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Amroha News: एएसआई की टीम ने ऋषिकेश कूप की मिट्टी का लिया नमूना
Fri, 10 Jan 2025 12:47 AM IST
मुरादाबाद ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अमरोहा
संवाद न्यूज एजेंसी, अमरोहा
Updated Fri, 10 Jan 2025 12:47 AM IST
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संभल में चक्की का पाट देखने पहुंची एएसआई टीम
- फोटो : संवाद
संभल।
एएसआई की टीम ने बृहस्पतिवार को मोहल्ला कोटपूर्वी स्थित ऋषिकेश कूप का निरीक्षण किया है। साथ ही इस कूप की मिट्टी का नमूना लिया है। माना जा रहा है कि कूप की मिट्टी से कार्बन डेटिंग की जाएगी। जिससे यह पता लग सके कि यह किस काल का बना हुआ है। एएसआई की टीम ने मोहल्ला कोटपूर्वी में स्थित प्राचीन कल्कि विष्णु मंदिर और चक्की के पाट का भी निरीक्षण किया है। इसके बाद टीम रवाना हो गई। हालांकि टीम की ओर से इस निरीक्षण या मिट्टी के नमूने को लेकर कोई जानकारी नहीं दी है। प्राचीन कल्कि विष्णु मंदिर के नजदीक ही ऋषिकेश कूप है। यह संभल के 19 कूप में शामिल हैं। जिन कूप का उल्लेख संभल महात्म्य पुस्तक में किया गया है। 68 तीर्थ और 19 कूप को वजूद में लाने के लिए प्रशासन ने पहल शुरू की थी। इसके अंतर्गत ही कूप और तीर्थ को चिह्नित करने का काम किया जा रहा है। संभल महात्म्य पुस्तक में जो नक्शा दर्शाया गया है वह संभल का त्रिकोणीय है। इस त्रिकोणीय नक्शे में इन तीर्थ और कूप का जिक्र किया गया है। इसी नक्शे के अनुसार तीर्थ और कूप अभी तक सामने आए हैं। ऋषिकेश कूप कल्कि विष्णु मंदिर के नजदीक है। एएसआई द्वारा इस कूप की कार्बन डेटिंग कर काल की जानकारी की जाएगी।
संभल महात्म्य पुस्तक को क्यों दिया जाता है महत्व
संभल महात्म्य भी स्कंद पुराण से संबंधित है। इस पुस्तक में वर्णित सभी 68 तीर्थ 19 कूपो की महत्ता, विशेषता, दर्शन, पूजन समेत संभल की आध्यात्मिक, सामाजिक और ऐतिहासिक महत्व की जानकारी देने वाला वाला ग्रंथ कहा जाता है।
कलियुग में भगवान कल्कि का अवतरण संभल में होगा
स्कंद पुराण में इसका उल्लेख मिलता है कि कलियुग में भगवान कल्कि का अवतरण संभल में होगा। संभल के प्राचीन कल्कि विष्णु मंदिर के महंत पंडित महेंद्र शर्मा का कहना है कि सदियों पहले कल्कि विष्णु मंदिर की स्थापना हुई थी। त्रिकोणीय आकार के नक्शे में मंदिर को दर्शाया गया है। महंत का कहना है कि वह लंबे समय से कल्कि विष्णु मंदिर को एएसआई के संरक्षण में लाने की मांग उठा रहे हैं। इस मंदिर में कई आकृतियां प्राचीन महत्व को जाहिर करती हैं। मंदिर के बाहर बने गुंबद की आकृति सुदर्शन चक्र की तरह है।
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एएसआई की टीम ने बृहस्पतिवार को मोहल्ला कोटपूर्वी स्थित ऋषिकेश कूप का निरीक्षण किया है। साथ ही इस कूप की मिट्टी का नमूना लिया है। माना जा रहा है कि कूप की मिट्टी से कार्बन डेटिंग की जाएगी। जिससे यह पता लग सके कि यह किस काल का बना हुआ है। एएसआई की टीम ने मोहल्ला कोटपूर्वी में स्थित प्राचीन कल्कि विष्णु मंदिर और चक्की के पाट का भी निरीक्षण किया है। इसके बाद टीम रवाना हो गई। हालांकि टीम की ओर से इस निरीक्षण या मिट्टी के नमूने को लेकर कोई जानकारी नहीं दी है। प्राचीन कल्कि विष्णु मंदिर के नजदीक ही ऋषिकेश कूप है। यह संभल के 19 कूप में शामिल हैं। जिन कूप का उल्लेख संभल महात्म्य पुस्तक में किया गया है। 68 तीर्थ और 19 कूप को वजूद में लाने के लिए प्रशासन ने पहल शुरू की थी। इसके अंतर्गत ही कूप और तीर्थ को चिह्नित करने का काम किया जा रहा है। संभल महात्म्य पुस्तक में जो नक्शा दर्शाया गया है वह संभल का त्रिकोणीय है। इस त्रिकोणीय नक्शे में इन तीर्थ और कूप का जिक्र किया गया है। इसी नक्शे के अनुसार तीर्थ और कूप अभी तक सामने आए हैं। ऋषिकेश कूप कल्कि विष्णु मंदिर के नजदीक है। एएसआई द्वारा इस कूप की कार्बन डेटिंग कर काल की जानकारी की जाएगी।
संभल महात्म्य पुस्तक को क्यों दिया जाता है महत्व
संभल महात्म्य भी स्कंद पुराण से संबंधित है। इस पुस्तक में वर्णित सभी 68 तीर्थ 19 कूपो की महत्ता, विशेषता, दर्शन, पूजन समेत संभल की आध्यात्मिक, सामाजिक और ऐतिहासिक महत्व की जानकारी देने वाला वाला ग्रंथ कहा जाता है।
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कलियुग में भगवान कल्कि का अवतरण संभल में होगा
स्कंद पुराण में इसका उल्लेख मिलता है कि कलियुग में भगवान कल्कि का अवतरण संभल में होगा। संभल के प्राचीन कल्कि विष्णु मंदिर के महंत पंडित महेंद्र शर्मा का कहना है कि सदियों पहले कल्कि विष्णु मंदिर की स्थापना हुई थी। त्रिकोणीय आकार के नक्शे में मंदिर को दर्शाया गया है। महंत का कहना है कि वह लंबे समय से कल्कि विष्णु मंदिर को एएसआई के संरक्षण में लाने की मांग उठा रहे हैं। इस मंदिर में कई आकृतियां प्राचीन महत्व को जाहिर करती हैं। मंदिर के बाहर बने गुंबद की आकृति सुदर्शन चक्र की तरह है।
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