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सर्दी में अंगीठी बनी 'काल': घर से एक साथ उठे चार जनाजे, पूरे गांव में पसरा मातम; हर आंख से छलके आंसू

Wed, 10 Jan 2024 07:50 PM IST
अनुज कुमार अमर उजाला नेटवर्क, अमरोहा
अमर उजाला नेटवर्क, अमरोहा Published by: अनुज कुमार Updated Wed, 10 Jan 2024 07:50 PM IST
सार

घर में कोयला जलाकर सो रहे एक ही परिवार के चार लोगों की मौत हो गई। जिसके बाद पूरे गांव में मातम पसर गया। तीन बच्चों के बाद उनकी मां ने भी तोड़ा दम 40 वर्षीय हुसैन जहां ने भी उपचार के दौरान संभल के अस्पताल में दम तोड़ दिया है।

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four people of same family died while sleeping after burning coal in their house In Amroha
जनाजे में शामिल हुए लोग - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

गांव अल्लीपुर भूड़ शर्की उर्फ ढक्का मोड़ पर कमरे में कोयला जलाकर सोते समय दम घुटने की वजह से हुई एक ही परिवार के चार लोगों की मौत से पूरे गांव में मातम पसरा हुआ है। बुधवार को एक साथ चार जनाजे उठे तो हर आंख से आंसू छलक रहे थे। पुलिस प्रशासन के अधिकारियों की मौजूदगी में पोस्टमार्टम के बाद चारों शव गांव ले गए। इसके बाद उनका दफीना हुआ।

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 क्षेत्र के गांव अल्लीपुर भूड़ शर्की उर्फ ढक्का मोड़ निवासी ट्रक चालक रईसुद्दीन का परिवार और रिश्तेदार सोमवार की रात को कमरे में सोए थे। जिसमें उन्होंने सर्दी से बचने के लिए परात में कोयले जलाकर रखे थे। जबकि, रईसुद्दीन ट्रक चलाने के लिए बाहर गया हुआ था। 
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रात में किसी समय दम घुटने की वजह से रईसुद्दीन की बीस वर्षीय बेटी सोनम, सोलह वर्षीय बेटा जैद और ग्यारह वर्षीय बेटा माहिर, साले की पंद्रह वर्षीय बेटी महक और साढ़ू की ग्यारह वर्षीय बेटी कशिश की मौके पर मौत हो गई थी। जबकि उसकी पत्नी हुस्न जहां और साले रियायत को रेफर किया गया था। हुस्न जहां की भी उपचार के दौरान बुधवार तड़के में मौत हो गई। घटना का पता मंगलवार शाम चला। 
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पूरे दिन किसी के बाहर न आने पर लोग अंदर पहुंचे थे तो उनके होश उड़ गए थे। पोस्टमार्टम के बाद जब हुस्नजहां, उसके बेटे जैद और माहिर व बेटी सोनम का शव पहुंचा तो गांव में रिश्तेदारों और ग्रामीणों का हजारों की तादाद में भीड़ जमा हो गई। पूरे गांव में मातम छाया हुआ था। एक साथ चार जनाजे उठे तो हर किसी की आंख से आंसू छलकने शुरू हो गए। 


मंगलवार की रात को किसी के घर में चूल्हा नहीं जला। तो बुधवार को भी किसी के घर में चूल्हा नहीं जल सका। गमगीन माहौल में चारों को एक साथ अगल-अलग कब्र में सुपुर्द-ए-खाक कर दिया गया। महक का उसके गांव सिहाली जागीर में दफीना हुआ तो कशिश के शव को मंडी धनौरा में सुपुर्द-ए-खाक कर दिया गया।

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