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Amroha News: अनदेखी की बाढ़ में बह गए पांच करोड़, अमृत को तरस रहे जिले भर के सरोवर
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अमरोहा। आजादी के अमृत महोत्सव पर जिले के सभी छह ब्लॉकों में 135 अमृत सरोवर बनाए गए। इनमें जल सहेजने के लिए पांच करोड़ से अधिक रुपये से इंतजाम किए गए, जो प्रशासनिक अनदेखी की बाढ़ में बह गए। हालात ये हैं कि तालाब कहीं गंदगी से पटे पड़े तो कहीं धूल उड़ रही है। कई तालाबों पर फिर से कब्जा हो गया है। किसी तालाब में झाड़ियों का अंबार है तो कहीं पर रोपे गए पौधे भी गायब हो गए हैं। हां कागजों में ये हरे भरे है और इनकी बेहतर देखभाल का दावा किया जा रहा है।
प्रदेशभर में लगातार गिरते जा रहे भूगर्भ जल को बचाने के लिए सरकार बेहद गंभीर है। उसने बारिश के पानी को सहेजने के लिए प्रत्येक जिले में 75-75 अमृत सरोवर बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया था लेकिन बाद में उनकी संख्या को दोगुना कर दिया गया था। बड़े पैमाने पर गांव- गांव अमृत सरोवर के निर्माण का कार्य चला था। जिले के 165 तालाबों में से 135 को प्रशासन ने अमृत सरोवर बना दिया। इन पर तकरीबन पांच करोड़ से अधिक की धनराशि खर्च कर दी है। यहां अमृत सरोवर पर लोगों के टहलने के लिए इंटरलाकिंग सड़क, झंडा फहराने का चबूतरा, पानी के लिए नल व छाया के लिए पौधे रोपने का कार्य किया गया। अब देखरेख के अभाव में एक बार फिर उनकी सूरत बिगड़ गई है। संवाद
सुबह 11 बजे : अमरोहा
बुधवार की सुबह 11.32 बजे अहरोई गांव के अमृत सरोवर तालाब की स्थिति बाहर से खूबसूरत दिखी लेकिन अंदर से बदहाल मिली। तालाब में एक बूंद भी पानी नहीं हैं। जबकि घास जम आई है। वहीं प्रशासन ने नगर के पनवाड़ी तालाब को भी अमृत सरोवर बनाने की बता कही थी। परंपरागत तरीके से हवन पूजन किया गया लेकिन आज तक पनवाड़ी तालाब की सफाई और खुदाई तक नहीं की गई है।
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शाम 4:15 बजे गजरौला
गजरौला में अमृत सरोवरों में उगी घास और झाड़ियां गजरौला ब्लॉक क्षेत्र में मोहम्मदाबाद मुस्तकम, कुमराला, कर्मल्लीपुर, पाल, वारसाबाद, भारापुर सहित 30 अमृत सरोवर हैं। जिनकी बीते साल सफाई कराने, लोगों के बैठने के लिए बैंच बना कर छोड़ दिया गया। इसके बाद उनकी सुध नहीं ली गई। जिसके चलते अमृत सरोवर अपने मकसद पर खरे नहीं उतर रहे हैं। उनमें घास उग आई हैं। जिसके चलते बारिश होने पर गांव का पानी अमृत सरोवरों में नहीं जा सकता। गांवों में अमृत सरोवर इसलिए बनाए गए थे कि आस पास के लोग टहल सकें और युवा खेल सकें। देखभाल व सफाई नहीं होने के कारण वह बंजर की तरह दिखाई दे रहे हैं। बस मोहम्मदाबाद का तालाब जरूर कुछ सही हो रहा है। एपीओ नितिन कुमार का कहना है कि तालाबों की सफाई का काम चल रहा है। एक सप्ताह में सबकी सूरत बदली मिलेगी।
जगह तो चिह्नित हुई नहीं हो सका विकास
मंडी धनौरा ब्लाक में ढ्योटी, मलेशिया समेत 28 स्थानों पर अमृत सरोवर बनने की शुरूआत हुई, लेकिन वहां पर साज सज्जा के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति की गई है। रखरखाव के अभाव में मलेशिया में स्थित अमृत सरोवर में तमाम झाड़ी उग गई हैं। गांव का पानी तालाब में नहीं पहुंचता है। ग्रामीणों का आरोप है कि गांव के ही एक व्यक्ति ने तालाब के कुछ क्षेत्रफल को अपने खेत में भी मिला लिया है। अमृत सरोवर बनाने का शासन प्रशासन का मकसद हल नहीं हो रहा है।
अमृत सरोवरों की स्थिति है बदहाल
ब्लाक हसनपुर में करनपुर माफी, रझेड़ा, कूबी समेत दस गांवों में तालाबों को अमृत सरोवर के लिए चुना गया। वहीं हसनपुर नगर की बात करें तो करबला तालाब के अमृत सरोवर बनाने के लिए चिह्नित किया। अधिकांश तालाबों की स्थिति बदहाल है। कहीं तालाब सूखा है तो कहीं झाड़ियां उगी हैं। हसनुपर के करबला तालाब में पानी तो भर गया है लेकिन इसका सुंदरीकरण कब होगा, यह किसी को नहीं पता।
पिछले साल तालाबों को अमृत सरोवर को तैयार करने का कार्य किया गया। जिसके बाद तालाबों में घास उग आई है सभी ग्राम पंचायत सचिव व ग्राम प्रधानों को 15 जून तक तालाबों की सफाई व जल भरने के निर्देश दिए गए हैं। बरसात से पूर्व सभी तालाबों को अमृत सरोवर का रूप दे दिया जाएगा। इसमें किसी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी। अमरेंद्र प्रताप, डीडी मनरेगा/ प्रभारी सीडीओ
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प्रदेशभर में लगातार गिरते जा रहे भूगर्भ जल को बचाने के लिए सरकार बेहद गंभीर है। उसने बारिश के पानी को सहेजने के लिए प्रत्येक जिले में 75-75 अमृत सरोवर बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया था लेकिन बाद में उनकी संख्या को दोगुना कर दिया गया था। बड़े पैमाने पर गांव- गांव अमृत सरोवर के निर्माण का कार्य चला था। जिले के 165 तालाबों में से 135 को प्रशासन ने अमृत सरोवर बना दिया। इन पर तकरीबन पांच करोड़ से अधिक की धनराशि खर्च कर दी है। यहां अमृत सरोवर पर लोगों के टहलने के लिए इंटरलाकिंग सड़क, झंडा फहराने का चबूतरा, पानी के लिए नल व छाया के लिए पौधे रोपने का कार्य किया गया। अब देखरेख के अभाव में एक बार फिर उनकी सूरत बिगड़ गई है। संवाद
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सुबह 11 बजे : अमरोहा
बुधवार की सुबह 11.32 बजे अहरोई गांव के अमृत सरोवर तालाब की स्थिति बाहर से खूबसूरत दिखी लेकिन अंदर से बदहाल मिली। तालाब में एक बूंद भी पानी नहीं हैं। जबकि घास जम आई है। वहीं प्रशासन ने नगर के पनवाड़ी तालाब को भी अमृत सरोवर बनाने की बता कही थी। परंपरागत तरीके से हवन पूजन किया गया लेकिन आज तक पनवाड़ी तालाब की सफाई और खुदाई तक नहीं की गई है।
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शाम 4:15 बजे गजरौला
गजरौला में अमृत सरोवरों में उगी घास और झाड़ियां गजरौला ब्लॉक क्षेत्र में मोहम्मदाबाद मुस्तकम, कुमराला, कर्मल्लीपुर, पाल, वारसाबाद, भारापुर सहित 30 अमृत सरोवर हैं। जिनकी बीते साल सफाई कराने, लोगों के बैठने के लिए बैंच बना कर छोड़ दिया गया। इसके बाद उनकी सुध नहीं ली गई। जिसके चलते अमृत सरोवर अपने मकसद पर खरे नहीं उतर रहे हैं। उनमें घास उग आई हैं। जिसके चलते बारिश होने पर गांव का पानी अमृत सरोवरों में नहीं जा सकता। गांवों में अमृत सरोवर इसलिए बनाए गए थे कि आस पास के लोग टहल सकें और युवा खेल सकें। देखभाल व सफाई नहीं होने के कारण वह बंजर की तरह दिखाई दे रहे हैं। बस मोहम्मदाबाद का तालाब जरूर कुछ सही हो रहा है। एपीओ नितिन कुमार का कहना है कि तालाबों की सफाई का काम चल रहा है। एक सप्ताह में सबकी सूरत बदली मिलेगी।
जगह तो चिह्नित हुई नहीं हो सका विकास
मंडी धनौरा ब्लाक में ढ्योटी, मलेशिया समेत 28 स्थानों पर अमृत सरोवर बनने की शुरूआत हुई, लेकिन वहां पर साज सज्जा के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति की गई है। रखरखाव के अभाव में मलेशिया में स्थित अमृत सरोवर में तमाम झाड़ी उग गई हैं। गांव का पानी तालाब में नहीं पहुंचता है। ग्रामीणों का आरोप है कि गांव के ही एक व्यक्ति ने तालाब के कुछ क्षेत्रफल को अपने खेत में भी मिला लिया है। अमृत सरोवर बनाने का शासन प्रशासन का मकसद हल नहीं हो रहा है।
अमृत सरोवरों की स्थिति है बदहाल
ब्लाक हसनपुर में करनपुर माफी, रझेड़ा, कूबी समेत दस गांवों में तालाबों को अमृत सरोवर के लिए चुना गया। वहीं हसनपुर नगर की बात करें तो करबला तालाब के अमृत सरोवर बनाने के लिए चिह्नित किया। अधिकांश तालाबों की स्थिति बदहाल है। कहीं तालाब सूखा है तो कहीं झाड़ियां उगी हैं। हसनुपर के करबला तालाब में पानी तो भर गया है लेकिन इसका सुंदरीकरण कब होगा, यह किसी को नहीं पता।
पिछले साल तालाबों को अमृत सरोवर को तैयार करने का कार्य किया गया। जिसके बाद तालाबों में घास उग आई है सभी ग्राम पंचायत सचिव व ग्राम प्रधानों को 15 जून तक तालाबों की सफाई व जल भरने के निर्देश दिए गए हैं। बरसात से पूर्व सभी तालाबों को अमृत सरोवर का रूप दे दिया जाएगा। इसमें किसी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी। अमरेंद्र प्रताप, डीडी मनरेगा/ प्रभारी सीडीओ