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यूपी का ऐसा गांव जहां 23 साल से कोई विवाद और मुकदमा नहीं
प्रेम पाल/अमर उजाला अमरोहा
Updated Sat, 24 Dec 2016 10:35 AM IST
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23 साल बीत चुके हैं यानी दो दशक। इस छोटे से गांव में लोगों के बीच कोई विवाद नहीं हुआ। थाने तक एक मुकदमा तक नहीं गया। लोग आपसी मतभेदों को आपसी सुलह समझौते से ही निपटा लेते हैं। बात बढ़ ही नहीं पाती।
हिंदू-मुस्लिम और उनकी कई बिरादरियां सालों से इसी तरह मतभेद दूर करते आ रहे हैं और लोगों को लिए मिसाल बन गए। यह गांव लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत है। खास कर उनके लिए जो मामूली विवाद में एक दूसरे के खून के प्यासे हो जाते हैं। नतीजतन थाने और कचहरियों के चक्कर लगाकर खुद भी बर्बाद होते हैं तथा पीढ़ी को विनाश का दंश झेलने को मजबूर करते हैं।
सदर तहसील का बहलोलपुर गांव देहात थाने में पड़ता है तथा अमरोहा ब्लाक की सिहाली नारायण ग्राम पंचायत का मझरा है। गांव की आबादी तकरीबन एक हजार है। गुर्जर, पाल, जोगी और मुस्लिम आबादी का बहलोलपुर गांव दूसरे गांवों के लिए प्रेरणा से कम नहीं है। क्योंकि गांव का दो दशक से कोई भी मामला थाने नहीं पहुंचा। यहां पर पूरी तरह से अमन कायम है।
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गांव में विवाद न हो इसकी जिम्मेदारी बुजुर्ग और युवाओं पर है। गांव को लड़ाई झगड़ों से कैसे बचा रखा है इस बारे में पूछने पर 78 वर्षीय श्याम सिंह गुर्जर बेबाक कहते हैं विवाद से बर्बादी के अलावा कुछ नहीं मिलता। गांव में अमन-चैन कायम रखने की जिम्मेदारी पूरा गांव संभाल रहा है।
हेम सिंह पाल का कहना है कि अव्वल तो गांव में कोई विवाद ही नहीं होता, अगर किसी के बीच मतभेद के चलते कुछ हो भी जाए तो थाने नहीं जाने देते। दोनों पक्षों को बैठाकर गांव में ही समझौता करा दिया जाता है। जुम्मा और फकीरा कहते हैं कि गांव के अमन चैन सबका जोर रहता है। जाति, बिरादरी और मजहब के फेर में न पड़कर सभी विवादों को गांव में ही निपटा दिया जाता है।
दो दशक से गांव का कोई भी मामला थाने में दर्ज नहीं होना हैरत करने वाला है। और वह भी ऐसा गांव जिसमें कई बिरादरी के लोग रहते हैं। गांव को विवादों से बचाकर रखने के लिए ग्रामीण वाकई काबिले तारीफ हैं। बहलोलपुर के लोगों से दूसरे गांवों को भी प्रेरणा लेनी चाहिए।
-नरेंद्र प्रताप सिंह अपर पुलिस अधीक्षक।
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हिंदू-मुस्लिम और उनकी कई बिरादरियां सालों से इसी तरह मतभेद दूर करते आ रहे हैं और लोगों को लिए मिसाल बन गए। यह गांव लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत है। खास कर उनके लिए जो मामूली विवाद में एक दूसरे के खून के प्यासे हो जाते हैं। नतीजतन थाने और कचहरियों के चक्कर लगाकर खुद भी बर्बाद होते हैं तथा पीढ़ी को विनाश का दंश झेलने को मजबूर करते हैं।
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सदर तहसील का बहलोलपुर गांव देहात थाने में पड़ता है तथा अमरोहा ब्लाक की सिहाली नारायण ग्राम पंचायत का मझरा है। गांव की आबादी तकरीबन एक हजार है। गुर्जर, पाल, जोगी और मुस्लिम आबादी का बहलोलपुर गांव दूसरे गांवों के लिए प्रेरणा से कम नहीं है। क्योंकि गांव का दो दशक से कोई भी मामला थाने नहीं पहुंचा। यहां पर पूरी तरह से अमन कायम है।
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गांव में विवाद न हो इसकी जिम्मेदारी बुजुर्ग और युवाओं पर है। गांव को लड़ाई झगड़ों से कैसे बचा रखा है इस बारे में पूछने पर 78 वर्षीय श्याम सिंह गुर्जर बेबाक कहते हैं विवाद से बर्बादी के अलावा कुछ नहीं मिलता। गांव में अमन-चैन कायम रखने की जिम्मेदारी पूरा गांव संभाल रहा है।
हेम सिंह पाल का कहना है कि अव्वल तो गांव में कोई विवाद ही नहीं होता, अगर किसी के बीच मतभेद के चलते कुछ हो भी जाए तो थाने नहीं जाने देते। दोनों पक्षों को बैठाकर गांव में ही समझौता करा दिया जाता है। जुम्मा और फकीरा कहते हैं कि गांव के अमन चैन सबका जोर रहता है। जाति, बिरादरी और मजहब के फेर में न पड़कर सभी विवादों को गांव में ही निपटा दिया जाता है।
दो दशक से गांव का कोई भी मामला थाने में दर्ज नहीं होना हैरत करने वाला है। और वह भी ऐसा गांव जिसमें कई बिरादरी के लोग रहते हैं। गांव को विवादों से बचाकर रखने के लिए ग्रामीण वाकई काबिले तारीफ हैं। बहलोलपुर के लोगों से दूसरे गांवों को भी प्रेरणा लेनी चाहिए।
-नरेंद्र प्रताप सिंह अपर पुलिस अधीक्षक।