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बैंक बंद, एटीएम पर ताला, लोग बेहाल
ब्यूरो/अमर उजाला अमरोहा
Updated Sun, 20 Nov 2016 11:42 PM IST
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noteban and atm
- फोटो : AmarUjala
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नोटबंदी के बाद लोगों की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रहीं हैें। रविवार को बैंक बंद रहीं तो वहीं एटीएम पर भी ताला लटका रहा। लोग एक-एक पैसे के लिए इधर-उधर भटकते रहे। एक स्टेट बैंक की शाखा रविवार को जरूर खुली रही, लेकिन उसके बाहर भी लोगों की भीड़ जमा थी। जहां कुछ लोगों को ही रकम नसीब हुई। अंटी में रुपये नहीं होने से लोगों के सब्र का बांध अब टूटने लगा है।
जिले में बैंक व एटीएम की भरमार है, फिर भी उपभोक्ताओं की लंबी कतारें लग रही हैं। हालातों पर बैंक काबू नहीं कर पा रहे हैं। आखिर वजह क्या है, हर कोई ताज्जुब में है। बैंक कर्मियों की भूमिका पर सवाल उठने लगे हैं। जी हां, जनपद में 162 बैंक व 54 एटीएम मशीनें हैं। बैंकों के बाहर भीड़ रहती है, जबकि एटीएम के शटर दिन भर गिरे होते हैं। ये नजारा बैंकों पर रहता है। इधर बैंक अधिकारी करेंसी नहीं होना बताते हैं, मगर वह अपने पुराने उपभोक्ताओं का पूरा ध्यान रख रहे हैं। उनकी यही कार्यप्रणाली प्रत्येक शख्स को हैरत में डाल रही है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 500 व 1000 के नोट बंद किए हुए 12 दिन बीत गए हैं, किंतु अभी तक बैंकों पर उमड़ने वाली भीड़ बिल्कुल कम नहीं हुई है। रोज उसका ग्राफ बढ़ता ही जा रहा है। दूर तक उपभोक्ताओं की लाइनें लग रही हैं। यहां बता दें कि जनपद में प्रथमा बैंक की 109 शाखाएं हैं, जबकि आठ एटीएम मशीन हैं। सिंडीकेट बैंक की 20 शाखाएं हैं और 14 एटीएम मशीनें हैं।
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पंजाब नेशनल बैंक की 10 शाखाएं व आठ एटीएम मशीन, एसबीआई की छह शाखाएं व छह एटीएम मशीन, एक्सेज बैंक की दो शाखाएं व तीन एटीएम मशीन, केनरा बैंक की चार शाखाएं व चार एटीएम मशीन, यूनियन बैंक की दो शाखाएं व दो एटीएम मशीन, एचडीएफसी बैंक की दो शाखा व दो एटीएम मशीन हैं। इसके अलावा भूमि संरक्षण बैंक, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया, बैंक ऑफ बड़ौदा, आईडीबीआई आदि बैंक भी जनपद में मौजूद हैं।
सोचने की बात ये है कि बैंक व एटीएम की भरमार होने के बाद भी उपभोक्ताओं की लाइनें क्यों लग रही हैं। अब तो उपभोक्ता ही बैंक कर्मचारियों की कार्यप्रणाली पर शक करने लगे हैं। उनका आरोप है कि बैंक कर्मी पुराने उपभोक्ताओं को ज्यादा धनराशि दे रहे हैं। मनमर्जी से काम कर रहे हैं।
यही कारण लाइन लगने का बन रहा है, मगर अधिकारी उनके इस आरोप को एक सिरे से नकार रहे हैं। कहते हैं कि करेंसी ज्यादा नहीं आ रही है। एटीएम मशीन छोड़िए बैंक से लोगों को पूरे रुपए नहीं दे पा रहे हैं। करेंसी आने पर ही एटीएम चल पाएंगे, तभी भीड़ कम होगी।
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जिले में बैंक व एटीएम की भरमार है, फिर भी उपभोक्ताओं की लंबी कतारें लग रही हैं। हालातों पर बैंक काबू नहीं कर पा रहे हैं। आखिर वजह क्या है, हर कोई ताज्जुब में है। बैंक कर्मियों की भूमिका पर सवाल उठने लगे हैं। जी हां, जनपद में 162 बैंक व 54 एटीएम मशीनें हैं। बैंकों के बाहर भीड़ रहती है, जबकि एटीएम के शटर दिन भर गिरे होते हैं। ये नजारा बैंकों पर रहता है। इधर बैंक अधिकारी करेंसी नहीं होना बताते हैं, मगर वह अपने पुराने उपभोक्ताओं का पूरा ध्यान रख रहे हैं। उनकी यही कार्यप्रणाली प्रत्येक शख्स को हैरत में डाल रही है।
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 500 व 1000 के नोट बंद किए हुए 12 दिन बीत गए हैं, किंतु अभी तक बैंकों पर उमड़ने वाली भीड़ बिल्कुल कम नहीं हुई है। रोज उसका ग्राफ बढ़ता ही जा रहा है। दूर तक उपभोक्ताओं की लाइनें लग रही हैं। यहां बता दें कि जनपद में प्रथमा बैंक की 109 शाखाएं हैं, जबकि आठ एटीएम मशीन हैं। सिंडीकेट बैंक की 20 शाखाएं हैं और 14 एटीएम मशीनें हैं।
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पंजाब नेशनल बैंक की 10 शाखाएं व आठ एटीएम मशीन, एसबीआई की छह शाखाएं व छह एटीएम मशीन, एक्सेज बैंक की दो शाखाएं व तीन एटीएम मशीन, केनरा बैंक की चार शाखाएं व चार एटीएम मशीन, यूनियन बैंक की दो शाखाएं व दो एटीएम मशीन, एचडीएफसी बैंक की दो शाखा व दो एटीएम मशीन हैं। इसके अलावा भूमि संरक्षण बैंक, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया, बैंक ऑफ बड़ौदा, आईडीबीआई आदि बैंक भी जनपद में मौजूद हैं।
सोचने की बात ये है कि बैंक व एटीएम की भरमार होने के बाद भी उपभोक्ताओं की लाइनें क्यों लग रही हैं। अब तो उपभोक्ता ही बैंक कर्मचारियों की कार्यप्रणाली पर शक करने लगे हैं। उनका आरोप है कि बैंक कर्मी पुराने उपभोक्ताओं को ज्यादा धनराशि दे रहे हैं। मनमर्जी से काम कर रहे हैं।
यही कारण लाइन लगने का बन रहा है, मगर अधिकारी उनके इस आरोप को एक सिरे से नकार रहे हैं। कहते हैं कि करेंसी ज्यादा नहीं आ रही है। एटीएम मशीन छोड़िए बैंक से लोगों को पूरे रुपए नहीं दे पा रहे हैं। करेंसी आने पर ही एटीएम चल पाएंगे, तभी भीड़ कम होगी।