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Amroha News: पूर्व सांसद हरीश नागपाल ने भाजपा की सदस्यता ली
Tue, 22 Oct 2024 05:39 AM IST
मुरादाबाद ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अमरोहा
संवाद न्यूज एजेंसी, अमरोहा
Updated Tue, 22 Oct 2024 05:39 AM IST
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अमरोहा। अमरोहा लोकसभा से निर्दलीय सांसद रहे हरीश नागपाल ने सोमवार को दिल्ली में भारतीय जनता पार्टी की सदस्यता ली है। वह वर्ष 2004 में निर्दलीय सांसद चुने गए थे। वर्ष 2002 में अपने छोटे भाई देवेंद्र नागपाल को तत्कालीन हसनपुर विधानसभा क्षेत्र से निर्दलीय विधायक बनाने में उनकी अहम भूमिका रही है।
भाई को निर्दलीय विधायक बनाने के बाद हरीश नागपाल ने वर्ष 2004 में हुए लोकसभा चुनाव में निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में अपनी किस्मत आजमाई थी। उनका मुकाबला उस समय भाजपा के दिग्गज नेता पूर्व क्रिकेटर चेतन चौहान से था। उनके सामने मौलाना महमूद मदनी के भाई भी चुनाव मैदान में थे। हरीश नागपाल ने निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में जीत हासिल कर लोगों को चौंका दिया था। हरीश नागपाल उस समय बहुत चर्चा में आए जब वर्ष 2008 में यूपीए सरकार के कार्यकाल के दौरान हुई न्यू क्लियर डील पर उन्होंने सरकार के विरोध में भाजपा के कहने पर मतदान किया था।
उस समय भाजपा के बड़े नेता अटल बिहारी वाजपेई, लालकृष्ण आडवाणी, वेंकैया नायडू आदि की गुड बुक में हरीश नागपाल आ गए थे। लेकिन वर्ष 2009 में भाजपा ने उनसे वादाखिलाफी करते हुए अमरोहा लोकसभा से टिकट नहीं दिया। भाजपा ने वह सीट रालोद से हुए समझौते के तहत अजीत सिंह को दी थी। उस समय रालोद -भाजपा के संयुक्त प्रत्याशी के रूप में हरीश नागपाल के छोटे भाई देवेंद्र नागपाल चुनाव लड़कर सांसद बने थे। अपने भाई के ही खिलाफ हरीश नागपाल निर्दलीय सांसद के रूप में चुनाव लड़े लेकिन वह हार गए। राजनीति में अपनी जुबान की कीमत की वजह से उनका एक अपना अलग मुकाम रहा है। हरीश नागपाल ने बताया कि उन्होंने सक्रिय सदस्य के तौर पर सदस्यता ग्रहण की है।
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भाई को निर्दलीय विधायक बनाने के बाद हरीश नागपाल ने वर्ष 2004 में हुए लोकसभा चुनाव में निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में अपनी किस्मत आजमाई थी। उनका मुकाबला उस समय भाजपा के दिग्गज नेता पूर्व क्रिकेटर चेतन चौहान से था। उनके सामने मौलाना महमूद मदनी के भाई भी चुनाव मैदान में थे। हरीश नागपाल ने निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में जीत हासिल कर लोगों को चौंका दिया था। हरीश नागपाल उस समय बहुत चर्चा में आए जब वर्ष 2008 में यूपीए सरकार के कार्यकाल के दौरान हुई न्यू क्लियर डील पर उन्होंने सरकार के विरोध में भाजपा के कहने पर मतदान किया था।
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उस समय भाजपा के बड़े नेता अटल बिहारी वाजपेई, लालकृष्ण आडवाणी, वेंकैया नायडू आदि की गुड बुक में हरीश नागपाल आ गए थे। लेकिन वर्ष 2009 में भाजपा ने उनसे वादाखिलाफी करते हुए अमरोहा लोकसभा से टिकट नहीं दिया। भाजपा ने वह सीट रालोद से हुए समझौते के तहत अजीत सिंह को दी थी। उस समय रालोद -भाजपा के संयुक्त प्रत्याशी के रूप में हरीश नागपाल के छोटे भाई देवेंद्र नागपाल चुनाव लड़कर सांसद बने थे। अपने भाई के ही खिलाफ हरीश नागपाल निर्दलीय सांसद के रूप में चुनाव लड़े लेकिन वह हार गए। राजनीति में अपनी जुबान की कीमत की वजह से उनका एक अपना अलग मुकाम रहा है। हरीश नागपाल ने बताया कि उन्होंने सक्रिय सदस्य के तौर पर सदस्यता ग्रहण की है।
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