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Amroha News: ट्रेड शो में अमरोहा के शहद-कुकीज की विदेशों में धूम, मिले ऑर्डर
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अमरोहा। जिले के ग्रामीण उद्योग और कृषि आधारित उत्पाद अब स्थानीय बाजार से निकलकर अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपनी पहचान बनाई है। ग्रेटर नोएडा में चल रहे यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो में जिले के किसान उत्पादक संगठन के प्राकृतिक शहद और मिलेट्स कुकीज विदेशी खरीदारों को खूब पसंद आई। स्टॉल पर प्रदर्शित किसान वेदा ब्रांड के उत्पादों की खरीद के लिए 30 से 35 संस्थागत खरीदारों ने संपर्क किया है।
उद्योग उपायुक्त अनूप कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि नीम-मोरिंगा शहद को ओमान, जापान और नीदरलैंड के खरीदारों ने सराहा। नीदरलैंड के खरीदारों ने टन के हिसाब से आपूर्ति में रुचि दिखाई और शुरुआती 1000 से 1500 बोतलों के बैच पर सहमति बनी है। इटली के खरीदारों ने ज्वार और रागी की कुकीज के लिए 1600 से 2000 रुपये प्रति किलो की दर पर करार किया है।
ट्रेड शो के शुरुआती चार दिनों में 150 से अधिक उपभोक्ताओं ने स्टॉल से करीब 25 हजार रुपये के उत्पाद खरीदे। एफपीओ से 120 हेक्टेयर में बहुफसली खेती से जुड़ी करीब एक हजार महिलाओं के उत्पादों को भी बाजार मिला है। इससे कृषि प्रसंस्करण, महिला उद्यमिता और ग्रामीण उद्योग को वैश्विक बाजार मिलने की उम्मीद जगी है।
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घरेलू कंपनियों और स्थानीय खरीदारों में भी होड़
ट्रेड शो में अमरोहा के उत्पादों को विदेशी खरीदारों के साथ घरेलू कंपनियों और स्थानीय ग्राहकों का भी अच्छा रिस्पॉन्स मिला है। बीटूबी सत्र में बागपत के प्रमुख एफपीओ और डॉक्टर मोरिंगा समेत करीब 10 से 15 कंपनियों व एफपीओ ने उत्पादों की आपूर्ति को लेकर चर्चा की है। नोएडा और दिल्ली-एनसीआर से पहुंचे परिवारों ने भी स्टॉल पर खरीदारी की। कई ग्राहकों ने उत्पादों का स्वाद लेने के बाद दोबारा बड़े ऑर्डर और स्थानीय स्तर पर डिलीवरी की मांग की। ट्रेड शो में मिले रिस्पॉन्स के बाद दीपावली के लिए कॉर्पोरेट और घरेलू ग्राहकों से अग्रिम ऑर्डर मिलने शुरू हो गए हैं।
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120 हेक्टेयर में ताइवान पिंक अमरूद और मल्टी क्रॉपिंग
हितेश चौधरी के अनुसार एफपीओ से करीब 3000 किसान और 1000 ग्रामीण महिलाएं जुड़ी हैं। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के गन्ना क्षेत्र में फसल विविधीकरण को बढ़ावा देते हुए कोलकाता से टिश्यू कल्चर पौधे मंगाकर 120 हेक्टेयर में एडवांस ताइवान पिंक अमरूद की खेती कराई गई है। किसानों की आय बढ़ाने के लिए गन्ने के साथ अमरूद, मोरिंगा, गेहूं और रागी-ज्वार जैसे मिलेट्स की बहुफसली खेती पर जोर दिया। किसानों को बिचौलियों से बचाने के लिए एफपीओ खुद खरीद करता है। इससे किसानों को बाजार भाव से बेहतर दाम मिलने और कृषि आधारित ग्रामीण उद्योग को मजबूत करने में मदद मिल रही है।
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शुरुआती दौर में पशुओं को खिलाने पड़े उत्पाद, अब सालाना 50 लाख का कारोबार
हितेश चौधरी ने वर्ष 2020 में एनआरएलएम के तहत महिला स्वयं सहायता समूह बनाकर गन्ने की सिंगल बड चिप नर्सरी और गोबर के दीपक बनाने से शुरुआत की। 17 अप्रैल 2021 को बिना बाहरी सरकारी फंड के निजी एफपीओ स्थापित किया। शुरुआती दौर में बाजार न मिलने से 10-10 पैकेट में तैयार किए गए उत्पाद भी नहीं बिकते थे और कई बार उन्हें पशुओं को खिलाना पड़ता था। तानों और मुश्किलों के बावजूद काम जारी रखा। अब एफपीओ का सालाना कारोबार करीब 50 लाख रुपये पहुंच गया है। इस वित्तीय वर्ष में एक करोड़ रुपये का कारोबार पार करने का लक्ष्य है।
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सरकारी मंचों से मिला संबल, अब मोरिंगा बर्फी और हल्दी अचार की तैयारी
कृषि विभाग, नमामि गंगे और परंपरागत कृषि विकास योजना के क्लस्टरों के माध्यम से हितेश चौधरी किसानों और महिला समूहों को प्राकृतिक खेती का प्रशिक्षण देती रही हैं। ट्रेड शो में मिले उत्साह के बाद अब मोरिंगा के लड्डू, बर्फी और कस्तूरी, काली व सुगंधा हल्दी से तैयार उत्पाद बाजार में उतारने की तैयारी है। इनमें हल्दी का विशेष अचार भी शामिल है। किसान वेदा नाम से वेबसाइट और फेसबुक, इंस्टाग्राम व यूट्यूब के माध्यम से ऑनलाइन बाजार बढ़ाया जा रहा है। इससे ग्रामीण महिलाओं और किसानों के उत्पादों को अमरोहा से बाहर नए बाजार मिलने की संभावनाएं बढ़ी हैं।
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यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो हमारे एफपीओ के लिए बड़ा अवसर साबित हुआ है। कृषि विभाग के सहयोग से मिले स्टॉल के जरिए विदेशी खरीदारों तक सीधे पहुंच बनी। कभी 10-10 पैकेट बेचने में भी दिक्कत होती थी, आज इटली, ओमान, जापान और नीदरलैंड से शहद और कुकीज के ऑर्डर मिल रहे हैं। इससे साबित होता है कि सही मंच मिलने पर ग्रामीण किसान और महिलाएं अपने उत्पादों को वैश्विक बाजार तक पहुंचा सकते हैं।
— हितेश चौधरी, संस्थापक, प्रखंड बायो एनर्जी एफपीओ (किसान वेदा)
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उद्योग उपायुक्त अनूप कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि नीम-मोरिंगा शहद को ओमान, जापान और नीदरलैंड के खरीदारों ने सराहा। नीदरलैंड के खरीदारों ने टन के हिसाब से आपूर्ति में रुचि दिखाई और शुरुआती 1000 से 1500 बोतलों के बैच पर सहमति बनी है। इटली के खरीदारों ने ज्वार और रागी की कुकीज के लिए 1600 से 2000 रुपये प्रति किलो की दर पर करार किया है।
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ट्रेड शो के शुरुआती चार दिनों में 150 से अधिक उपभोक्ताओं ने स्टॉल से करीब 25 हजार रुपये के उत्पाद खरीदे। एफपीओ से 120 हेक्टेयर में बहुफसली खेती से जुड़ी करीब एक हजार महिलाओं के उत्पादों को भी बाजार मिला है। इससे कृषि प्रसंस्करण, महिला उद्यमिता और ग्रामीण उद्योग को वैश्विक बाजार मिलने की उम्मीद जगी है।
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घरेलू कंपनियों और स्थानीय खरीदारों में भी होड़
ट्रेड शो में अमरोहा के उत्पादों को विदेशी खरीदारों के साथ घरेलू कंपनियों और स्थानीय ग्राहकों का भी अच्छा रिस्पॉन्स मिला है। बीटूबी सत्र में बागपत के प्रमुख एफपीओ और डॉक्टर मोरिंगा समेत करीब 10 से 15 कंपनियों व एफपीओ ने उत्पादों की आपूर्ति को लेकर चर्चा की है। नोएडा और दिल्ली-एनसीआर से पहुंचे परिवारों ने भी स्टॉल पर खरीदारी की। कई ग्राहकों ने उत्पादों का स्वाद लेने के बाद दोबारा बड़े ऑर्डर और स्थानीय स्तर पर डिलीवरी की मांग की। ट्रेड शो में मिले रिस्पॉन्स के बाद दीपावली के लिए कॉर्पोरेट और घरेलू ग्राहकों से अग्रिम ऑर्डर मिलने शुरू हो गए हैं।
120 हेक्टेयर में ताइवान पिंक अमरूद और मल्टी क्रॉपिंग
हितेश चौधरी के अनुसार एफपीओ से करीब 3000 किसान और 1000 ग्रामीण महिलाएं जुड़ी हैं। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के गन्ना क्षेत्र में फसल विविधीकरण को बढ़ावा देते हुए कोलकाता से टिश्यू कल्चर पौधे मंगाकर 120 हेक्टेयर में एडवांस ताइवान पिंक अमरूद की खेती कराई गई है। किसानों की आय बढ़ाने के लिए गन्ने के साथ अमरूद, मोरिंगा, गेहूं और रागी-ज्वार जैसे मिलेट्स की बहुफसली खेती पर जोर दिया। किसानों को बिचौलियों से बचाने के लिए एफपीओ खुद खरीद करता है। इससे किसानों को बाजार भाव से बेहतर दाम मिलने और कृषि आधारित ग्रामीण उद्योग को मजबूत करने में मदद मिल रही है।
शुरुआती दौर में पशुओं को खिलाने पड़े उत्पाद, अब सालाना 50 लाख का कारोबार
हितेश चौधरी ने वर्ष 2020 में एनआरएलएम के तहत महिला स्वयं सहायता समूह बनाकर गन्ने की सिंगल बड चिप नर्सरी और गोबर के दीपक बनाने से शुरुआत की। 17 अप्रैल 2021 को बिना बाहरी सरकारी फंड के निजी एफपीओ स्थापित किया। शुरुआती दौर में बाजार न मिलने से 10-10 पैकेट में तैयार किए गए उत्पाद भी नहीं बिकते थे और कई बार उन्हें पशुओं को खिलाना पड़ता था। तानों और मुश्किलों के बावजूद काम जारी रखा। अब एफपीओ का सालाना कारोबार करीब 50 लाख रुपये पहुंच गया है। इस वित्तीय वर्ष में एक करोड़ रुपये का कारोबार पार करने का लक्ष्य है।
सरकारी मंचों से मिला संबल, अब मोरिंगा बर्फी और हल्दी अचार की तैयारी
कृषि विभाग, नमामि गंगे और परंपरागत कृषि विकास योजना के क्लस्टरों के माध्यम से हितेश चौधरी किसानों और महिला समूहों को प्राकृतिक खेती का प्रशिक्षण देती रही हैं। ट्रेड शो में मिले उत्साह के बाद अब मोरिंगा के लड्डू, बर्फी और कस्तूरी, काली व सुगंधा हल्दी से तैयार उत्पाद बाजार में उतारने की तैयारी है। इनमें हल्दी का विशेष अचार भी शामिल है। किसान वेदा नाम से वेबसाइट और फेसबुक, इंस्टाग्राम व यूट्यूब के माध्यम से ऑनलाइन बाजार बढ़ाया जा रहा है। इससे ग्रामीण महिलाओं और किसानों के उत्पादों को अमरोहा से बाहर नए बाजार मिलने की संभावनाएं बढ़ी हैं।
यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो हमारे एफपीओ के लिए बड़ा अवसर साबित हुआ है। कृषि विभाग के सहयोग से मिले स्टॉल के जरिए विदेशी खरीदारों तक सीधे पहुंच बनी। कभी 10-10 पैकेट बेचने में भी दिक्कत होती थी, आज इटली, ओमान, जापान और नीदरलैंड से शहद और कुकीज के ऑर्डर मिल रहे हैं। इससे साबित होता है कि सही मंच मिलने पर ग्रामीण किसान और महिलाएं अपने उत्पादों को वैश्विक बाजार तक पहुंचा सकते हैं।
— हितेश चौधरी, संस्थापक, प्रखंड बायो एनर्जी एफपीओ (किसान वेदा)