{"_id":"67bcd1cf521413f53009ebfd","slug":"after-the-wish-of-getting-a-daughter-was-fulfilled-a-couple-from-bahjoi-has-been-bringing-kanwar-for-the-last-five-years-jpnagar-news-c-284-1-jpn1001-134965-2025-02-25","type":"story","status":"publish","title_hn":"Amroha News: बिटियां के जन्म की मन्नत पूरी होने पर पांच साल से कांवड़ ला रहे बहजोई के दंपती","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Amroha News: बिटियां के जन्म की मन्नत पूरी होने पर पांच साल से कांवड़ ला रहे बहजोई के दंपती
Tue, 25 Feb 2025 01:38 AM IST
मुरादाबाद ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अमरोहा
संवाद न्यूज एजेंसी, अमरोहा
Updated Tue, 25 Feb 2025 01:38 AM IST
विज्ञापन
बेटी पैदा होने की मन्नत पूरी होने पर हरिद्वार से कांवड़ लाते दंपति। संवाद
अमरोहा।
एक तरफ जहां कुछ लोग बेटियों के पैदा होने से पहले ही कोख में मार देते हैं, उनके जन्म को स्वीकार नहीं करते। ऐसी सोच रखने वाले लोगों के लिए बहजोई निवासी दंपती व बुलंदशहर जिले के रहने वाला पिता एक मिसाल हैं।
बेटी के जन्म की मन्नत पूरी हुई तो बहजोई निवासी अवनीष राघव व उनकी पत्नी साक्षी राघव ने हर साल हरिद्वार से कांवड़ लाकर भगवान शिव का जलाभिषेक करने का फैसला किया। करीब पांच साल से दोनों इस परंपरा को निभा रहे हैं। इतना ही नहीं बेटी दरोगा बनने से खुश बुलंदशहर निवासी लोकेंद्र सिंह भी हरिद्वार से गंगाजल ला रहे है।
किसी ने सही कहा है... आज के युग में बेटों से कहीं ज्यादा माता-पिता को अपनी बेटियों पर भरोसा हैं। कांवड़ यात्रा में कई कांवड़िये ऐसे मिले, जो मन्नत पूरी होने पर हरिद्वार से कांवड़ में गंगाजल ला रहे हैं। ऐसे लोगों से समाज के उन लोगों को कुछ सीखने की जरूरत है, जो बेटियों को बोझ मानते हैं और गर्भ में ही उनकी हत्या करा देते हैं। वहीं, कांवड़ यात्रा में ऐसे दंपती और पिता मिले, जो अपनी बेटियों की कुशलता और उनकी नौकरी के लिए कांवड़ लेकर आ रहे हैं।
विज्ञापन
फाल्गुन और सावन में लाते है कांवड़
- संभल के बहजोई क्षेत्र के रहने वाले अवनीष राघव और उनकी पत्नी साक्षी राघव हरिद्वार से पैदल कांवड़ लेकर आए हैं। उन्होंने बताया कि शादी के बाद एक बेटा हुआ था, लेकिन घर में बेटी की कमी थी। तीन साल तक बेटी नहीं हुई, लेकिन भगवान शिव पार्वती से मन्नत मांगी तो बेटी ने जन्म लिया। इसी खुशी में पिछले पांच सालों से फाल्गुन और सावन माह में कांवड़ ला रहे हैं।
बेटी की नौकरी के लिए मांगी थी मन्नत
बुलंदशहर के रहने वाले लोकेंद्र सिंह ने बताया कि वह किसान हैं। बेटी पिछले दो सालों से यूपी एसआई की भर्ती की तैयारी कर रही थी। बेटी की भर्ती के लिए मन्नत मांगी थी। बेटी 2024 में दारोगा बन गई है। भगवान शिव में बहुत शक्ति है, बेटी के लिए गई मांगी मन्नत पूरी होने पर हरिद्वार से कांवड़ लेकर आ रहा हूं।
विज्ञापन
एक तरफ जहां कुछ लोग बेटियों के पैदा होने से पहले ही कोख में मार देते हैं, उनके जन्म को स्वीकार नहीं करते। ऐसी सोच रखने वाले लोगों के लिए बहजोई निवासी दंपती व बुलंदशहर जिले के रहने वाला पिता एक मिसाल हैं।
बेटी के जन्म की मन्नत पूरी हुई तो बहजोई निवासी अवनीष राघव व उनकी पत्नी साक्षी राघव ने हर साल हरिद्वार से कांवड़ लाकर भगवान शिव का जलाभिषेक करने का फैसला किया। करीब पांच साल से दोनों इस परंपरा को निभा रहे हैं। इतना ही नहीं बेटी दरोगा बनने से खुश बुलंदशहर निवासी लोकेंद्र सिंह भी हरिद्वार से गंगाजल ला रहे है।
विज्ञापन
किसी ने सही कहा है... आज के युग में बेटों से कहीं ज्यादा माता-पिता को अपनी बेटियों पर भरोसा हैं। कांवड़ यात्रा में कई कांवड़िये ऐसे मिले, जो मन्नत पूरी होने पर हरिद्वार से कांवड़ में गंगाजल ला रहे हैं। ऐसे लोगों से समाज के उन लोगों को कुछ सीखने की जरूरत है, जो बेटियों को बोझ मानते हैं और गर्भ में ही उनकी हत्या करा देते हैं। वहीं, कांवड़ यात्रा में ऐसे दंपती और पिता मिले, जो अपनी बेटियों की कुशलता और उनकी नौकरी के लिए कांवड़ लेकर आ रहे हैं।
विज्ञापन
फाल्गुन और सावन में लाते है कांवड़
- संभल के बहजोई क्षेत्र के रहने वाले अवनीष राघव और उनकी पत्नी साक्षी राघव हरिद्वार से पैदल कांवड़ लेकर आए हैं। उन्होंने बताया कि शादी के बाद एक बेटा हुआ था, लेकिन घर में बेटी की कमी थी। तीन साल तक बेटी नहीं हुई, लेकिन भगवान शिव पार्वती से मन्नत मांगी तो बेटी ने जन्म लिया। इसी खुशी में पिछले पांच सालों से फाल्गुन और सावन माह में कांवड़ ला रहे हैं।
बेटी की नौकरी के लिए मांगी थी मन्नत
बुलंदशहर के रहने वाले लोकेंद्र सिंह ने बताया कि वह किसान हैं। बेटी पिछले दो सालों से यूपी एसआई की भर्ती की तैयारी कर रही थी। बेटी की भर्ती के लिए मन्नत मांगी थी। बेटी 2024 में दारोगा बन गई है। भगवान शिव में बहुत शक्ति है, बेटी के लिए गई मांगी मन्नत पूरी होने पर हरिद्वार से कांवड़ लेकर आ रहा हूं।