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सौ साल बाद अक्षय तृतीया पर नहीं बजेगी शहनाई
ब्यूरो/अमर उजाला अमरोहा
Updated Wed, 27 Apr 2016 12:40 AM IST
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mantra japa
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100 साल बाद ऐसा संयोग आया है कि, अबूझ मुहूर्त माने जाने वाले अक्षय तृतीया पर भी शहनाई नहीं बजेगी। ज्योतिर्विदों के मुताबिक विवाह और दांपत्य संबंधों का मुख्य कारक ग्रह शुक्र के अस्त होने से 9 मई को पड़ने वाली अक्षय तृतीया पर विवाह का मुहूर्त नहीं है। इसलिए इस अबूझ मुहूर्त में विवाह करने का सपना संजोने वालों को इस साल निराशा हाथ लगेगी। अब उन्हें शुभ मुहूर्त के लिए और इंतजार करना पड़ेगा।
वैशाख मास में शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को अक्षय तृतीया कहा जाता है। इस तिथि पर सभी कार्य शुभ माने जाते हैं, लेकिन इस साल 2 मई को शुक्र अस्त हो जाएगा, उसके बाद सीधे 2 जुलाई को शुक्र का उदय होगा। विद्वानों के मुताबिक इस बीच वैवाहिक और मांगलिक कार्य नहीं किया जा सकता। इसी बीच 9 मई को अक्षय तृतीया भी पड़ रही है।
इस तिथि को भी शुभ काम नहीं हो सकेगा। पंडित प्रमोद कुमार शर्मा ने बताया कि मई और जून में इस बार शादी के लिए कोई भी मुहूर्त नहीं है। इससे पहले 29 अप्रैल को ही आखिरी मुहूर्त है, उसके बाद 7 जुलाई को शुभ कार्य के लिए पहला मुहूर्त होगा। 15 जुलाई यानी आषाढ़ शुक्ल एकादशी से भगवान फिर सो जाएंगे।
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इसके साथ ही चतुर्मास शुरू हो जाएगा। इसलिए 15 जुलाई से 10 नवंबर तक फिर शादी की बंदिश ही रहेगी। इसके बाद 11 नवंबर को देवोत्थान एकादशी होगी। इस दिन से फिर शुभकार्य शुरू हो जाएंगे।
शुक्र अस्त होने पर क्षय हो जाता है फल
ज्योतिषाचार्य पंडित आशुतोष त्रिवेदी का कहना है कि अक्षया तृतीया ऐसी तिथि जरूर है जिस दिन मुहूर्त पूरी तरह न मिलने पर विवाह हो सकता है, लेकिन शुक्र अस्त होने के कारण अक्षता तृतीया का फल भी क्षय हो जाता है। ऐसा शास्त्र कहते हैं।
अक्षय तृतीया का पौराणिक महत्व
अमरोहा (ब्यूरो)। अक्षय तृतीया को कई वजहों से महत्वपूर्ण माना गया है। एक मान्यता है कि ब्रह्मा ने इस दिन सृष्टि की रचना की इसलिए यह दिन सर्वाधिक शुभ और पवित्र है। एक अन्य मान्यता है कि सतयुग का आरंभ अक्षय तृतीया से हुआ। अक्षय तृतीया की महत्व इसलिए भी है कि इसी दिन भगवान बदरीनाथ धाम के कपाट खुलते हैं।
इस पवित्र तिथि के बारे में कहा जाता है कि इस दिन किए गए पुण्य और धार्मिक कार्य का कभी क्षय अर्थात नाश नहीं होता शादी-ब्याह और अन्य मांगलिक कार्यों के लिए इस तिथि को स्वयंसिद्धा भी कहा जाता है। पूरी तिथि ही पवित्र होती है। विशेष घड़ी या मुहूर्त देखने की आवश्यकता नहीं होती।
छह माह तक बाजार पर मंडराएंगे मंदी के बादल
अमरोहा (ब्यूरो)। शादी-ब्याह के मुहूर्त का बाजार पर खासा असर पड़ता है। शादी के लिए हर छोटी से बड़ी वस्तु की खरीदारी की जाती है। कपड़े, ज्वैलरी, सौंदर्य प्रसाधन, खान-पान, टेंट, बैंक्वेट हाल, धर्मशाला, वाहन आदि के इंतजाम करने होते हैं। इसके लिए काफी पहले से तैयारियां शुरू हो जाती हैं।
इससे कारोबार भी बढ़ता है, लेकिन इस बार तकरीबन छह माह तक मुहूर्त नहीं होने से बाजार पर विपरीत प्रभाव पड़ने के आसार हैं। गौरतलब है कि, 29 अप्रैल को शादी का आखिरी मुहूर्त है। उसके बाद 7 जुलाई से 14 जुलाई तक ही शादियां होंगी। 15 जुलाई से 10 नवंबर तक कोई शादी नहीं होगी। यानी छह माह तक बाजार में मायूसी रहेगी।
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वैशाख मास में शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को अक्षय तृतीया कहा जाता है। इस तिथि पर सभी कार्य शुभ माने जाते हैं, लेकिन इस साल 2 मई को शुक्र अस्त हो जाएगा, उसके बाद सीधे 2 जुलाई को शुक्र का उदय होगा। विद्वानों के मुताबिक इस बीच वैवाहिक और मांगलिक कार्य नहीं किया जा सकता। इसी बीच 9 मई को अक्षय तृतीया भी पड़ रही है।
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इस तिथि को भी शुभ काम नहीं हो सकेगा। पंडित प्रमोद कुमार शर्मा ने बताया कि मई और जून में इस बार शादी के लिए कोई भी मुहूर्त नहीं है। इससे पहले 29 अप्रैल को ही आखिरी मुहूर्त है, उसके बाद 7 जुलाई को शुभ कार्य के लिए पहला मुहूर्त होगा। 15 जुलाई यानी आषाढ़ शुक्ल एकादशी से भगवान फिर सो जाएंगे।
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इसके साथ ही चतुर्मास शुरू हो जाएगा। इसलिए 15 जुलाई से 10 नवंबर तक फिर शादी की बंदिश ही रहेगी। इसके बाद 11 नवंबर को देवोत्थान एकादशी होगी। इस दिन से फिर शुभकार्य शुरू हो जाएंगे।
शुक्र अस्त होने पर क्षय हो जाता है फल
ज्योतिषाचार्य पंडित आशुतोष त्रिवेदी का कहना है कि अक्षया तृतीया ऐसी तिथि जरूर है जिस दिन मुहूर्त पूरी तरह न मिलने पर विवाह हो सकता है, लेकिन शुक्र अस्त होने के कारण अक्षता तृतीया का फल भी क्षय हो जाता है। ऐसा शास्त्र कहते हैं।
अक्षय तृतीया का पौराणिक महत्व
अमरोहा (ब्यूरो)। अक्षय तृतीया को कई वजहों से महत्वपूर्ण माना गया है। एक मान्यता है कि ब्रह्मा ने इस दिन सृष्टि की रचना की इसलिए यह दिन सर्वाधिक शुभ और पवित्र है। एक अन्य मान्यता है कि सतयुग का आरंभ अक्षय तृतीया से हुआ। अक्षय तृतीया की महत्व इसलिए भी है कि इसी दिन भगवान बदरीनाथ धाम के कपाट खुलते हैं।
इस पवित्र तिथि के बारे में कहा जाता है कि इस दिन किए गए पुण्य और धार्मिक कार्य का कभी क्षय अर्थात नाश नहीं होता शादी-ब्याह और अन्य मांगलिक कार्यों के लिए इस तिथि को स्वयंसिद्धा भी कहा जाता है। पूरी तिथि ही पवित्र होती है। विशेष घड़ी या मुहूर्त देखने की आवश्यकता नहीं होती।
छह माह तक बाजार पर मंडराएंगे मंदी के बादल
अमरोहा (ब्यूरो)। शादी-ब्याह के मुहूर्त का बाजार पर खासा असर पड़ता है। शादी के लिए हर छोटी से बड़ी वस्तु की खरीदारी की जाती है। कपड़े, ज्वैलरी, सौंदर्य प्रसाधन, खान-पान, टेंट, बैंक्वेट हाल, धर्मशाला, वाहन आदि के इंतजाम करने होते हैं। इसके लिए काफी पहले से तैयारियां शुरू हो जाती हैं।
इससे कारोबार भी बढ़ता है, लेकिन इस बार तकरीबन छह माह तक मुहूर्त नहीं होने से बाजार पर विपरीत प्रभाव पड़ने के आसार हैं। गौरतलब है कि, 29 अप्रैल को शादी का आखिरी मुहूर्त है। उसके बाद 7 जुलाई से 14 जुलाई तक ही शादियां होंगी। 15 जुलाई से 10 नवंबर तक कोई शादी नहीं होगी। यानी छह माह तक बाजार में मायूसी रहेगी।