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UP Double Murder: खादर की जमीन पर पैदा होती है रंजिश की फसल, मालिकाना हक को लेकर पहले भी हुआ खूनी खेल

Thu, 12 Oct 2023 02:06 PM IST
शाहरुख खान अमर उजाला नेटवर्क, अमरोहा
अमर उजाला नेटवर्क, अमरोहा Published by: शाहरुख खान Updated Thu, 12 Oct 2023 02:06 PM IST
सार

गजरौला के गुलालपुर में फार्म हाउस मालिका अनिरुद्ध व रतनपाल की हत्या की वजह को जमीनी विवाद से भी जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि, अभी पुलिस मामले की जांच पड़ताल कर रही है। वहीं गजरौला के अलावा मंडी धनौरा तहसील क्षेत्र में वन विभाग की जमीन गंगा के दोनों तरफ है। ऐसा सामने आता रहा है कि वन विभाग व राजस्व अधिकारी-कर्मचारी मोटी रकम वसूल कर भू माफिया का कब्जा कराते हैं। 

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Amroha News Double Murder crop of rivalry grows on the land of Khadar Gajraula
Double Murder - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

अमरोहा के गजरौला में गंगा किनारे खादर क्षेत्र की जमीन पर वन विभाग, राजस्व विभाग और माफिया की मिलीभगत से करोड़ों का खेल होता है। यहां एक बार नहीं कई बार मालिकाना हक के लिए खूनी खेल हो चुका है। अधिकारियों और माफिया की मिलीभगत से यहां की जमीन पर रंजिश की फसल भी तैयार होती है और खूनी खेल खिलता है।
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गजरौला के गुलालपुर में फार्म हाउस मालिका अनिरुद्ध व रतनपाल की हत्या की वजह को जमीनी विवाद से भी जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि, अभी पुलिस मामले की जांच पड़ताल कर रही है। वहीं गजरौला के अलावा मंडी धनौरा तहसील क्षेत्र में वन विभाग की जमीन गंगा के दोनों तरफ है। 
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ऐसा सामने आता रहा है कि वन विभाग व राजस्व अधिकारी-कर्मचारी मोटी रकम वसूल कर भू माफिया का कब्जा कराते हैं। साठगांठ हो जाने पर भू माफिया आस पास के किसानों की भूमि पर भी कब्जा कर फसलों की बुवाई करते हैं। जिसका खेत मालिकों द्वारा विरोध करने पर उनके साथ मारपीट तक की जाती है। गंगा की रेती फायरिंग से दहल उठती है। 
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करोड़ों रुपये की फसल काटने के लिए खूनी खेल शुरू हो जाता है। बीते 12 सितंबर को ही डीएम ने तिगरी में सरकारी भूमि पर कब्जा पकड़ा। डीएम राजेश कुमार त्यागी ने तिगरी व मोहरका पट्टी के बीच 2000 क्षमता का केवल सांड़ों के संरक्षण के लिए बनाए जाने वाले नंदी विहार की जमीन का निरीक्षण किया। 

डीएम ने लेखपाल से नक्शे के आधार पर जानकारी ली थी कि कहां पर कितनी जमीन किसके नाम दर्ज है। एक-एक गाटा संख्या को देखने में सामने आया था कि वन विभाग की भूमि पर पूर्व प्रधान मोहरका पट्टी नारायण सिंह, राजेंद्र सिंह, जाफर अहमद, जमील अहमद का अवैध रूप से कब्जा है। 

 

पूर्व ग्राम प्रधान नारायण सिंह ने सरकारी कब्जा कर 4000 रुपये प्रति बीघा के हिसाब से छह महीने के लिए किसानों को ठेके पर दी गई थी। यह काम वह 25 साल से कर रहे थे। डीएम ने मौके पर जानकारी की तो पता चला था कि रेंजर ने कार्रवाई से बचने के लिए नंबर बंद कर लिया है। 

 

डीएम की डांट फटकार के बाद वन दरोगा राकेश कुमार ने थाना गजरौला में पूर्व ग्राम प्रधान नारायण सिंह, राजेंद्र सिंह, जफर अहमद, जमील अहमद सहित आठ आरोपियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी।

तीन जिलों से लगती है अमरोहा के गांवों की सीमा
अमरोहा जिले में गंगा करीब 90 किमी की लंबाई में प्रवाहित होती है। हसनपुर व मंडी धनौरा तहसील के सौ से अधिक गांव गंगा किनारे हैं। दक्षिण दिशा में धनौरा ब्लॉक क्षेत्र के गांवों के सामने मेरठ जिले की मवाना तहसील, गजरौला ब्लॉक क्षेत्र के गांव लठीरा, तिगरी, कांकाठेर, मोहम्मदाबाद, कबीरपुर के सामने हापुड़ जिले की गढ़मुक्तेश्वर तहसील क्षेत्र के गांव पड़ते हैं।

इसी तरह हसनपुर तहसील क्षेत्र के दयावली खालसा, धौरिया, बिड़ला से लेकर सतैड़ा, श्यामपुरी और गंगेश्वरी की पिपलौती, सिरसा गुर्जर के सामने भी हापुड़ जिले के गढ़मुक्तेश्वर तहसील क्षेत्र के गांव आते हैं।

जबकि गंगेश्वरी की जयतौली, जेबड़ा, शहवाजपुर गुर्जर, देहरी गुर्जर, जल्लोपुर, नानई, विरामपुर, बिहारीपुर, चीला, पौरारा, मुबारिजपुर आदि गांवों और ग्राम पंचायतों के सामने बुलंदशहर जिले की स्याना तहसील क्षेत्र से लेकर अनूपशहर के गांव पड़ते हैं। गंगा की जल धारा का रुख हर साल बदलता रहता है। कभी इधर तो कभी उधर हो जाती है। जिस पर कब्जे के लिए हर साल खूनी खेल होता है।

भू-माफिया के कब्जे से मुक्त कराई थी 300 हेक्टेयर जमीन
भू-माफिया गंगा पार की जमीन पर किस कदर कब्जा कर खेतीबाड़ी करते हैं, इसका अनुमान इसी से लगाया जा सकता है कि कई दशक पूर्व तीन गांवों के रकबे में उन्होंने 300 हेक्टेयर भूमि पर कब्जा कर लिया था। बीते साल मामला शासन तक पहुंचा तो अधिकारी व कर्मचारी हरकत में आए। एडीएम वित्त एवं राजस्व, एडीएम न्यायिक, तहसीलदार ने सीओ के नेतृत्व में थाना पुलिस को साथ लेकर भूमि को कब्जा मुक्त कराया। यह जमीन जलालपुर एहतमाली, जलाल नगर उर्फ राय अंदाजपुर और बसंतपुर गांव के जंगल में थी।
 
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