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Amroha News: मिठाई में मिली मिलावट, 15 लोगों पर 4.19 लाख का जुर्माना
Fri, 02 Jun 2023 01:07 AM IST
मुरादाबाद ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अमरोहा
संवाद न्यूज एजेंसी, अमरोहा
Updated Fri, 02 Jun 2023 01:07 AM IST
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अमरोहा। होली-दिवाली के मौकेे पर खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन की टीम द्वारा लिए गए सैंपल में रसगुल्ला, मावा, दूध, बेसन और हल्दी फाउडर, लड्डू के सैंपल फेल आए हैं। जिसके आधार पर एडीएम कोर्ट ने 15 लोगों पर 4 लाख 19 हजार 600 रुपये का जुर्माना लगाया है। जबकि 160 मामलों में सुनवाई चल रही है।
जिले में मिलावटखोर खाद्य पदार्थों में मिलावट कर सेहत से खिलवाड़ करने में लगे हैं। केवल त्योहारों पर ही चेकिंग अभियान चलाकर खानापूर्ति कर ली जाती है। होली- दीवाली पर जिलेभर में अभियान चलाया गया। इस दौरान रसगुल्ला, मावा, दूध, बेसन, हल्दी फाउडर, लड्डू समेत विभिन्न खाद्य पदार्थों के सैंपल भरे गए। नमूने जांच के लिए लैब भेजे गए थे। जो जांच में फेल हो गए। जिसके बाद एडीएम न्यायालय ने तेलीपुरा माफी के रहने वाले फैजान पर 25 हजार, अमरोहा नगर के मोहल्ला मच्छरहट्टा निवासी खुर्शीद अली पर 75 हजार, कांठ थानाक्षेत्र के बीचपुरी निवासी लड्डन खां पर 15 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है।
वहीं रफातपुरा निवासी महेंद्र सिंह, सिरसा खुमार निवासी रईस, मुशाहिद पर भी 15-15 हजार रुपये का जुर्माना वसूला है। वहीं सफेद रसगुल्ला में मिलावट होने के चलते गजरौला के नाजिम अली पर 50 हजार का जुर्माना लगाया है। धनौरा के अहरोला माफी निवासी गुलशन का मावा अधोमानक निकला। इसलिए एडीएम कार्यालय ने उस पर 15 हजार रुपये का जुर्माना ठोका है। सरसों के तेल में मिलावट पाए जाने पर बछरायूं निवासी अशरफ हुसैन पर 15 हजार रुप्ये का जुर्माना लगा है। बछरायूं के लखमिया गांव निवासी राहुल कुमार पर एक लाख रुपये का जुर्माना लगा है। इनका मावा अधोमानक मानक आया था। बिना लाइसेंस के कारोबार करने वाले अंकित सिंह पर 13 हजार रुपये वसूले गए हैं। वहीं गजरौला के कुमराला निवासी नरेश सिंह पर 20 हजार, देहात थाना क्षेत्र के अफजलपुर निवासी शौकत अली पर 15 हजार का जुर्माना ठोका है। इसके अलावा अमरोहा देहात के धनोरी अहीर निवासी निजामुद्दीन पर 16 हजार और गजरौला के शाहपुर निवासी पूरन सिंह पर भी 15 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है।
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घर पर जांचें मावा की मिलावट शुद्ध मावा कठोर होता है। मावा में आयोडीन सॉल्यूशन डालें, अगर मावा में मिलावट होगी तो उसका रंग बैंगनी हो जाएगा। आयोडीन सॉल्यूशन केमिस्ट के यहां मिल जाता है।
मिलावटी मिठाई की पहचान मिठाई को गर्म पानी में डालें, इसके बाद आयोडीन को मिठाई वाले कटोरे में डाल दें। अगर मिठाई घुलकर रंग बदलती है तो वह मिलावटी है। अगर रंग पहले जैसा रहता है तो मिठाई ठीक है।
जांचें दूध-दही में मिलावट
दूध में पानी: दूध की एक बूंद को चिकने या चमकदार तिरछी सतह पर डालने से शुद्ध दूध की बूंद धीरे-धीरे आगे बढ़कर पीछे एक सफेद निशान छोड़कर बहती हैं, जबकि पानी मिला दूध तेजी से बिना निशान छोड़े बहेगा।
दूध में स्टार्च: टिंक्चर आयोडीन की कुछ बूंदें मिलाने पर स्टार्च युक्त दूध में नीला रंग आ जाता है। टिंक्चर आयोडीन दवा दुकान से आसानी से मिल जाती है।
दूध में यूरिया: दूध में यूरिया की जांच के लिए एक परखनली में थोड़ा दूध लेकर उसमें आधा चम्मच सोयाबीन या अरहर पाउडर मिलाकर हिलाएं, फिर इसे पांच मिनट के लिए रख दें, इसके बाद इसमें एक लाल लिटमस पेपर डुबाने पर पेपर का रंग लाल से नीला हो जाए तो दूध में यूरिया की मिलावट मानी जाती है। लाल लिटमस पेपर स्टेशनरी की दुकान से मिल जाता है।
दूध में वनस्पति: तीन से पांच मिली लीटर दूध एक परखनली में लेकर उसमें दस बूंद हाइड्रोक्लोरिक अम्ल एवं एक चम्मच चीनी मिलाने पर पांच मिनट बाद लाल रंग दिखाई देने लगे तो दूध में वनस्पति की मिलावट होती है।
दही: दही में मिलावट हो तो एक चम्मच दही परखनली में लेकर 10 बूंद हाड्रोक्लोरिक अम्ल डालकर हिलाएं, अगर इसका रंग लाल हो जाता है तो दही में वनस्पति की मिलावट होती है।
मेटानिल येलो: यह बेहद जहरीला रंग है, जो खाद्य पदार्थों को चमकीला रंग देने के लिए प्रयोग किया जाता है।
- नोट: मिलावट की पहचान कराने संबंधित जानकारी खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन कार्यालय से मिली है।
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जिले में नहीं मिलावट जांच कराने की व्यवस्था
अमरोहा। करीब 25 लाख की आबादी वाले एक जनपद में खाद्य पदार्थों की मिलावट की जांच कराने के लिए कोई व्यवस्था नहीं है। लिहाजा विभागीय अधिकारी नमूने लेकर दूसरों जनपदों में जांच के लिए भेजते हैं। इतना ही नहीं जब तक वहां से रिपोर्ट आती है तब तक काफी देर हो जाती है।
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जिले में लगातार खाद्य पदार्थों की शुद्धता को लेकर छापेमारी की जाती है। संदिग्ध खाद्य पदार्थों के सैंपल लेकर जांच के लिए भेजे जाते हैं। वहां से रिपोर्ट मिलने के बाद उसकी रिपोर्ट एडीएम कोर्ट भेजी जाती है। किसी पर कितना जुर्माना लगना है कोर्ट निर्धारित करती है।-सुनील कुमार, मुख्य अभिहित अधिकारी
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जिम्मेदारों की अनदेखी से जहर खाने को मजबूूर लोग
खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन की टीम की लापरवाही के चलते लोग जहर खाने को मजबूर हैं। स्थिति ये है कि हर साल त्योहार के मौके पर विभाग की ओर से छापेमारी कर सैंपल जांच के लिए भेजे जाते हैं। लेकिन उनकी जांच रिपोर्ट आने से पहले लोग सिंथेटिक मावा, रसगुल्ला व अन्य मिठाई खा बैठते हैं। इस बार भी लोगों ने होली-दिवाली पर सिंथेटिक मिठाइयां खूब खाई गईं।
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जिले में मिलावटखोर खाद्य पदार्थों में मिलावट कर सेहत से खिलवाड़ करने में लगे हैं। केवल त्योहारों पर ही चेकिंग अभियान चलाकर खानापूर्ति कर ली जाती है। होली- दीवाली पर जिलेभर में अभियान चलाया गया। इस दौरान रसगुल्ला, मावा, दूध, बेसन, हल्दी फाउडर, लड्डू समेत विभिन्न खाद्य पदार्थों के सैंपल भरे गए। नमूने जांच के लिए लैब भेजे गए थे। जो जांच में फेल हो गए। जिसके बाद एडीएम न्यायालय ने तेलीपुरा माफी के रहने वाले फैजान पर 25 हजार, अमरोहा नगर के मोहल्ला मच्छरहट्टा निवासी खुर्शीद अली पर 75 हजार, कांठ थानाक्षेत्र के बीचपुरी निवासी लड्डन खां पर 15 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है।
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वहीं रफातपुरा निवासी महेंद्र सिंह, सिरसा खुमार निवासी रईस, मुशाहिद पर भी 15-15 हजार रुपये का जुर्माना वसूला है। वहीं सफेद रसगुल्ला में मिलावट होने के चलते गजरौला के नाजिम अली पर 50 हजार का जुर्माना लगाया है। धनौरा के अहरोला माफी निवासी गुलशन का मावा अधोमानक निकला। इसलिए एडीएम कार्यालय ने उस पर 15 हजार रुपये का जुर्माना ठोका है। सरसों के तेल में मिलावट पाए जाने पर बछरायूं निवासी अशरफ हुसैन पर 15 हजार रुप्ये का जुर्माना लगा है। बछरायूं के लखमिया गांव निवासी राहुल कुमार पर एक लाख रुपये का जुर्माना लगा है। इनका मावा अधोमानक मानक आया था। बिना लाइसेंस के कारोबार करने वाले अंकित सिंह पर 13 हजार रुपये वसूले गए हैं। वहीं गजरौला के कुमराला निवासी नरेश सिंह पर 20 हजार, देहात थाना क्षेत्र के अफजलपुर निवासी शौकत अली पर 15 हजार का जुर्माना ठोका है। इसके अलावा अमरोहा देहात के धनोरी अहीर निवासी निजामुद्दीन पर 16 हजार और गजरौला के शाहपुर निवासी पूरन सिंह पर भी 15 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है।
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घर पर जांचें मावा की मिलावट शुद्ध मावा कठोर होता है। मावा में आयोडीन सॉल्यूशन डालें, अगर मावा में मिलावट होगी तो उसका रंग बैंगनी हो जाएगा। आयोडीन सॉल्यूशन केमिस्ट के यहां मिल जाता है।
मिलावटी मिठाई की पहचान मिठाई को गर्म पानी में डालें, इसके बाद आयोडीन को मिठाई वाले कटोरे में डाल दें। अगर मिठाई घुलकर रंग बदलती है तो वह मिलावटी है। अगर रंग पहले जैसा रहता है तो मिठाई ठीक है।
जांचें दूध-दही में मिलावट
दूध में पानी: दूध की एक बूंद को चिकने या चमकदार तिरछी सतह पर डालने से शुद्ध दूध की बूंद धीरे-धीरे आगे बढ़कर पीछे एक सफेद निशान छोड़कर बहती हैं, जबकि पानी मिला दूध तेजी से बिना निशान छोड़े बहेगा।
दूध में स्टार्च: टिंक्चर आयोडीन की कुछ बूंदें मिलाने पर स्टार्च युक्त दूध में नीला रंग आ जाता है। टिंक्चर आयोडीन दवा दुकान से आसानी से मिल जाती है।
दूध में यूरिया: दूध में यूरिया की जांच के लिए एक परखनली में थोड़ा दूध लेकर उसमें आधा चम्मच सोयाबीन या अरहर पाउडर मिलाकर हिलाएं, फिर इसे पांच मिनट के लिए रख दें, इसके बाद इसमें एक लाल लिटमस पेपर डुबाने पर पेपर का रंग लाल से नीला हो जाए तो दूध में यूरिया की मिलावट मानी जाती है। लाल लिटमस पेपर स्टेशनरी की दुकान से मिल जाता है।
दूध में वनस्पति: तीन से पांच मिली लीटर दूध एक परखनली में लेकर उसमें दस बूंद हाइड्रोक्लोरिक अम्ल एवं एक चम्मच चीनी मिलाने पर पांच मिनट बाद लाल रंग दिखाई देने लगे तो दूध में वनस्पति की मिलावट होती है।
दही: दही में मिलावट हो तो एक चम्मच दही परखनली में लेकर 10 बूंद हाड्रोक्लोरिक अम्ल डालकर हिलाएं, अगर इसका रंग लाल हो जाता है तो दही में वनस्पति की मिलावट होती है।
मेटानिल येलो: यह बेहद जहरीला रंग है, जो खाद्य पदार्थों को चमकीला रंग देने के लिए प्रयोग किया जाता है।
- नोट: मिलावट की पहचान कराने संबंधित जानकारी खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन कार्यालय से मिली है।
जिले में नहीं मिलावट जांच कराने की व्यवस्था
अमरोहा। करीब 25 लाख की आबादी वाले एक जनपद में खाद्य पदार्थों की मिलावट की जांच कराने के लिए कोई व्यवस्था नहीं है। लिहाजा विभागीय अधिकारी नमूने लेकर दूसरों जनपदों में जांच के लिए भेजते हैं। इतना ही नहीं जब तक वहां से रिपोर्ट आती है तब तक काफी देर हो जाती है।
जिले में लगातार खाद्य पदार्थों की शुद्धता को लेकर छापेमारी की जाती है। संदिग्ध खाद्य पदार्थों के सैंपल लेकर जांच के लिए भेजे जाते हैं। वहां से रिपोर्ट मिलने के बाद उसकी रिपोर्ट एडीएम कोर्ट भेजी जाती है। किसी पर कितना जुर्माना लगना है कोर्ट निर्धारित करती है।-सुनील कुमार, मुख्य अभिहित अधिकारी
जिम्मेदारों की अनदेखी से जहर खाने को मजबूूर लोग
खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन की टीम की लापरवाही के चलते लोग जहर खाने को मजबूर हैं। स्थिति ये है कि हर साल त्योहार के मौके पर विभाग की ओर से छापेमारी कर सैंपल जांच के लिए भेजे जाते हैं। लेकिन उनकी जांच रिपोर्ट आने से पहले लोग सिंथेटिक मावा, रसगुल्ला व अन्य मिठाई खा बैठते हैं। इस बार भी लोगों ने होली-दिवाली पर सिंथेटिक मिठाइयां खूब खाई गईं।