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Amroha News: मतदाताओं की चुप्पी से बढ़ रही प्रत्याशियों की बेचैनी
Thu, 25 Apr 2024 07:20 AM IST
मुरादाबाद ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अमरोहा
संवाद न्यूज एजेंसी, अमरोहा
Updated Thu, 25 Apr 2024 07:20 AM IST
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अमरोहा। लोकसभा चुनाव के लिख खूब जोर आजमाइश चल रही है, लेकिन मतदाता किसे सांसद चुनेंगे। इसका रुझान स्पष्ट नहीं हो रहा है। शहर और देहात में मतदाताओं में उत्साह नहीं दिख रहा। ऐसा माना जा रहा है प्रत्याशियों के वादों पर उनकी पैनी निगाह है। मतदाताओं की चुप्पी से प्रत्याशियों की मुश्किलें बढ़ रही हैं। प्रत्याशी उलझन में हैं। मतदाताओं की खामोशी क्या गुल खिलाएगी, ये 4 जून को चुनाव परिणाम आने के बाद मालूम होगा।
अमरोहा से बारह प्रत्याशी चुनावी समर में हैं। इसमें भाजपा से कंवर सिंह तंवर, कांग्रेस-सपा गठबंधन से कुंवर दानिश अली, बसपा से डॉ. मुजाहिद हुसैन, निर्दलीय दानिश, काशिफ हुसैन, नईमुद्दीन, नरेंद्र सिंह, सुरेश, जीतपाल राणा, कुमदेश कुमार, कुशाग्र और अखिल भारतीय परिवार पार्टी से सुहेल हैदर शामिल हैं। जिले में 26 अप्रैल को मतदान हैं। भाजपा प्रत्याशी के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य, ब्रजेश पाठक और जयंत चौधरी अमरोहा में जनसभा कर चुके हैं। वहीं, गठबंधन प्रत्याशी के लिए राहुल गांधी और अखिले यादव व आप सांसद संजय सिंह, जबकि मायावती बसपा प्रत्याशी के लिए जनसभा कर चुकी हैं। बावजूद जनता का मूड खुल कर सामने नहीं आ रहा है।
ऐसा माना जा रहा है कि मतदाता हर प्रत्याशी का आकलन करने में जुटा है कि समस्याओं से कौन निजात दिला सकता है? लिहाजा सभी के दावों पर मतदाता खामोशी से पैनी निगाह जमाए हुए हैं। मतदाताओं की चुप्पी से माहौल समझ पाना प्रत्याशियों के लिए मुश्किल हो रहा है। 26 अप्रैल यानी कल मतदान होना है, ऐसे में प्रत्याशियों के बीच बेचैनी देखी जा रही है।
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लोकसभा सीट पर मुख्य पार्टियों के प्रत्याशियों ने रात-दिन एक कर दिया है। इस बार बसपा और कांग्रेस-सपा गठबंधन के साथ भाजपा भी दलित और मुस्लिम मतदाताओं को साधने का प्रयास करती रही। भाजपाइयों का दावा है कि उनकी सरकार ने जो विकास कार्य किए हैं, उनसे प्रेरित होकर दलित और मुस्लिम समाज भी अब भाजपा के साथ जुड़ गया है। जबकि बसपा के साथ उसका दलित वोट बैंक एकजुट दिख रहा है, वहीं मुस्लिम मतदाताओं को भी अपने पक्ष में होना मान रहे हैं। जबकि कांग्रेस-सपा गठबंधन की भी दलित वोट पर नजर है।
लोकसभा चुनाव से पहले राजपूतों की नाराजगी बड़ी सियासी चुनौती खड़ी हो गई है। कई राज्यों में राजपूत समाज ने भाजपा का बहिष्कार करने का दावा किया है। भाजपा ने कभी सोचा भी नहीं होगा कि उसका वोट बैंक समझे जाने वाले वर्ग से ही उसको ऐसी नाराजगी झेलनी पड़ेगी। हालांकि, भाजपा से नाराजगी का फायदा उठाकर बसपा और गठबंधन प्रत्याशी इसका फायदा उठाने की कोशिश में हैं। मायावती ने भी जनसभी क्षत्रिय समाज को साधने का प्रयास किया था।
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अमरोहा से बारह प्रत्याशी चुनावी समर में हैं। इसमें भाजपा से कंवर सिंह तंवर, कांग्रेस-सपा गठबंधन से कुंवर दानिश अली, बसपा से डॉ. मुजाहिद हुसैन, निर्दलीय दानिश, काशिफ हुसैन, नईमुद्दीन, नरेंद्र सिंह, सुरेश, जीतपाल राणा, कुमदेश कुमार, कुशाग्र और अखिल भारतीय परिवार पार्टी से सुहेल हैदर शामिल हैं। जिले में 26 अप्रैल को मतदान हैं। भाजपा प्रत्याशी के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य, ब्रजेश पाठक और जयंत चौधरी अमरोहा में जनसभा कर चुके हैं। वहीं, गठबंधन प्रत्याशी के लिए राहुल गांधी और अखिले यादव व आप सांसद संजय सिंह, जबकि मायावती बसपा प्रत्याशी के लिए जनसभा कर चुकी हैं। बावजूद जनता का मूड खुल कर सामने नहीं आ रहा है।
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ऐसा माना जा रहा है कि मतदाता हर प्रत्याशी का आकलन करने में जुटा है कि समस्याओं से कौन निजात दिला सकता है? लिहाजा सभी के दावों पर मतदाता खामोशी से पैनी निगाह जमाए हुए हैं। मतदाताओं की चुप्पी से माहौल समझ पाना प्रत्याशियों के लिए मुश्किल हो रहा है। 26 अप्रैल यानी कल मतदान होना है, ऐसे में प्रत्याशियों के बीच बेचैनी देखी जा रही है।
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लोकसभा सीट पर मुख्य पार्टियों के प्रत्याशियों ने रात-दिन एक कर दिया है। इस बार बसपा और कांग्रेस-सपा गठबंधन के साथ भाजपा भी दलित और मुस्लिम मतदाताओं को साधने का प्रयास करती रही। भाजपाइयों का दावा है कि उनकी सरकार ने जो विकास कार्य किए हैं, उनसे प्रेरित होकर दलित और मुस्लिम समाज भी अब भाजपा के साथ जुड़ गया है। जबकि बसपा के साथ उसका दलित वोट बैंक एकजुट दिख रहा है, वहीं मुस्लिम मतदाताओं को भी अपने पक्ष में होना मान रहे हैं। जबकि कांग्रेस-सपा गठबंधन की भी दलित वोट पर नजर है।
लोकसभा चुनाव से पहले राजपूतों की नाराजगी बड़ी सियासी चुनौती खड़ी हो गई है। कई राज्यों में राजपूत समाज ने भाजपा का बहिष्कार करने का दावा किया है। भाजपा ने कभी सोचा भी नहीं होगा कि उसका वोट बैंक समझे जाने वाले वर्ग से ही उसको ऐसी नाराजगी झेलनी पड़ेगी। हालांकि, भाजपा से नाराजगी का फायदा उठाकर बसपा और गठबंधन प्रत्याशी इसका फायदा उठाने की कोशिश में हैं। मायावती ने भी जनसभी क्षत्रिय समाज को साधने का प्रयास किया था।