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बारिश-धूप से बेनूर हो गया अमरोहवी आम
अमर उजाला/ ब्यूरोअमरोहा
Updated Sun, 31 Jul 2016 12:58 AM IST
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बारिश-धूप से बेनूर हो गया अमरोहवी आम
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बारिश और धूप से अमरोहवी आम बेनूर हो गया है। खूबसूरती की बजाय उस पर कालापन छा गया है। देखने में ही बदसूरत लग रहा है, जिससे उत्पादक परेशान हो गए हैं। विदेशियों ने भी खरीदने से हाथ खड़े कर दिए हैं। इस पर उत्पादकों ने अब आम को प्रदेश में ही खपाने के लिए तैयारी की है।
जिस आम की फसल को देखकर पहले उत्पादक गदगद थे, अब उस पर नजर डालते ही बेचैन हो जा रहे हैं। मौसम के बदलते मिजाज ने उसके सारे सपनों को तोड़ दिया है।
अच्छा मुनाफा नहीं बल्कि अब उत्पादक बचे आम को खपाने के लिए चिंतित हैं। कैसे भी हो, बस निकल जाए। यही सोचकर दौड़-भाग में लगा है। उत्पादकों की बात पर यकीन करें तो इस बार मौसम ने साथ नहीं दिया है। बारिश तो कभी तेज धूप ने आम की खूबसूरती को छीन लिया है। लंगड़ा व चौसा देखने में बदसूरत हो गए हैं।
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कालापन होने की वजह से खरीददार नहीं मिल रहे हैं। उत्पादक वसीम अहमद कहते हैं कि मौजूदा समय में लंगड़ा व चौसा ही रह गया है। जिस पर बरसात व धूप का ऐसा असर हुआ है कि खाने में तो ठीक है, लेकिन देखने में बिल्कुल खराब लग रहा है। इसलिए विदेशी भी अब उसको लेकर जाने के लिए तैयार नहीं है। प्रदेश में ही उसको खपाना मुश्किल हो रहा है।
जिस आम की फसल को देखकर पहले उत्पादक गदगद थे, अब उस पर नजर डालते ही बेचैन हो जा रहे हैं। मौसम के बदलते मिजाज ने उसके सारे सपनों को तोड़ दिया है।
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अच्छा मुनाफा नहीं बल्कि अब उत्पादक बचे आम को खपाने के लिए चिंतित हैं। कैसे भी हो, बस निकल जाए। यही सोचकर दौड़-भाग में लगा है। उत्पादकों की बात पर यकीन करें तो इस बार मौसम ने साथ नहीं दिया है। बारिश तो कभी तेज धूप ने आम की खूबसूरती को छीन लिया है। लंगड़ा व चौसा देखने में बदसूरत हो गए हैं।
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कालापन होने की वजह से खरीददार नहीं मिल रहे हैं। उत्पादक वसीम अहमद कहते हैं कि मौजूदा समय में लंगड़ा व चौसा ही रह गया है। जिस पर बरसात व धूप का ऐसा असर हुआ है कि खाने में तो ठीक है, लेकिन देखने में बिल्कुल खराब लग रहा है। इसलिए विदेशी भी अब उसको लेकर जाने के लिए तैयार नहीं है। प्रदेश में ही उसको खपाना मुश्किल हो रहा है।