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बिजली गुल होने से नहीं हुई डायलिसिस, किडनी रोगी की मौत की तीन सदस्यीय टीम करेगी जांच
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जिला अस्पताल में बिजली गुल होने पर डायलिसिस नहीं होने पर किडनी रोगी से पीड़ित मरीज की मौत हो गई। इसकी जानकारी मिलते ही प्रशासन से लेकर स्वास्थ्य विभाग के अफसर तक जिला अस्पताल की ओर दौड़ पड़े। लखनऊ से भी फोन घनघनाने लगे। डीएम के आदेश पर एडीएम और सीएमओ अस्पताल पहुंचे और सीएमएस व अन्य डॉक्टरों से जानकारी जुटाई। डायलिसिस यूनिट के प्रबंधक का जवाब तलब किया। सीएमओ को जांच सौंपी गई। सीएमएस ने भी तीन डॉक्टरों की जांच टीम गठित की है। इसके अलावा बिजली विभाग ने भी जांच शुरू कर दी है।
अमरोहा के मोहल्ला मुल्लाना निवासी परचून की दुकान चलाने वाले मोहम्मद आमिर पिछले चार साल से किडनी रोगी थे। वह मुरादाबाद के निजी अस्पताल में डायलिसिस कराते थे लेकिन काफी खर्चा होने के कारण आर्थिक तंगी में आ गए। जिला अस्पताल में ही यूनिट खुलने के बाद करीब दो साल से डायलिसिस करा रहे थे।
बुधवार की सुबह पहली शिफ्ट में उनकी डायलिसिस होनी थी। उनकी पत्नी गजाला उन्हें लेकर जिला अस्पताल पहुंचीं। तकनीकी खराबी के कारण बिजली गुल थी। डायलिसिस यूनिट के लिए पानी की आपूर्ति नहीं हो सकी। नौ मरीज बिजली आपूर्ति का इंतजार कर रहे थे। दोपहर तक बिजली आपूर्ति शुरू नहीं हो पाई। मौजूद स्वाथ्यकर्मियों ने मरीजों को दूसरी जगह डायलिसिस कराने की बात कहकर लौटा दिया।
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आर्थिक तंगी में दूसरी जगह नहीं करा पाया डायलिसिस
सभी मरीजों के साथ मोहम्मद आमिर भी अस्पताल से लौट गया और आर्थिक तंगी के कारण दूसरी जगह डायलिसिस के लिए नहीं जा सका। जो उसके लिए जानलेवा साबित हुआ। घर पहुंचने पर उनकी हालत बिगड़ गई। परिजन उन्हें मुरादाबाद ले जाने लगे लेकिन रास्ते में ही मौत हो गई। बृहस्पतिवार को परिजनों ने शव सुपुर्द-ए-खाक कर दिया।
डीएम बीके त्रिपाठी के निर्देश पर एडीएम भगवान शरण और सीएमओ राजीव सिंघल जिला अस्पताल पहुंचे। यहां सीएमएस डॉ. प्रेमा पंथ त्रिपाठी, एसएस डॉ. चरण सिंह व अन्य डॉक्टरों से मामले की जानकारी की। दोनों अफसरों ने डायलिसिस संबंधित स्टाफ को कड़ी फटकार भी लगाई। साथ ही डायलिसिस यूनिट के प्रबंधक सुमित भारद्वाज से जवाब तलब किया है। वहीं डायलिसिस नहीं होने के कारण मरीज की मौत का मामला लखनऊ तक पहुंच गया जिसके बाद अफसरों में खलबली मची रही। आननफानन डीएम ने मामले की जांच सीएमओ को सौंपी है। जबकि सीएमएस ने तीन डॉक्टरों की टीम गठित कर पूरे मामले की जांच करने के निर्देश दिए हैं।
डायलिसिस नहीं होने के कारण मरीज की मौत के मामले की जांच सीएमओ को सौंपी गई है। जांच रिपोर्ट में जो दोषी होगा, उसे बख्शा नहीं जाएगा। मरीजों के इलाज में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। -बीके त्रिपाठी, डीएम, अमरोहा
29 घंटे गुल रही बिजली
18 अक्तूबर की शाम पांच बजे बिजली बाधित हुई थी जो 19 अक्तूबर की रात 10 बजे तक रही। इस बीच जिला अस्पताल में जेनरेटर का इस्तेमाल किया गया लेकिन डायलिसिस यूनिट के प्रबंधक ने जलापूर्ति 19 अक्तूबर को की दोपहर को शुरू होने की बात कही। इस दिन यूनिट पर एक भी मरीज की डायलिसिस नहीं हुई। डायलिसिस नहीं होने से मरीज की मौत हो गई। इस पूरे मामले की जांच डॉ. चरन सिंह, डॉ. सुनील कुमार तेवतिया, डॉ. विनय भार्गव की तीन सदस्य टीम करेगी। जांच रिपोर्ट मिलने के बाद कार्रवाई की जाएगी। -डॉ. प्रेमा पंथ त्रिपाठी, सीएमएस
डायलिसिस के लिए पानी की जरूरत
एक मरीज पर करीब 150 से 200 लीटर पानी की खपत होती है। बिजली नहीं होने के कारण बुधवार को ओवरहेड टैंक से पानी की सप्लाई नहीं हो रही थी इसलिए मरीजों को कहीं दूसरे स्थान पर डायलिसिस कराने की बात कहकर लौटा दिया गया था। इस संबंध में सीएमएस को पत्र भी लिखा गया है। मरीज मोहम्मद आमिर की मौत डायलिसिस यूनिट या जिला अस्पताल में नहीं हुई है। मरीजों को समय से डायलिसिस दी जाए इसके लिए पूरे प्रयास रहते हैं। यूनिट पर प्रतिदिन 27 लोगों की डायलिसिस हो रही है।
-सुमित भारद्वाज, प्रबंधक डायलिसिस यूनिट
एसडीओ ने नहीं सुनीं आठ कॉल, शुरू नहीं हुई सप्लाई
एक तरफ मुख्यमंत्री 24 घंटे बिजली देने की बात कर रहे हैं। शहर से लेकर गांव तक के लोग कटौती से परेशान रहते ही हैं। जिला अस्पताल में बिजली गुल होने के मामले में विभाग के अधिकारियों की मनमानी देखने को मिली। जिला अस्पाताल में करीब 29 घंटे बिजली गुल रही। सीएमएस ने आठ बार एसडीओ को फोन किए। लेकिन बिजली नहीं दी गई। इस कारण डायलिसिस नहीं हुई तो तीमारदार अपने मरीजों को लेकर भटकते रहे और समय से डायलिसिस नहीं होने पर एक मरीज की मौत हो गई।
अस्पताल की सीएमएस डॉ प्रेमा पंत त्रिपाठी ने बताया कि 18 अक्तूबर की शाम पांच बिजली चली गई थी। जिसके बाद 19 अक्तूबर को रात दस बजे के आसपास आई थी। जिसके चलते अस्पताल में डायलिसिस प्रभावित रही थी। बिजली की व्यवस्था ठीक कराने के लिए करीब आठ बार एसडीओ को काल किया गया। जिस पर एसडीओ ने बिजली ठीक कराने का आश्वासन दिया। लेकिन बावजूद इसके बिजली नहीं आई। हमारी ओर से वैकल्पिक रूप से जनरेटर से व्यवस्था को सुचारू रखा गया। लेकिन डायलिसिस यूनिट के प्रबंधक सुमित भारद्वाज की ओर से हमें 19 तारीख की दोपहर को बिजली नहीं होने के चलते पानी की सप्लाई ठप होने की जानकारी मिली थी। जबकि इससे पूर्व पानी की समस्या के बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई। हालांकि बिजली सप्लाई में 18 अक्तूबर की रात से समस्या हो रही थी। मैनेजर की ओर से डायलिसिस के मरीजों को कही ओर भेजने के बारे में जानकारी भी नहीं बताया गया। यदि मामला हमारे संज्ञान में होता तो अवश्य ही व्यवस्था को काबू किया जा सकता था। डायलिसिस यूनिट के मैनेजर ने कहा कि 19 अक्तूबर को दोपहर में हमारी यूनिट में बिजली पानी नहीं होने के बारे में जिला अस्पताल प्रशासन को चिट्ठी लिखकर अवगत कर दिया गया था। लेकिन अस्पताल में पानी की सप्लाई ठप होने के कारण डायलिसिस नहीं हो सकी। क्योंकि अमूमन एक मरीज के डायलिसिस करने में तकरीबन 150 से 200 लीटर आरओ पानी की खपत होती है। लेकिन ओवरहैड टैंक में पानी नहीं होने के चलते 19 अक्तूबर को किसी भी मरीज की डायलिसि नहीं की जा सकी। ओवरहैड टेंक में केवल बिजली से पानी की सप्लाई होती है। लेकिन बड़ी बात ये है कि सीएमएस के आठ कॉल आने के बाद भी एसडीओ के द्वारा बिजली नहीं दिलाई गई और न ही कोई संतोषजनक जवाब दिया। सवाल ये है कि क्यां बिजली विभाग की नजरों में जिला अस्पताल में भर्ती मरीजों की जान की कोई कीमत नहीं हैं। आखिर क्या वजह रही जो करीब 29 घंटे जिला अस्पताल की बिजली बाधित रही।
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अमरोहा के मोहल्ला मुल्लाना निवासी परचून की दुकान चलाने वाले मोहम्मद आमिर पिछले चार साल से किडनी रोगी थे। वह मुरादाबाद के निजी अस्पताल में डायलिसिस कराते थे लेकिन काफी खर्चा होने के कारण आर्थिक तंगी में आ गए। जिला अस्पताल में ही यूनिट खुलने के बाद करीब दो साल से डायलिसिस करा रहे थे।
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बुधवार की सुबह पहली शिफ्ट में उनकी डायलिसिस होनी थी। उनकी पत्नी गजाला उन्हें लेकर जिला अस्पताल पहुंचीं। तकनीकी खराबी के कारण बिजली गुल थी। डायलिसिस यूनिट के लिए पानी की आपूर्ति नहीं हो सकी। नौ मरीज बिजली आपूर्ति का इंतजार कर रहे थे। दोपहर तक बिजली आपूर्ति शुरू नहीं हो पाई। मौजूद स्वाथ्यकर्मियों ने मरीजों को दूसरी जगह डायलिसिस कराने की बात कहकर लौटा दिया।
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आर्थिक तंगी में दूसरी जगह नहीं करा पाया डायलिसिस
सभी मरीजों के साथ मोहम्मद आमिर भी अस्पताल से लौट गया और आर्थिक तंगी के कारण दूसरी जगह डायलिसिस के लिए नहीं जा सका। जो उसके लिए जानलेवा साबित हुआ। घर पहुंचने पर उनकी हालत बिगड़ गई। परिजन उन्हें मुरादाबाद ले जाने लगे लेकिन रास्ते में ही मौत हो गई। बृहस्पतिवार को परिजनों ने शव सुपुर्द-ए-खाक कर दिया।
डीएम बीके त्रिपाठी के निर्देश पर एडीएम भगवान शरण और सीएमओ राजीव सिंघल जिला अस्पताल पहुंचे। यहां सीएमएस डॉ. प्रेमा पंथ त्रिपाठी, एसएस डॉ. चरण सिंह व अन्य डॉक्टरों से मामले की जानकारी की। दोनों अफसरों ने डायलिसिस संबंधित स्टाफ को कड़ी फटकार भी लगाई। साथ ही डायलिसिस यूनिट के प्रबंधक सुमित भारद्वाज से जवाब तलब किया है। वहीं डायलिसिस नहीं होने के कारण मरीज की मौत का मामला लखनऊ तक पहुंच गया जिसके बाद अफसरों में खलबली मची रही। आननफानन डीएम ने मामले की जांच सीएमओ को सौंपी है। जबकि सीएमएस ने तीन डॉक्टरों की टीम गठित कर पूरे मामले की जांच करने के निर्देश दिए हैं।
डायलिसिस नहीं होने के कारण मरीज की मौत के मामले की जांच सीएमओ को सौंपी गई है। जांच रिपोर्ट में जो दोषी होगा, उसे बख्शा नहीं जाएगा। मरीजों के इलाज में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। -बीके त्रिपाठी, डीएम, अमरोहा
29 घंटे गुल रही बिजली
18 अक्तूबर की शाम पांच बजे बिजली बाधित हुई थी जो 19 अक्तूबर की रात 10 बजे तक रही। इस बीच जिला अस्पताल में जेनरेटर का इस्तेमाल किया गया लेकिन डायलिसिस यूनिट के प्रबंधक ने जलापूर्ति 19 अक्तूबर को की दोपहर को शुरू होने की बात कही। इस दिन यूनिट पर एक भी मरीज की डायलिसिस नहीं हुई। डायलिसिस नहीं होने से मरीज की मौत हो गई। इस पूरे मामले की जांच डॉ. चरन सिंह, डॉ. सुनील कुमार तेवतिया, डॉ. विनय भार्गव की तीन सदस्य टीम करेगी। जांच रिपोर्ट मिलने के बाद कार्रवाई की जाएगी। -डॉ. प्रेमा पंथ त्रिपाठी, सीएमएस
डायलिसिस के लिए पानी की जरूरत
एक मरीज पर करीब 150 से 200 लीटर पानी की खपत होती है। बिजली नहीं होने के कारण बुधवार को ओवरहेड टैंक से पानी की सप्लाई नहीं हो रही थी इसलिए मरीजों को कहीं दूसरे स्थान पर डायलिसिस कराने की बात कहकर लौटा दिया गया था। इस संबंध में सीएमएस को पत्र भी लिखा गया है। मरीज मोहम्मद आमिर की मौत डायलिसिस यूनिट या जिला अस्पताल में नहीं हुई है। मरीजों को समय से डायलिसिस दी जाए इसके लिए पूरे प्रयास रहते हैं। यूनिट पर प्रतिदिन 27 लोगों की डायलिसिस हो रही है।
-सुमित भारद्वाज, प्रबंधक डायलिसिस यूनिट
एसडीओ ने नहीं सुनीं आठ कॉल, शुरू नहीं हुई सप्लाई
एक तरफ मुख्यमंत्री 24 घंटे बिजली देने की बात कर रहे हैं। शहर से लेकर गांव तक के लोग कटौती से परेशान रहते ही हैं। जिला अस्पताल में बिजली गुल होने के मामले में विभाग के अधिकारियों की मनमानी देखने को मिली। जिला अस्पाताल में करीब 29 घंटे बिजली गुल रही। सीएमएस ने आठ बार एसडीओ को फोन किए। लेकिन बिजली नहीं दी गई। इस कारण डायलिसिस नहीं हुई तो तीमारदार अपने मरीजों को लेकर भटकते रहे और समय से डायलिसिस नहीं होने पर एक मरीज की मौत हो गई।
अस्पताल की सीएमएस डॉ प्रेमा पंत त्रिपाठी ने बताया कि 18 अक्तूबर की शाम पांच बिजली चली गई थी। जिसके बाद 19 अक्तूबर को रात दस बजे के आसपास आई थी। जिसके चलते अस्पताल में डायलिसिस प्रभावित रही थी। बिजली की व्यवस्था ठीक कराने के लिए करीब आठ बार एसडीओ को काल किया गया। जिस पर एसडीओ ने बिजली ठीक कराने का आश्वासन दिया। लेकिन बावजूद इसके बिजली नहीं आई। हमारी ओर से वैकल्पिक रूप से जनरेटर से व्यवस्था को सुचारू रखा गया। लेकिन डायलिसिस यूनिट के प्रबंधक सुमित भारद्वाज की ओर से हमें 19 तारीख की दोपहर को बिजली नहीं होने के चलते पानी की सप्लाई ठप होने की जानकारी मिली थी। जबकि इससे पूर्व पानी की समस्या के बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई। हालांकि बिजली सप्लाई में 18 अक्तूबर की रात से समस्या हो रही थी। मैनेजर की ओर से डायलिसिस के मरीजों को कही ओर भेजने के बारे में जानकारी भी नहीं बताया गया। यदि मामला हमारे संज्ञान में होता तो अवश्य ही व्यवस्था को काबू किया जा सकता था। डायलिसिस यूनिट के मैनेजर ने कहा कि 19 अक्तूबर को दोपहर में हमारी यूनिट में बिजली पानी नहीं होने के बारे में जिला अस्पताल प्रशासन को चिट्ठी लिखकर अवगत कर दिया गया था। लेकिन अस्पताल में पानी की सप्लाई ठप होने के कारण डायलिसिस नहीं हो सकी। क्योंकि अमूमन एक मरीज के डायलिसिस करने में तकरीबन 150 से 200 लीटर आरओ पानी की खपत होती है। लेकिन ओवरहैड टैंक में पानी नहीं होने के चलते 19 अक्तूबर को किसी भी मरीज की डायलिसि नहीं की जा सकी। ओवरहैड टेंक में केवल बिजली से पानी की सप्लाई होती है। लेकिन बड़ी बात ये है कि सीएमएस के आठ कॉल आने के बाद भी एसडीओ के द्वारा बिजली नहीं दिलाई गई और न ही कोई संतोषजनक जवाब दिया। सवाल ये है कि क्यां बिजली विभाग की नजरों में जिला अस्पताल में भर्ती मरीजों की जान की कोई कीमत नहीं हैं। आखिर क्या वजह रही जो करीब 29 घंटे जिला अस्पताल की बिजली बाधित रही।