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दर्द से कराहती रही गर्भवती, डाक्टर बोले- नहीं है महिला सर्जन
ब्यूरो/अमर उजाला अमरोहा
Updated Sun, 23 Oct 2016 11:37 PM IST
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कैबिनेट मंत्री महबूब अली की सख्ती के बाद जहां उनकी बहन का प्राइवेट वार्ड में शिफ्ट कर वीआईपी ट्रीटमेंट शुरू हो गया। वहीं आम मरीजों के साथ अस्पताल प्रशासन का बर्ताव बेरुखा ही है। दर्द से गर्भवती कराहती रही, मगर डाक्टरों ने उसको जिला अस्पताल में भर्ती नहीं किया। रिपोर्ट देखने के बाद बच्चे को कमजोर बताया।
इलाज की अच्छी व्यवस्था नहीं होने व सात माह का बच्चा होना बताया, मगर परिजन उनकी बात पर विश्वास करने को राजी नहीं हुए। परिजनों ने जमकर हंगामा किया। हालांकि बाद में महिला की हालत देखते हुए परिजनों ने उसे प्राइवेट अस्पताल में भर्ती कराया। जहां नार्मल डिलीवरी हुई। जच्चा- बच्चा दोनों स्वस्थ हैं। सुबह परिवार के लोग दोनों को घर ले गए।
देहात थाना क्षेत्र के गांव सिरसा जट पंडकी निवासी बालकिशन की पत्नी संतोष को शनिवार रात प्रसव पीड़ा हुई। परिजन उसे लेकर रात करीब 12 बजे जिला संयुक्त चिकित्सालय पहुंचे। दर्द से बेचैन होकर महिला कराहने लगी, जिस पर परिवार के लोगों ने स्टाफ से उसको भर्ती करने की गुजारिश की। मौके पर ईएमओ नहीं थे। स्टाफ नर्स ने हाथ खड़े कर दिए।
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बच्चे को सात माह का बताकर अपना पीछा छुड़ाना शुरू कर दिया। इससे अस्पताल परिसर में हंगामा खड़ा हो गया। थोड़ी देर बाद ही डाक्टर सीपी यादव वहां पहुंच गए। परिजनों से महिला से संबंधित रिपोर्ट देखी और बच्चा कमजोर होने की बात कहते हुए कहीं दूसरी जगह ले जाने को कहा। महिला सर्जन नहीं होने की बात बताई।
इस पर उन्होंने सीएमएस डा. पीके बंसल से परिजनों की बात कराई। लगातार स्थिति बिगड़ने पर बेचैन परिजनों ने हालातों से समझौता किया। महिला को प्राइवेट अस्पताल में ले गए। पीड़िता के पति के मुताबिक पत्नी को उसी डाक्टर के अस्पताल में ले गए जो जनपद अस्पताल में संविदा कर्मी के रूप में तैनात हैं। वहां पर नार्मल डिलीवरी हुई है। पत्नी ने बेटी को जन्म दिया है। जच्चा और बच्चा दोनों ठीक हैं। डिलीवरी के बाद उनको घर ले जाया गया है।
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इलाज की अच्छी व्यवस्था नहीं होने व सात माह का बच्चा होना बताया, मगर परिजन उनकी बात पर विश्वास करने को राजी नहीं हुए। परिजनों ने जमकर हंगामा किया। हालांकि बाद में महिला की हालत देखते हुए परिजनों ने उसे प्राइवेट अस्पताल में भर्ती कराया। जहां नार्मल डिलीवरी हुई। जच्चा- बच्चा दोनों स्वस्थ हैं। सुबह परिवार के लोग दोनों को घर ले गए।
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देहात थाना क्षेत्र के गांव सिरसा जट पंडकी निवासी बालकिशन की पत्नी संतोष को शनिवार रात प्रसव पीड़ा हुई। परिजन उसे लेकर रात करीब 12 बजे जिला संयुक्त चिकित्सालय पहुंचे। दर्द से बेचैन होकर महिला कराहने लगी, जिस पर परिवार के लोगों ने स्टाफ से उसको भर्ती करने की गुजारिश की। मौके पर ईएमओ नहीं थे। स्टाफ नर्स ने हाथ खड़े कर दिए।
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बच्चे को सात माह का बताकर अपना पीछा छुड़ाना शुरू कर दिया। इससे अस्पताल परिसर में हंगामा खड़ा हो गया। थोड़ी देर बाद ही डाक्टर सीपी यादव वहां पहुंच गए। परिजनों से महिला से संबंधित रिपोर्ट देखी और बच्चा कमजोर होने की बात कहते हुए कहीं दूसरी जगह ले जाने को कहा। महिला सर्जन नहीं होने की बात बताई।
इस पर उन्होंने सीएमएस डा. पीके बंसल से परिजनों की बात कराई। लगातार स्थिति बिगड़ने पर बेचैन परिजनों ने हालातों से समझौता किया। महिला को प्राइवेट अस्पताल में ले गए। पीड़िता के पति के मुताबिक पत्नी को उसी डाक्टर के अस्पताल में ले गए जो जनपद अस्पताल में संविदा कर्मी के रूप में तैनात हैं। वहां पर नार्मल डिलीवरी हुई है। पत्नी ने बेटी को जन्म दिया है। जच्चा और बच्चा दोनों ठीक हैं। डिलीवरी के बाद उनको घर ले जाया गया है।