{"_id":"687ff58c485017668305dd65","slug":"first-the-struggle-for-the-prescription-then-the-wait-for-the-doctor-jpnagar-news-c-284-1-smbd1013-144266-2025-07-23","type":"story","status":"publish","title_hn":"Amroha News: पहले पर्चा बनवाने की जद्दोजहद, फिर डॉक्टर का इंतजार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Amroha News: पहले पर्चा बनवाने की जद्दोजहद, फिर डॉक्टर का इंतजार
Wed, 23 Jul 2025 02:03 AM IST
मुरादाबाद ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अमरोहा
संवाद न्यूज एजेंसी, अमरोहा
Updated Wed, 23 Jul 2025 02:03 AM IST
विज्ञापन
अमरोहा। सरकारी अस्पतालों में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं होने का दवा तो किया जाता है लेकिन हकीकत बिल्कुल उलट है। कई बार बीमार व्यक्ति की ऐसी हालत होती है कि वह ज्यादा देर तक खड़ा हो सके लेकिन जिला अस्पताल सहित अन्य सरकारी अस्पतालों में मरीजों को इलाज के लिए घंटों जंग लड़नी पड़ती है। यहां पहले पर्चा बनवाने की जद्दोजहद रहती है तो फिर डॉक्टर को दिखाने का इंतजार करना पड़ता है।
जनपद के सरकारी अस्पतालों में दवा लेने पहुंचने वाले मरीज मंगलवार को भी बेहाल दिखे। कहीं डॉक्टर अपने कक्षों से नदारद रहे तो कहीं घंटों लाइन में लगने के बाद भी मरीज को इलाज नहीं मिल सका। मरीज डॉक्टर को दिखाने के लिए इधर-उधर भटकते दिखे। उधर, भीड़ के चलते अस्पतालों में अव्यवस्था भी हावी रही। मरीजों व तीमारदारों का आरोप है कि कई बार डॉक्टर कक्ष से चलते जाते है और घंटों के बाद आते है। ऐसे में वह डॉक्टर के इंतजार में बैठे रहते है।
जिला अस्पताल में पैथोलॉजी लैब के बाहर भी मरीजों फर्श पर बैठकर समय बिताना पड़ा। समय से जांच रिपोर्ट नहीं मिलने के कारण मरीज कराहते रहे। कक्ष से नदारद डॉक्टरों के इंतजार में मरीजों की लाइन लगी रही। यही स्थिति अल्ट्रासाउंड सेंटर की थी। यहां भी तीन से चार घंटे इंतजार करने के बाद कई मरीजों को बिना जांच कराए लौटना पड़ा। महिला विंग में अल्ट्रासाउंड कक्ष पर ताला लटकता मिला। यहां भी मरीजों के अल्ट्रासाउंड नहीं हो सके। ओवरऑल जिला अस्पताल में अव्यवस्थाएं हावी हैं। मरीज और तीमारदार इधर-उधर भटकने को मजबूर हैं। जोया सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का भी यही हाल मिला।
विज्ञापन
-- -- -- -- -- -- -- -- -- --
अप्रेंटिस करने वाले छात्र देख रहे मरीज
जिला अस्पताल में दूरदराज से आए मरीज सुबह सात बजे ही काउंटर से पर्चा लेने के बाद चिकित्सकों के कक्ष के बाहर लाइन में लग गए। घंटों चिकित्सक के नहीं पहुंचने पर वहां मौजूद कर्मचारियों से पूछना शुरू कर दिया। इलाज के अभाव में मरीज अस्पताल परिसर में भटकते रहे। चिकित्सक अपने मनमाने टाइम पर ओपीडी में पहुंचे। मरीज पर्चा लेकर कक्ष के सामने खड़े थे। इतना ही नहीं कई कक्षों में डॉक्टरों की गैर मौजूदगी में अप्रेंटिस करने वाले छात्र मरीजों को देखते नजर आए।
-- -- -- -- -- -- -- -- -- --
18 महीने से खाली नेत्र चिकित्सक की कुर्सी
जोया। सीएचसी में आंखों के मरीज वापस लौट कर जाना पड़ रहा है। क्योंकि यहां आंखों के डॉक्टर की कुर्सी लगभग 18 माह से खाली पड़ी है। सीएचसी में बुखार के मरीजों को अच्छी टैबलेट नहीं मिल पा रही है। अस्पताल में अजिथ्रोमाइसीन टैबलेट और मोक्सीकाइंड भी नहीं मिल पा रही है। संवाद
-- -- -- -- -- -- -- -- --
ओपीडी के समय डॉक्टरों को वार्ड में मरीज देखने जाना पड़ता है। इस दौरान उनका अपने कक्ष के गायब होना स्वाभाविक है। मरीजों को बेहतर इलाज किया जा रहा है। -डॉ. चरन सिंह, चिकित्सा अधीक्षक, जिला अस्पताल
विज्ञापन
जनपद के सरकारी अस्पतालों में दवा लेने पहुंचने वाले मरीज मंगलवार को भी बेहाल दिखे। कहीं डॉक्टर अपने कक्षों से नदारद रहे तो कहीं घंटों लाइन में लगने के बाद भी मरीज को इलाज नहीं मिल सका। मरीज डॉक्टर को दिखाने के लिए इधर-उधर भटकते दिखे। उधर, भीड़ के चलते अस्पतालों में अव्यवस्था भी हावी रही। मरीजों व तीमारदारों का आरोप है कि कई बार डॉक्टर कक्ष से चलते जाते है और घंटों के बाद आते है। ऐसे में वह डॉक्टर के इंतजार में बैठे रहते है।
विज्ञापन
जिला अस्पताल में पैथोलॉजी लैब के बाहर भी मरीजों फर्श पर बैठकर समय बिताना पड़ा। समय से जांच रिपोर्ट नहीं मिलने के कारण मरीज कराहते रहे। कक्ष से नदारद डॉक्टरों के इंतजार में मरीजों की लाइन लगी रही। यही स्थिति अल्ट्रासाउंड सेंटर की थी। यहां भी तीन से चार घंटे इंतजार करने के बाद कई मरीजों को बिना जांच कराए लौटना पड़ा। महिला विंग में अल्ट्रासाउंड कक्ष पर ताला लटकता मिला। यहां भी मरीजों के अल्ट्रासाउंड नहीं हो सके। ओवरऑल जिला अस्पताल में अव्यवस्थाएं हावी हैं। मरीज और तीमारदार इधर-उधर भटकने को मजबूर हैं। जोया सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का भी यही हाल मिला।
विज्ञापन
अप्रेंटिस करने वाले छात्र देख रहे मरीज
जिला अस्पताल में दूरदराज से आए मरीज सुबह सात बजे ही काउंटर से पर्चा लेने के बाद चिकित्सकों के कक्ष के बाहर लाइन में लग गए। घंटों चिकित्सक के नहीं पहुंचने पर वहां मौजूद कर्मचारियों से पूछना शुरू कर दिया। इलाज के अभाव में मरीज अस्पताल परिसर में भटकते रहे। चिकित्सक अपने मनमाने टाइम पर ओपीडी में पहुंचे। मरीज पर्चा लेकर कक्ष के सामने खड़े थे। इतना ही नहीं कई कक्षों में डॉक्टरों की गैर मौजूदगी में अप्रेंटिस करने वाले छात्र मरीजों को देखते नजर आए।
18 महीने से खाली नेत्र चिकित्सक की कुर्सी
जोया। सीएचसी में आंखों के मरीज वापस लौट कर जाना पड़ रहा है। क्योंकि यहां आंखों के डॉक्टर की कुर्सी लगभग 18 माह से खाली पड़ी है। सीएचसी में बुखार के मरीजों को अच्छी टैबलेट नहीं मिल पा रही है। अस्पताल में अजिथ्रोमाइसीन टैबलेट और मोक्सीकाइंड भी नहीं मिल पा रही है। संवाद
ओपीडी के समय डॉक्टरों को वार्ड में मरीज देखने जाना पड़ता है। इस दौरान उनका अपने कक्ष के गायब होना स्वाभाविक है। मरीजों को बेहतर इलाज किया जा रहा है। -डॉ. चरन सिंह, चिकित्सा अधीक्षक, जिला अस्पताल