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Amroha News: अजादारों ने जंजीर का मातम कर खुद को किया लहूलुहान
Fri, 28 Jul 2023 01:27 AM IST
मुरादाबाद ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अमरोहा
संवाद न्यूज एजेंसी, अमरोहा
Updated Fri, 28 Jul 2023 01:27 AM IST
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अमरोहा। आठ मुहर्रम का मातमी जुलूस अजाखाना चांद सूरज, काजी जादा से बहुत गमगीन फिजा में बरामद हुआ। इससे पूर्व आज की तारीख़ का मरसिया जब चले यसरिब से सिब्ते मुस्तफा सूए ईराक पढ़ा गया। शहर के अधिकतर इमाम बारगाहों में गमे हुसैन में डूबे अजादारों ने जंजीर का मातम कर खुद को लहूलुहान कर लिया। फिजा में देर रात या हुसैन की सदाएं गूंजतीं रहीं। काले कपड़ों में अजादारों के आवागमन से शहर का माहौल गमगीन रहा।
नगर के मोहल्ला काजीजादा स्थित अज़ाखाना चांद-सूरज से आज के हुसैनी काफिले की शुरूआत ठीक सुबह साढ़े आठ बजे हुई। इस इमाम बारगाह का इतिहास लगभग 500 साल पुराना है। जुलूस का क्रम अन्य दिनों के जुलूसों जैसा ही था। सबसे आगे ऊंटों का काफिला था। ऊंटों पर शबिहे आमारी सजी हुई थी। इसके बाद रौशन चौकियां और अराईश थी। सात मोहर्रम को इमाम हुसैन के काफिले पर कर्बला में पानी बंद कर दिया गया था। बच्चे भूखे और प्यासे थे, लेकिन उन्होंने यजीद की बेअत कुबूल नहीं की और अपनी शहादत देकर इस्लाम को जिंदा कर दिया। इसी मंजर को याद कर जुलूस में शामिल अजादार या हुसैन की सदाएं बुलंद करते हुए चल रहे थे। जुलूस में अलमों की तादाद काफी होती है। इस हुसैनी काफिले के अजाखाना दानिशमंदान पहुंचने पर अजादारों ने जंजीर का मातम कर खुद को लहूलुहान कर लिया। खारी कुंआ पर कारी सिब्ते रसूल की रिहाइश गाह, आलीजान मजिल में हाजी उवैस मुस्तफा परिवार की ओर से आली जान मंजिल में चाय पिलाई गई, जहां मुस्लिम कमेटी के सदस्यगण भी मौजूद थे। पूर्व नगर पालिका चेयरमैन अतुल कुमार जैन भी गमे हुसैन में शरीक हुए। पंडित भुवन शर्मा ने भी जुलूस का इस्तकबाल किया। बगला, दानिश मन्दान, दरबार कला व अन्य स्थानों पर मौलाना रज़ा अली रजन ने शहादते हुसैन का बयान किया जिसको सुन कर हर इंसान की आंखों से आंसू निकल आए। बाजार गुजरी में तेज बारिश के बाद लोग और अधिक संख्या में जुलूस में पहुंचे।नम आंखों के बीच रात में अजाखाना चांद सूरज काजी जादा में ही जुलूस का समापन हुआ। डीएम द्वारा बनाई गई समिती के तत्वावधान में जुलूस में जिया एजाज नकवी, लियाकत अमरोही, बाकर रजा नकवी, नदीम नकवी आदि मौजूद रहे। जुलूस का संचालन अन्जुमन रजा काराने हुसैनी के काईद-गुलाम सज्जाद, जनरल सेक्रेटरी खुर्शीद हैदर जैदी व अन्य सदस्य मौजूद रहे।
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नगर के मोहल्ला काजीजादा स्थित अज़ाखाना चांद-सूरज से आज के हुसैनी काफिले की शुरूआत ठीक सुबह साढ़े आठ बजे हुई। इस इमाम बारगाह का इतिहास लगभग 500 साल पुराना है। जुलूस का क्रम अन्य दिनों के जुलूसों जैसा ही था। सबसे आगे ऊंटों का काफिला था। ऊंटों पर शबिहे आमारी सजी हुई थी। इसके बाद रौशन चौकियां और अराईश थी। सात मोहर्रम को इमाम हुसैन के काफिले पर कर्बला में पानी बंद कर दिया गया था। बच्चे भूखे और प्यासे थे, लेकिन उन्होंने यजीद की बेअत कुबूल नहीं की और अपनी शहादत देकर इस्लाम को जिंदा कर दिया। इसी मंजर को याद कर जुलूस में शामिल अजादार या हुसैन की सदाएं बुलंद करते हुए चल रहे थे। जुलूस में अलमों की तादाद काफी होती है। इस हुसैनी काफिले के अजाखाना दानिशमंदान पहुंचने पर अजादारों ने जंजीर का मातम कर खुद को लहूलुहान कर लिया। खारी कुंआ पर कारी सिब्ते रसूल की रिहाइश गाह, आलीजान मजिल में हाजी उवैस मुस्तफा परिवार की ओर से आली जान मंजिल में चाय पिलाई गई, जहां मुस्लिम कमेटी के सदस्यगण भी मौजूद थे। पूर्व नगर पालिका चेयरमैन अतुल कुमार जैन भी गमे हुसैन में शरीक हुए। पंडित भुवन शर्मा ने भी जुलूस का इस्तकबाल किया। बगला, दानिश मन्दान, दरबार कला व अन्य स्थानों पर मौलाना रज़ा अली रजन ने शहादते हुसैन का बयान किया जिसको सुन कर हर इंसान की आंखों से आंसू निकल आए। बाजार गुजरी में तेज बारिश के बाद लोग और अधिक संख्या में जुलूस में पहुंचे।नम आंखों के बीच रात में अजाखाना चांद सूरज काजी जादा में ही जुलूस का समापन हुआ। डीएम द्वारा बनाई गई समिती के तत्वावधान में जुलूस में जिया एजाज नकवी, लियाकत अमरोही, बाकर रजा नकवी, नदीम नकवी आदि मौजूद रहे। जुलूस का संचालन अन्जुमन रजा काराने हुसैनी के काईद-गुलाम सज्जाद, जनरल सेक्रेटरी खुर्शीद हैदर जैदी व अन्य सदस्य मौजूद रहे।
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