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जंगल की जमीन पर अवैध कब्जा कराना पड़ा महंगा, डिप्टी रेंजर सस्पेंड
ब्यूरो/अमर उजाला अमरोहा
Updated Fri, 02 Dec 2016 11:50 PM IST
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जंगल में अाग
- फोटो : अमर उजाला
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माफिया से हमसाज हो जंगल की जमीन पर उनका कब्जा कराना हसनपुर तहसील के डिप्टी रेंजर को महंगा पड़ गया है। वन संरक्षक/ क्षेत्रीय निदेशक (मुरादाबाद मंडल) ने माफिया का कब्जा कराने के आरोप में डिप्टी रेंजर को सस्पेंड कर दिया है। डिप्टी रेंजर के खिलाफ कार्रवाई होने से विभागीय अफसरों के साथ ही माफिया में हड़कंप मच गया है। सूत्रों के अनुसार माफिया से हमसाज कई और अफसरों पर गाज गिरना तय है।
हसनपुर तहसील के जेबड़ा, बिहारीपुर-पथरा में 53 सौ बीघे से अधिक जमीन पर माफिया ने कब्जा कर खेतीबाड़ी शुरू कर दी। आरोप वन विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों पर था कि इनकी मिलीभगत से ही माफिया वन विभाग की जमीन पर काबिज हैं। माफिया से पांच लाख रुपये कब्जा कराने का आरोप लगा था, जो जांच में सही पाया गया।
भूमि पर माफिया के कब्जे का खुलासा होने पर वन विभाग के अफसर से लेकर कर्मचारी तक टाल मटोल करते रहे। इधर राजनीतिक हस्तक्षेप भी उनके मार्ग में बाधक बना रहा। उधर पांच महीने से लगातार यही कहते रहे कि सर्वे के बिना भूमि को खाली कराना असंभव है। सर्वेयर जिले में है नहीं, जब संभल से आ जाएगा, सर्वे के बाद विभाग की भूमि को कब्जा मुक्त करा दिया जाएगा। अमर उजाला लगातार इस मुद्दे को प्रकाशित करता रहा।
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वन विभाग की 53 सौ बीघे से अधिक जमीन पर माफिया के कब्जे की शिकायत मुख्य वन संरक्षक (रुहेलखंड जोन) अरविंद कुमार गुप्ता और प्रधान मुख्य वन संरक्षक उमेंद्र शर्मा तक पहुंची। आला अफसरों ने मामले को गंभीरता से लेते हुए वन सुरक्षा प्रभारी (बरेली) एके सिंह को जांच कर रिपोर्ट मांगी। वन सुरक्षा प्रभारी की रिपोर्ट में स्थानीय अफसरों की माफिया से मिलीभगत की बात सामने आई।
विभाग के अफसरों की माफिया से संलिप्तता पाई जाने पर आला अफसरों ने वन संरक्षक/ क्षेत्रीय निदेशक (मुरादाबाद मंडल) को कार्रवाई के निर्देश दिए। माफिया का कब्जा कराने के आरोप में वन संरक्षक / क्षेत्रीय निदेशक (मुरादाबाद मंडल) आरपी वर्मा ने डिप्टी रेंजर हरीश मेहता को सस्पेंड कर दिया है। जिससे विभाग के अफसरों के साथ ही माफियाओं में हड़कंप मच गया है। सूत्रों के अनुसार कई और के खिलाफ भी कार्रवाई की जानी है।
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हसनपुर तहसील के जेबड़ा, बिहारीपुर-पथरा में 53 सौ बीघे से अधिक जमीन पर माफिया ने कब्जा कर खेतीबाड़ी शुरू कर दी। आरोप वन विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों पर था कि इनकी मिलीभगत से ही माफिया वन विभाग की जमीन पर काबिज हैं। माफिया से पांच लाख रुपये कब्जा कराने का आरोप लगा था, जो जांच में सही पाया गया।
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भूमि पर माफिया के कब्जे का खुलासा होने पर वन विभाग के अफसर से लेकर कर्मचारी तक टाल मटोल करते रहे। इधर राजनीतिक हस्तक्षेप भी उनके मार्ग में बाधक बना रहा। उधर पांच महीने से लगातार यही कहते रहे कि सर्वे के बिना भूमि को खाली कराना असंभव है। सर्वेयर जिले में है नहीं, जब संभल से आ जाएगा, सर्वे के बाद विभाग की भूमि को कब्जा मुक्त करा दिया जाएगा। अमर उजाला लगातार इस मुद्दे को प्रकाशित करता रहा।
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वन विभाग की 53 सौ बीघे से अधिक जमीन पर माफिया के कब्जे की शिकायत मुख्य वन संरक्षक (रुहेलखंड जोन) अरविंद कुमार गुप्ता और प्रधान मुख्य वन संरक्षक उमेंद्र शर्मा तक पहुंची। आला अफसरों ने मामले को गंभीरता से लेते हुए वन सुरक्षा प्रभारी (बरेली) एके सिंह को जांच कर रिपोर्ट मांगी। वन सुरक्षा प्रभारी की रिपोर्ट में स्थानीय अफसरों की माफिया से मिलीभगत की बात सामने आई।
विभाग के अफसरों की माफिया से संलिप्तता पाई जाने पर आला अफसरों ने वन संरक्षक/ क्षेत्रीय निदेशक (मुरादाबाद मंडल) को कार्रवाई के निर्देश दिए। माफिया का कब्जा कराने के आरोप में वन संरक्षक / क्षेत्रीय निदेशक (मुरादाबाद मंडल) आरपी वर्मा ने डिप्टी रेंजर हरीश मेहता को सस्पेंड कर दिया है। जिससे विभाग के अफसरों के साथ ही माफियाओं में हड़कंप मच गया है। सूत्रों के अनुसार कई और के खिलाफ भी कार्रवाई की जानी है।