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Amroha News: धरनास्थल पर ही धनतेरस-दिवाली मनाएंगे तीन गांवों के किसान
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अमरोहा। बीते साढ़े ग्यारह महीने से मध्य गंगा नहर के लिए अधिग्रहण की गई जमीन का चार गुना मुआवजे की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे तीन गांव के किसान दिवाली भी धरना स्थल पर मनाएंगे। इससे पहले किसान महिलाओं ने नवरात्र व्रत रखे थे, जबकि धरना स्थल पर ही करवा चौथ का पूजन किया था।
प्रशासन कई बार जबरन नहर की खुदाई का प्रयास कर चुका है, लेकिन किसानों के आक्रोश के सामने बैकफुट पर आना पड़ता है। किसानों ने मनमाने ढंग से जमीन पर खुदाई शुरू करने पर सामूहिक आत्महत्या की चेतावनी दी है।
जनपद में मध्य गंगा नहर के निर्माण का कार्य चल रहा है। पूरे जिले में काम पूरा हो चुका है लेकिन तीन गांव कूबी, रामपुर घनां व मोहनपुर में अभी तक लटका है। प्रयासों के बाद भी अधिकारी किसानों को मनाने में कामयाब नहीं हो पा रहे है। इन तीनों गांव के किसान बीते साढ़े ग्यारह महीने से अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे हुए हैं। किसानों का कहना है कि जमीन प्रशासन ने वर्ष 2011 में अधिग्रहण कर ली थी लेकिन, उस समय किसी को मुआवजा नहीं दिया था। अब जमीन की कीमत काफी अधिक हो गई है। प्रशासन उनको पहले सर्किल रेट से ही जमीन के दाम दे रहा है। किसान उस पर बिल्कुल सहमत नहीं हैं। मौजूदा सर्किल रेट के हिसाब से चार गुना अधिक मुआवजा दिया जाए। लेकिन बीच-बीच में प्रशासन किसानों की सहमति के बिना नहर की खुदाई करने की कोशिश करता रहा है। 29 अक्तूबर की सुबह डीएम-एसपी के नेतृत्व में छह जेसीबी लगाकर रामपुर घना गांव के जंगल में खुदाई कार्य शुरू कर दिया गया था। जब इसकी जानकारी किसानों को हुई तो उनका गुस्सा भड़क गया था। किसान और अधिकारियों के बीच खींचतान हुई। बड़ी संख्या में महिलाएं जेसीबी मशीनों के आगे लेट गईं थीं। किसानों ने पुलिस प्रशासन पर लाठीचार्ज करने का आरोप लगाया था। साथ ही चार किसानों को डीजल उडे़लकर खुद को आग लगाने की कोशिश की थी। बृहस्पतिवार को भी तीनों गांव के किसान धरने पर रहे। उन्होंने धनतेरस और दिपावली भी धरनास्थल पर बनाने की बात कही है।
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चाहे तो होली हो या दिवाली हमारे लिए हमारी जमीन सबकुछ है। इसका उचित दाम मिलना जरूरी है। इसलिए त्योहार भी यहीं मनाएंगे।
- तनु, महिला किसान
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क्या धनतेरस क्या दिवाली। जब हमारी जमीन जा रही है, उसका हमें दाम नहीं मिल रहा, ऐसे में दिवाली की रौनक हमारे लिए बेकार है। जहां हम धरने पर हैं। वही दिवाली मनाएंगे।
- लोकेश, किसान
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प्रशासन कई बार जबरन नहर की खुदाई का प्रयास कर चुका है, लेकिन किसानों के आक्रोश के सामने बैकफुट पर आना पड़ता है। किसानों ने मनमाने ढंग से जमीन पर खुदाई शुरू करने पर सामूहिक आत्महत्या की चेतावनी दी है।
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जनपद में मध्य गंगा नहर के निर्माण का कार्य चल रहा है। पूरे जिले में काम पूरा हो चुका है लेकिन तीन गांव कूबी, रामपुर घनां व मोहनपुर में अभी तक लटका है। प्रयासों के बाद भी अधिकारी किसानों को मनाने में कामयाब नहीं हो पा रहे है। इन तीनों गांव के किसान बीते साढ़े ग्यारह महीने से अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे हुए हैं। किसानों का कहना है कि जमीन प्रशासन ने वर्ष 2011 में अधिग्रहण कर ली थी लेकिन, उस समय किसी को मुआवजा नहीं दिया था। अब जमीन की कीमत काफी अधिक हो गई है। प्रशासन उनको पहले सर्किल रेट से ही जमीन के दाम दे रहा है। किसान उस पर बिल्कुल सहमत नहीं हैं। मौजूदा सर्किल रेट के हिसाब से चार गुना अधिक मुआवजा दिया जाए। लेकिन बीच-बीच में प्रशासन किसानों की सहमति के बिना नहर की खुदाई करने की कोशिश करता रहा है। 29 अक्तूबर की सुबह डीएम-एसपी के नेतृत्व में छह जेसीबी लगाकर रामपुर घना गांव के जंगल में खुदाई कार्य शुरू कर दिया गया था। जब इसकी जानकारी किसानों को हुई तो उनका गुस्सा भड़क गया था। किसान और अधिकारियों के बीच खींचतान हुई। बड़ी संख्या में महिलाएं जेसीबी मशीनों के आगे लेट गईं थीं। किसानों ने पुलिस प्रशासन पर लाठीचार्ज करने का आरोप लगाया था। साथ ही चार किसानों को डीजल उडे़लकर खुद को आग लगाने की कोशिश की थी। बृहस्पतिवार को भी तीनों गांव के किसान धरने पर रहे। उन्होंने धनतेरस और दिपावली भी धरनास्थल पर बनाने की बात कही है।
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चाहे तो होली हो या दिवाली हमारे लिए हमारी जमीन सबकुछ है। इसका उचित दाम मिलना जरूरी है। इसलिए त्योहार भी यहीं मनाएंगे।
- तनु, महिला किसान
क्या धनतेरस क्या दिवाली। जब हमारी जमीन जा रही है, उसका हमें दाम नहीं मिल रहा, ऐसे में दिवाली की रौनक हमारे लिए बेकार है। जहां हम धरने पर हैं। वही दिवाली मनाएंगे।
- लोकेश, किसान