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Amroha News: जिले में स्थापित होगा फीकल स्लज ट्रीटमेंट प्लांट
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अमरोहा। जिले में स्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गत फीकल स्लज ट्रीटमंट प्लांट की स्थापना होगी। प्रदेश में पहले चरण के लिए अमरोहा और हापुड़ जनपदों का चयन किया गया है। गंगा एक्शन प्लान के तहत चयनित जनपदों में विशेष रणनीति के तहत यह कार्य होगा। इसके लिए जमीन तलाशने की कवायद शुरू कर दी गई है।
गंगा नदी को स्वच्छ एवं अविरल बनाए रखने के लिए गंगा किनारे बसे जनपदों में फीकल स्लज ट्रीटमेंट पर जोर दिया जा रहा है। जिसके तहत मलीय कचरा प्रबंधन एक बड़ी चुनौती है। गंगा नदी की निर्मलता के लिए जरूरी है कि गंगा के किनारे के जनपदों में फीकल स्लज का समुचित प्रबंधन किया जाए। इसी के तहत जिले में फीकल स्लज ट्रीटमंट प्लांट की स्थापना कराई जाएगी। ग्रामीण क्षेत्रों में निर्मित सेप्टिक टैंक की गंदगी का समुचित निष्पादन करना बहुत ही चुनौती पूर्ण है। इसी के दृष्टिगत मलीय कचरा प्रबंधन/ फीकल स्लज ट्रीटमेंट के लिए गंगा एक्शन प्लान के अन्तर्गत स्टेट मिशन द्वारा ई-टेंडर के माध्यम से तकनीकी संस्था का चयन किया गया है।
पहले चरण में अमरोहा एवं हापुड़ जिले में फीकल स्लज ट्रीटमेंट प्लांट की स्थापना होगी। जिसके लिए करीब तीन हजार वर्ग मीटर भूमि की जरूरत होगी। प्लांट के संचालन के लिए 30 किलोवाट बिजली और पांच हजार लीटर पानी की आवश्यकता होगी। इसके लिए भूमि बिजली और जल स्रोत के निकट तलाश करने पर जोर दिया गया है। प्लांट के संचालन में 15-25 किलोलीटर प्रतिदिन फीकल स्लज की आवश्यकता अनिवार्य है, इसके लिए प्लांट के 15-20 किमी के रेडियस में पर्याप्त सेप्टिक टैंक हों एवं क्लस्टर के जनमानस में उनके टैंक का ससमय डि-स्लज करने की जागरूकता भी लानी होगी।
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डीपीआरओ पारुल सिसोदिया ने बताया कि जमीन की तलाश की जा रही है। प्लांट लगने से मलीय कचरा व दूषित पानी नदी एवं तालाबों में नहीं जा सकेगा। जिससे जल प्रदूषण नहीं हो सकेगा। उन्होंने बताया कि यह प्लांट गंगा की स्वच्छता बनाए रखने में सहायक सिद्ध होगा।
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गंगा नदी को स्वच्छ एवं अविरल बनाए रखने के लिए गंगा किनारे बसे जनपदों में फीकल स्लज ट्रीटमेंट पर जोर दिया जा रहा है। जिसके तहत मलीय कचरा प्रबंधन एक बड़ी चुनौती है। गंगा नदी की निर्मलता के लिए जरूरी है कि गंगा के किनारे के जनपदों में फीकल स्लज का समुचित प्रबंधन किया जाए। इसी के तहत जिले में फीकल स्लज ट्रीटमंट प्लांट की स्थापना कराई जाएगी। ग्रामीण क्षेत्रों में निर्मित सेप्टिक टैंक की गंदगी का समुचित निष्पादन करना बहुत ही चुनौती पूर्ण है। इसी के दृष्टिगत मलीय कचरा प्रबंधन/ फीकल स्लज ट्रीटमेंट के लिए गंगा एक्शन प्लान के अन्तर्गत स्टेट मिशन द्वारा ई-टेंडर के माध्यम से तकनीकी संस्था का चयन किया गया है।
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पहले चरण में अमरोहा एवं हापुड़ जिले में फीकल स्लज ट्रीटमेंट प्लांट की स्थापना होगी। जिसके लिए करीब तीन हजार वर्ग मीटर भूमि की जरूरत होगी। प्लांट के संचालन के लिए 30 किलोवाट बिजली और पांच हजार लीटर पानी की आवश्यकता होगी। इसके लिए भूमि बिजली और जल स्रोत के निकट तलाश करने पर जोर दिया गया है। प्लांट के संचालन में 15-25 किलोलीटर प्रतिदिन फीकल स्लज की आवश्यकता अनिवार्य है, इसके लिए प्लांट के 15-20 किमी के रेडियस में पर्याप्त सेप्टिक टैंक हों एवं क्लस्टर के जनमानस में उनके टैंक का ससमय डि-स्लज करने की जागरूकता भी लानी होगी।
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डीपीआरओ पारुल सिसोदिया ने बताया कि जमीन की तलाश की जा रही है। प्लांट लगने से मलीय कचरा व दूषित पानी नदी एवं तालाबों में नहीं जा सकेगा। जिससे जल प्रदूषण नहीं हो सकेगा। उन्होंने बताया कि यह प्लांट गंगा की स्वच्छता बनाए रखने में सहायक सिद्ध होगा।