Amroha: ट्रक चालक के मोबाइल नंबर का बनाया क्लोन व्हाट्सएप, तीस हजार हड़पे... पीड़ित को पता चला तो उड़े होश
अमरोहा निवासी चंचल का मुरादाबाद के ट्रक चालक अनस से जान पहचान थी। साइबर ठग ने असन के व्हाट्सएप नंबर का क्लोन बनाकर चंचल को मैसेज भेज तीस हजार रुपये मांगे। चंचल ने बताए नंबर पर पैसे भेज दिए। जब फोन पर बात की तो ठगी का पता चला।
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अमरोहा में साइबर ठग अलग-अलग तरीके अपनाकर लोगों को ठगी का शिकार बना रहे हैं। अब मुरादाबाद के ट्रक चालक के मोबाइल नंबर से क्लोन व्हाट्सएप बनाकर उसके अमरोहा निवासी परिचित से 30 हजार रुपये अपने खाते में ट्रांसफर करा लिए। हकीकत का पता चला तो पीड़ित के होश उड़ गए। कोतवाली में तहरीर देकर कार्रवाई की मांग की है।
अमरोहा नगर के मोहल्ला चौक में चंचल सक्सेना का परिवार रहता है। मुरादाबाद जनपद के मैनाठेर थानाक्षेत्र के गांव ताहरपुर निवासी अनस से उनकी जान पहचान थी। मंगलवार को चंचल सक्सेना के व्हाट्सएप पर ट्रक चालक अनस के व्हाट्सएप नंबर से संदेश आया। भेजने वाले ने खुद को अनस बताया और कहा कि वह परेशानी में फंसा हुआ है।
इसलिए 30 हजार रुपये की सख्त जरूरत है। जल्दी ही लौटा देगा। चंचल सक्सेना और अनस के बीच अच्छी जान पहचान थी। इसलिए व्हाट्सएप के माध्यम से रुपये मांगने पर उन्होंने विश्वास कर लिया। लिहाजा चंचल सिंह ने तीन बार में दस-दस हजार रुपये करके साइबर ठग के बताए नंबर पर ट्रांसफर कर दिए।
करीब एक घंटे बाद उन्होंने अपने परिचित अनस को कॉल करके रुपये मिलने के बारे में पूछा तो ठगी से पर्दा उठ गया। अनस ने बताया कि किसी ने उसके व्हाट्सएप का क्लोन बना लिया है। उसने कोई पैसा नहीं लिया। अगर जरूरत होती तो वह फोन करके बता देता। यह सुनकर चंचल सिंह के होश उड़ गए। उन्होंने नगर कोतवाली में तहरीर देकर कार्रवाई की मांग की है।
साइबर ठग ने रिटायर्ड शिक्षक को बनाया शिकार
जलाल नगर मोहल्ला निवासी कमरुद्दीन सेवानिवृत्त शिक्षक हैं। बीते साल नवंबर में उन्होंने कृषि विभाग से अनुदान पर मिल रहे रूटावेटर व गेहूं बोने की मशीन के लिए आवेदन किया। उनको बताया गया कि कृषि यंत्र पर 50 प्रतिशत की छूट मिलेगी। सात जनवरी को उनके फोन पर कॉल आई।
फोन करने वाले ने खुद को कृषि विभाग लखनऊ कार्यालय का बाबू बताया। कहा कि वह तीन बाबू हैं। तीनों की वजह से ही सेवानिवृत्त शिक्षक कमरुद्दीन व उनकी पत्नी हसमु बेगम का आवेदन स्वीकार किया गया है। जल्द ही उनको रूटावेटर व गेहूं बोने की मशीन मिलेगी, लेकिन इसके लिए तीनों बाबुओं को दावत चाहिए।
दावत में क्या चाहिए पूछने पर चार हजार रुपये की मांग रखी। बाद में शिक्षक तीन हजार रुपये देने के लिए तैयार हो गए। उन्होंने साइबर कैफे पर जाकर तीन हजार रुपये उनके बताए मोबाइल पर भेज दिए। बाद में उन्हें ठगी का एहसास हुआ। वह बुधवार की सुबह थाने पहुंचे और पुलिस को घटना की तहरीर दी।