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मौसम में ठंडक के साथ ही किसानों की परेशानी
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हसनपुर में गुरूवार शाम को बूंदाबांदी में छाता लगाकर गुजरता युवक।
- फोटो : HASANPUR
गजरौला। हल्की बूंदाबांदी से मौसम में ठंडक बढ़ गई। जिसके चलते लोग गर्म कपड़ों में लिपटे नजर आए। ठंड बढ़ने के साथ ही बूंदाबांदी से किसानों के भी चेहरे उतर गए हैं। अगर बारिश हुई तो गेहूं की बुवाई पिछड़ सकती है। जिससे पैदावार पर बुरा असर पड़ेगा।
बीते दो दिन से आसमान में हल्के बादल छाए हुए थे। मौसम खराब हो गया था। गुरुवार की शाम तीन बजे के बाद गजरौला इलाके में हल्की बूंदाबांदी शुरू हो गई। जिसके चलते मौसम में ठंडक बढ़ गई। अब तक गर्म कपड़ों से परहेज कर रहे लोग ठंडक बढ़ने पर घरों में कैद होने लगे। सर्दी से बचने के लिए के लोग गर्म कपड़े पहन कर ही बाहर निकले। उधर हल्की बूंदाबांदी बारिश में बदल गई तो यह किसानों के लिए खासी नुकसानदायक साबित होगी। गेहूं की बुवाई किसान बड़े जोर से कर रहे हैं। अगर बारिश पड़ी तो गेहूं की बुवाई भी पिछड़ सकती है। जिससे पैदावार पर असर पड़ेगा। मौसम की करवट बदलने से जहां ठंड बढ़ी है, वहीं किसानों के चेहरे भी उड़े हैं।
इस समय हो रही हल्की बूंदाबांदी किसी फसल को नुकसानदायक नहीं है। हां अगर बारिश हुई और पानी खेत में भरा तो उन किसानों को खासा नुकसान होगा, जो गेहूं बुवाई की तैयारी कर रहे हैं। इससे गेहूं की बुवाई भी पिछड़ेगी तो पैदावार भी कम होगी।
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-अनिल कुमार मिश्र प्रभारी कृषि विज्ञान केंद्र गजरौला।
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बीते दो दिन से आसमान में हल्के बादल छाए हुए थे। मौसम खराब हो गया था। गुरुवार की शाम तीन बजे के बाद गजरौला इलाके में हल्की बूंदाबांदी शुरू हो गई। जिसके चलते मौसम में ठंडक बढ़ गई। अब तक गर्म कपड़ों से परहेज कर रहे लोग ठंडक बढ़ने पर घरों में कैद होने लगे। सर्दी से बचने के लिए के लोग गर्म कपड़े पहन कर ही बाहर निकले। उधर हल्की बूंदाबांदी बारिश में बदल गई तो यह किसानों के लिए खासी नुकसानदायक साबित होगी। गेहूं की बुवाई किसान बड़े जोर से कर रहे हैं। अगर बारिश पड़ी तो गेहूं की बुवाई भी पिछड़ सकती है। जिससे पैदावार पर असर पड़ेगा। मौसम की करवट बदलने से जहां ठंड बढ़ी है, वहीं किसानों के चेहरे भी उड़े हैं।
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इस समय हो रही हल्की बूंदाबांदी किसी फसल को नुकसानदायक नहीं है। हां अगर बारिश हुई और पानी खेत में भरा तो उन किसानों को खासा नुकसान होगा, जो गेहूं बुवाई की तैयारी कर रहे हैं। इससे गेहूं की बुवाई भी पिछड़ेगी तो पैदावार भी कम होगी।
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-अनिल कुमार मिश्र प्रभारी कृषि विज्ञान केंद्र गजरौला।