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छठ पर्व : डूबते सूरज को अर्घ्य देकर की सुख-समृद्धि की कामना
Fri, 08 Nov 2024 02:41 AM IST
मुरादाबाद ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अमरोहा
संवाद न्यूज एजेंसी, अमरोहा
Updated Fri, 08 Nov 2024 02:41 AM IST
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अमरोहा। छठ व्रतियों ने वासुदेव तीर्थ मंदिर सरोवर और ब्रजघाट में गंगा किनारे डूबते हुए सूर्य को अर्घ्य देकर पूजा अर्चना की। इस मौके पर महिलाओं व पुरुषों ने छठ मैया से सुख समृद्धि की कामना के साथ सन्तान प्राप्ति की मनोकामना की। पूजा के समय बड़ी संख्या में बिहार प्रांत व पूर्वांचल के लोग मौजूद रहे। इस दौरान महिलाओं ने फलों व हरी सब्जियों का दान किया।
महिलाओं ने बृहस्पतिवार की तड़के जल्दी जागकर भजन-पूजन किया। विभिन्न प्रकार के फल व हरी सब्जियां, गन्ने आदि को पूजन में साथ रखा। शाम के समय वासुदेव मंदिर स्थित सरोवर पर एकत्र व्रत रखने वाली महिलाओं का जुटना शुरू हो गया। निर्जला व्रत रहीं महिलाएं परिजनों संग छठ मैया का गीत गाते हुए सरोवर घाट पर एकत्र हुईं। वेदी को गंगा जल से धोकर धूप-अगरबत्ती जलाने के साथ गन्ने को खड़ा कर कलश स्थापित कर पूजन-अर्चन में व्यस्त हो गईं। जैसे ही सूर्यास्त का समय नजदीक आया, व्रती महिलाएं पानी में जाकर खड़ी होकर सूर्य उपासना में लीन हो गईं। यहां दूध और गंगाजल से सूर्य देव को अर्घ्य दिया। महिलाओं ने छठ मईया के परंपरागत गीत गुनगुनाए। जिसमें पहिले पहिल हम कईनी, छठी मईया व्रत तोहार। करिहा क्षमा छठी मईया, भूल-चूक गलती हमार। चार दिवसीय छठ पूजा का समापन शुक्रवार की सुबह उगते सूर्य को अर्घ्य देकर किया जाएगा।
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महिलाओं ने बृहस्पतिवार की तड़के जल्दी जागकर भजन-पूजन किया। विभिन्न प्रकार के फल व हरी सब्जियां, गन्ने आदि को पूजन में साथ रखा। शाम के समय वासुदेव मंदिर स्थित सरोवर पर एकत्र व्रत रखने वाली महिलाओं का जुटना शुरू हो गया। निर्जला व्रत रहीं महिलाएं परिजनों संग छठ मैया का गीत गाते हुए सरोवर घाट पर एकत्र हुईं। वेदी को गंगा जल से धोकर धूप-अगरबत्ती जलाने के साथ गन्ने को खड़ा कर कलश स्थापित कर पूजन-अर्चन में व्यस्त हो गईं। जैसे ही सूर्यास्त का समय नजदीक आया, व्रती महिलाएं पानी में जाकर खड़ी होकर सूर्य उपासना में लीन हो गईं। यहां दूध और गंगाजल से सूर्य देव को अर्घ्य दिया। महिलाओं ने छठ मईया के परंपरागत गीत गुनगुनाए। जिसमें पहिले पहिल हम कईनी, छठी मईया व्रत तोहार। करिहा क्षमा छठी मईया, भूल-चूक गलती हमार। चार दिवसीय छठ पूजा का समापन शुक्रवार की सुबह उगते सूर्य को अर्घ्य देकर किया जाएगा।
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