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तीन माह बाद नसीब हुई वतन की खाक
ब्यूरो/अमर उजाला अमरोहा
Updated Fri, 02 Sep 2016 02:01 AM IST
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हादसे के खाई में गिरी कार
- फोटो : अमर उजाला
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परिवार की जरूरतों को पूरा करने के लिए सात समंदर पार सऊदी अरब के करीबी देश दम्माम में मजदूरी करने गए गजरौला के युवक की हादसे में मौत हो गई थी। कागजी कार्रवाई में अटके शव को तीन माह बाद अपने वतन की खाक नसीब हुई। बृहस्पतिवार को युवक का शव घर पहुंचा तो कोहराम मच गया। जवान मौत से गांव में मातम छा गया।
गजरौला के हसनपुर रोड स्थित गांव कटाई निवासी मजहर खान का बेटा समीर खान (25) एक साल से सऊदी अरब के नजदीकी देश दम्माम की एक कंपनी में मजदूरी करता था। चचेरा भाई आरिफ भी समीर के साथ इसी कंपनी में मजदूरी करता था।
दोनों चचेरे-तहेरे भाईयों को दम्माम में मजदूरी कर रहे समीर के मामा फुरकान पुत्र एहसान ने काम पर लगाया था। परिजनों के मुताबिक समीर खान कंपनी में क्रेन पर हेल्पर था। एक जून को क्रेन का हुक टूट कर समीर के सिर पर गिर गया था। जिससे समीर की उसी दिन मौके पर ही मौत हो गई थी।
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कागजी कार्रवाई पूरी न होने की वजह से तीन माह बाद शव बृहस्पतिवार को गांव पहुंच सका। परिजनों ने बताया कि चूंकि चचेरा भाई आरिफ और मामा फुरकान भी दम्माम में ही थे। जिससे कानूनी कार्रवाई के बाद समीर का शव आरिफ और मामा फुरकान के सुपुर्द तो कर दिया गया था। लेकिन शव इंडिया आना था।
जिसके लिए दोबारा से नये तरीके से कागजी कार्रवाई की गई। जिसमेें देरी की वजह से समीर का शव तीन माह बाद एक सितंबर को फ्लाइट के माध्यम से दम्माम से बहरीन और बहरीन से दिल्ली पहुंचा। दिल्ली से दोपहर में जब शव घर पहुंचा। परिवार में कोहराम मचा हुआ है।
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गजरौला के हसनपुर रोड स्थित गांव कटाई निवासी मजहर खान का बेटा समीर खान (25) एक साल से सऊदी अरब के नजदीकी देश दम्माम की एक कंपनी में मजदूरी करता था। चचेरा भाई आरिफ भी समीर के साथ इसी कंपनी में मजदूरी करता था।
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दोनों चचेरे-तहेरे भाईयों को दम्माम में मजदूरी कर रहे समीर के मामा फुरकान पुत्र एहसान ने काम पर लगाया था। परिजनों के मुताबिक समीर खान कंपनी में क्रेन पर हेल्पर था। एक जून को क्रेन का हुक टूट कर समीर के सिर पर गिर गया था। जिससे समीर की उसी दिन मौके पर ही मौत हो गई थी।
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कागजी कार्रवाई पूरी न होने की वजह से तीन माह बाद शव बृहस्पतिवार को गांव पहुंच सका। परिजनों ने बताया कि चूंकि चचेरा भाई आरिफ और मामा फुरकान भी दम्माम में ही थे। जिससे कानूनी कार्रवाई के बाद समीर का शव आरिफ और मामा फुरकान के सुपुर्द तो कर दिया गया था। लेकिन शव इंडिया आना था।
जिसके लिए दोबारा से नये तरीके से कागजी कार्रवाई की गई। जिसमेें देरी की वजह से समीर का शव तीन माह बाद एक सितंबर को फ्लाइट के माध्यम से दम्माम से बहरीन और बहरीन से दिल्ली पहुंचा। दिल्ली से दोपहर में जब शव घर पहुंचा। परिवार में कोहराम मचा हुआ है।