिला प्रोबेशन विभाग के अफसरों का दावा है कि हर साल लाभार्थियों का सत्यापन कराया जाता है। लाभार्थियों का सत्यापन सेक्रेटरी के अलावा ब्लाक स्तरीय टीम करती है। सवाल यह है कि पिछले सात-आठ सालों से यह महिला अधिकारियों के सत्यापन में कैसे पात्र साबित होती रही है।
जिंदा पति के बावजूद विधवा पेंशन लेने का मामला सही पाया गया है, जांच रिपोर्ट वरिष्ठ अधिकारियों को प्रेषित की जा रही है।
परमानन्द, एडीओ समाज कल्याण, गंगेश्वरी