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कई राज्यों की पसंद बना अमरोहा का बैंगन
ब्यूरो/अमर उजाला अमरोहा
Updated Fri, 12 May 2017 01:20 AM IST
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मिश्रबाजार स्थित एक सब्जी की दूकान पर रखीं सब्जियां।
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देशभर में अपनी अलग पहचान रखने वाला अमरोहा हरी सब्जी की खेती में भी नंबर वन हैं। टमाटर, करेला और शिमला मिर्च के बाद बैंगन की पैैदावार भी बड़ी मात्रा में हो रही है।
दिल्ली समेत देश के कई राज्यों और बड़े शहर वासियों को अमरोहा का बैंगन पसंद बन चुका हैं। हर रोज हजारों क्विंटल बैंगन देश के कई बड़े शहरों के लिए सप्लाई होता है। शहर के आस-पास स्थित सैकड़ों बीघा जमीन में फैले बैंगन की खेती से जहां किसानों को बड़ा फायदा हो रहा है, तो वहीं क्षेत्र की करीब दो हजार से अधिक महिलाओं को रोजगार भी मिल रहा है।
अमितपुरा निवासी किसान प्रेम सिंह के मुताबिक बागवानी के मामले में अमरोहा पहले पायदान पर है। बैंगन की फसल मात्र मई और जून दो महीने रहती है। फसल तैयार होते ही बैंगन व्यापारी संपर्क साधना शुरू कर देते है।
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राजधानी दिल्ली और अन्य राज्यों समेत तमाम बड़े महानगरों की सब्जी मंडियों से मिलने वाले रोज के रेटों पर बैंगन की खरीददारी करते हैं। हालांकि कुछ बड़े किसान खुद ही बाहर एक्सपोर्ट करते हैं।
बैंगन व्यापारी राजपाल के मुताबिक शहर से हर रोज 100 से 120 टन बैंगन एक्सपोर्ट किया जा रहा है। खास बात यह है कि बैंगन की खेती करने वाले किसानों को तो फायदा है ही, बल्कि आस-पास क्षेत्र के रहने वाली बेरोजगार महिलाओं को भी दो महीने के लिए रोजगार मिल जाता है।
किसान रामसिंह के मुताबिक कई हजार बीघा जमीन में बैंगन, टमाटर, करेला और शिमला मिर्च की खेती की जाती हैं। जिसमें करीब 200 बीघा जमीन में बैंगन की पैदावार हो रही है। सुबह छह से बारह बजे तक बैंगन तोड़ने का काम किया जाता है। प्रत्येक महिला को 25 रुपये प्रति घंटा से हिसाब से मजदूरी दी जाती है।
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दिल्ली समेत देश के कई राज्यों और बड़े शहर वासियों को अमरोहा का बैंगन पसंद बन चुका हैं। हर रोज हजारों क्विंटल बैंगन देश के कई बड़े शहरों के लिए सप्लाई होता है। शहर के आस-पास स्थित सैकड़ों बीघा जमीन में फैले बैंगन की खेती से जहां किसानों को बड़ा फायदा हो रहा है, तो वहीं क्षेत्र की करीब दो हजार से अधिक महिलाओं को रोजगार भी मिल रहा है।
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अमितपुरा निवासी किसान प्रेम सिंह के मुताबिक बागवानी के मामले में अमरोहा पहले पायदान पर है। बैंगन की फसल मात्र मई और जून दो महीने रहती है। फसल तैयार होते ही बैंगन व्यापारी संपर्क साधना शुरू कर देते है।
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राजधानी दिल्ली और अन्य राज्यों समेत तमाम बड़े महानगरों की सब्जी मंडियों से मिलने वाले रोज के रेटों पर बैंगन की खरीददारी करते हैं। हालांकि कुछ बड़े किसान खुद ही बाहर एक्सपोर्ट करते हैं।
बैंगन व्यापारी राजपाल के मुताबिक शहर से हर रोज 100 से 120 टन बैंगन एक्सपोर्ट किया जा रहा है। खास बात यह है कि बैंगन की खेती करने वाले किसानों को तो फायदा है ही, बल्कि आस-पास क्षेत्र के रहने वाली बेरोजगार महिलाओं को भी दो महीने के लिए रोजगार मिल जाता है।
किसान रामसिंह के मुताबिक कई हजार बीघा जमीन में बैंगन, टमाटर, करेला और शिमला मिर्च की खेती की जाती हैं। जिसमें करीब 200 बीघा जमीन में बैंगन की पैदावार हो रही है। सुबह छह से बारह बजे तक बैंगन तोड़ने का काम किया जाता है। प्रत्येक महिला को 25 रुपये प्रति घंटा से हिसाब से मजदूरी दी जाती है।