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विभागीय जांच में सहयोग नहीं कर रहे आरोपी पुलिसकर्मी, नोटिस जारी
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अमरोहा। जीवित किशोरी को मृत दर्शा कर ऑनर किलिंग में पिता-भाई और रिश्तेदार को जेल भेजने के आरोपी पुलिसकर्मी विभागीय जांच में सहयोग नहीं कर रहे हैं। बकौल, जांच अधिकारी वे लगातार बुलाने के बाद भी वह अपने बयान दर्ज कराने नहीं पहुंचे। विभाग ने उन्हें अपना पक्ष रखने का पूरा मौका दिया। पीड़ित परिवार ने जांच अधिकारी के समक्ष अपना पक्ष रख दिया है। एक बार फिर जांच अधिकारी ने आरोपी पुलिसकर्मियों को नोटिस जारी किया है। पक्ष रखने के लिए अगली तारीख नियत की है।
आदमपुर थानाक्षेत्र के एक गांव में रहने वाले किसान की पंद्रह वर्षीय बेटी छह फरवरी 2019 को खेत से अचानक गायब हो गई थी। दस फरवरी को किशोरी के भाई ने पांच लोगों के खिलाफ अपहरण की एफआईआर दर्ज कराई थी। इस मामले में पुलिस ने नामजद दो आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। इसके बाद भी अपहृत किशोरी की बरामदगी नहीं हो सकी थी। लिहाजा तत्कालीन एसपी ने मुकदमे की विवेचना तत्कालीन इंस्पेक्टर अशोक कुमार शर्मा को सौंपी। षड्यंत्रकारी इंस्पेक्टर ने अफसरों की वाहवाही लूटने के लिए घटना का फर्जी खुलासा कर डाला।
28 दिसंबर 2019 को किशोरी के किसान पिता, भाई और एक रिश्तेदार को ऑनर किलिंग में जेल भेज दिया था। पुलिस की झूठी स्क्रिप्ट में परिवार ने बेटी के गलत संगत में पड़ने और गांव में बेइज्जती के डर से उसकी दो गोली मारकर हत्या कर शव गंगा में बहा दिया दिखाया था। जबकि किशोरी के कपड़े जंगल में झाड़ी से और तमंचा घर में संदूक से बरामद दिखाया गया था। लेकिन, लॉकडाउन के दौरान 7 अगस्त 2020 को किशोरी के जीवित मिलने के बाद षड्यंत्रकारी पुलिस की झूठी स्क्रिप्ट से पर्दा उठ गया था। बड़ी लापरवाही सामने आने के बाद आरोपी पुलिस कर्मियों के खिलाफ चौदह एक की विभागीय कार्रवाई शुरू की गई थी। तत्कालीन एएसपी की जांच में आरोपी दोषी सिद्ध हो गए थे।
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अब इसकी जांच सीओ सिटी विजय कुमार राणा कर रहे है। सीओ ने बताया कि आरोपी पुलिस कर्मी जांच में सहयोग नहीं कर रहे हैं। उन्हें अपना पक्ष रखने का मौका दिया जा रहा है। बावजूद इसके आरोपी पुलिस कर्मी ऑफिस आकर अपना पक्ष नहीं रख रहे हैं। चौदह-एक की प्रक्रिया में न्यायिक मामलों की तरफ पक्षों को सुना जाता है। पीड़िता के परिवार का पक्ष सुन लिया गया है। आरोपी पुलिस कर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज हो चुकी है, इसलिए वह सामने आने से बच रहे हैं। एक बार फिर सभी पुलिस कर्मियों को नोटिस जारी किए गए हैं।
आरोपी पुलिस कर्मियों पर एफआईआर की विवेचना होगी ट्रांसफर
अमरोहा। ऑनर किलिंग के झूठे मुकदमे में परिजनों को जेल भेजने के आरोपी पुलिसकर्मियों पर दर्ज हुई एफआईआर की विवेचना ट्रांसफर करने की तैयारी की जा रही है। इससे पहले यह जांच आदमपुर थानाध्यक्ष कर रहे थे। परिजनों ने जांच को उसी थाने से कराए जाने को नियम विरुद्ध बताया है। लिहाजा एसपी जांच को क्राइम ब्रांच या अन्य किसी थानाध्यक्ष को सौंपने की तैयारी कर रही है। जल्द ही विवेचना ट्रांसफर कर दी जाएगी। एसपी पूनम ने बताया कि उसकी थाने में मामले की विवेचना कराना उचित नहीं है।
ये है आरोपी पुलिस कर्मी
आदमपुर में जीवित किशोरी को मृत दर्शाकर निर्दोष पिता-पुत्र और रिश्तेदारों को को जेल भेजने के मामले में तत्कालीन इंस्पेक्टर अशोक कुमार शर्मा, एसआई मोहम्मद आरिफ, एसआई राकेश कुमार, एसआई मनोज कुमार, एसआई विनोद कुमार त्यागी, सिपाही भूपेंद्र सिंह, सिपाही कृष्णवीर सिंह, सिपाही अनिरुद्ध, सिपाही दीपक कुमार, महिला सिपाही अपेक्षा तोमर, महिला सिपाही निधि के खिलाफ गंभीर धाराओं में एफआईआर दर्ज कराई गई है।
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आदमपुर थानाक्षेत्र के एक गांव में रहने वाले किसान की पंद्रह वर्षीय बेटी छह फरवरी 2019 को खेत से अचानक गायब हो गई थी। दस फरवरी को किशोरी के भाई ने पांच लोगों के खिलाफ अपहरण की एफआईआर दर्ज कराई थी। इस मामले में पुलिस ने नामजद दो आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। इसके बाद भी अपहृत किशोरी की बरामदगी नहीं हो सकी थी। लिहाजा तत्कालीन एसपी ने मुकदमे की विवेचना तत्कालीन इंस्पेक्टर अशोक कुमार शर्मा को सौंपी। षड्यंत्रकारी इंस्पेक्टर ने अफसरों की वाहवाही लूटने के लिए घटना का फर्जी खुलासा कर डाला।
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28 दिसंबर 2019 को किशोरी के किसान पिता, भाई और एक रिश्तेदार को ऑनर किलिंग में जेल भेज दिया था। पुलिस की झूठी स्क्रिप्ट में परिवार ने बेटी के गलत संगत में पड़ने और गांव में बेइज्जती के डर से उसकी दो गोली मारकर हत्या कर शव गंगा में बहा दिया दिखाया था। जबकि किशोरी के कपड़े जंगल में झाड़ी से और तमंचा घर में संदूक से बरामद दिखाया गया था। लेकिन, लॉकडाउन के दौरान 7 अगस्त 2020 को किशोरी के जीवित मिलने के बाद षड्यंत्रकारी पुलिस की झूठी स्क्रिप्ट से पर्दा उठ गया था। बड़ी लापरवाही सामने आने के बाद आरोपी पुलिस कर्मियों के खिलाफ चौदह एक की विभागीय कार्रवाई शुरू की गई थी। तत्कालीन एएसपी की जांच में आरोपी दोषी सिद्ध हो गए थे।
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अब इसकी जांच सीओ सिटी विजय कुमार राणा कर रहे है। सीओ ने बताया कि आरोपी पुलिस कर्मी जांच में सहयोग नहीं कर रहे हैं। उन्हें अपना पक्ष रखने का मौका दिया जा रहा है। बावजूद इसके आरोपी पुलिस कर्मी ऑफिस आकर अपना पक्ष नहीं रख रहे हैं। चौदह-एक की प्रक्रिया में न्यायिक मामलों की तरफ पक्षों को सुना जाता है। पीड़िता के परिवार का पक्ष सुन लिया गया है। आरोपी पुलिस कर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज हो चुकी है, इसलिए वह सामने आने से बच रहे हैं। एक बार फिर सभी पुलिस कर्मियों को नोटिस जारी किए गए हैं।
आरोपी पुलिस कर्मियों पर एफआईआर की विवेचना होगी ट्रांसफर
अमरोहा। ऑनर किलिंग के झूठे मुकदमे में परिजनों को जेल भेजने के आरोपी पुलिसकर्मियों पर दर्ज हुई एफआईआर की विवेचना ट्रांसफर करने की तैयारी की जा रही है। इससे पहले यह जांच आदमपुर थानाध्यक्ष कर रहे थे। परिजनों ने जांच को उसी थाने से कराए जाने को नियम विरुद्ध बताया है। लिहाजा एसपी जांच को क्राइम ब्रांच या अन्य किसी थानाध्यक्ष को सौंपने की तैयारी कर रही है। जल्द ही विवेचना ट्रांसफर कर दी जाएगी। एसपी पूनम ने बताया कि उसकी थाने में मामले की विवेचना कराना उचित नहीं है।
ये है आरोपी पुलिस कर्मी
आदमपुर में जीवित किशोरी को मृत दर्शाकर निर्दोष पिता-पुत्र और रिश्तेदारों को को जेल भेजने के मामले में तत्कालीन इंस्पेक्टर अशोक कुमार शर्मा, एसआई मोहम्मद आरिफ, एसआई राकेश कुमार, एसआई मनोज कुमार, एसआई विनोद कुमार त्यागी, सिपाही भूपेंद्र सिंह, सिपाही कृष्णवीर सिंह, सिपाही अनिरुद्ध, सिपाही दीपक कुमार, महिला सिपाही अपेक्षा तोमर, महिला सिपाही निधि के खिलाफ गंभीर धाराओं में एफआईआर दर्ज कराई गई है।