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स्वास्थ्य अधिकारी बताकर खाते से उड़ाए 1
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गजरौला (अमरोहा)। स्वास्थ्य अधिकारी बताकर एक जालसाज ने प्रसूता के पति को फोन पर झांसा देकर अपने जाल में फंसा लिया। उससे पत्नी के प्रसव की जानकारी लेने के बहाने बैंक खाता संख्या और एटीएम का पिन कोड मालूम कर लिया। कुछ ही देर में उसके खाते से तीन बार में 18 हजार रुपये निकाल लिए। रुपये निकालने के संदेश मोबाइल पर देखकर उसके होश उड़ गए। पीड़ित ने मामले की शिकायत थाने में की गई है।
सोमवार को बताया कि सीएचसी गजरौला में प्रसव कराने वाली रूबी के पति दीपू कुमार पर फोन पहुंचा और उसे स्वास्थ्य अधिकारी बताकर सरकारी सहायता राशि ट्रांसफर करने के लिए खाता संख्या पूछी गई। दीपू ने नासमझी में गजरौला में सिंडीकेट बैंक की शाखा में खाता संख्या, एटीएम संख्या के साथ ही एटीएम का कोड भी बता दिया। बताते हैं कि इसके बाद कुछ ही देर में उसके खाते से तीन बार में 18 हजार रुपए निकाल लिए गए। गांव बांसली निवासी शशिबाला स्वास्थ्य विभाग में आशा कार्यकर्ता हैं। शनिवार को उसके फोन पर भी कॉल आई। फोन करने वाले ने खुद को लखनऊ में स्वास्थ्य अधिकारी बताते हुए उससे क्षेत्र में कराए गए प्रसव, नसबंदी आदि कार्यों की जानकारी ली। साथ ही पूछा कि अब तक कितनी प्रसूताओं के खाते में रकम नहीं पहुंची है। आशा ने उसे उन महिलाओं के नाम और फोन नंबर दे दिए। जिसके चलते जालसाज ने प्रसूता के पति के नंबर पर कॉल कर फंसा लिया। जिससे उसके खाते से रुपये निकल गए। इसी को लेकर प्रसूता के पति और आशा कार्यकर्ता से नोकझोंक हुई। सोमवार को उसने अपना खाता ब्लाक करा दिया। इसके बाद सीएचसी पहुंचकर केंद्र अधीक्षक डा. योगेंद्र सिंह से आशा की शिकायत की। डा. योगेंद्र सिंह ने आरोपी के नंबर पर कॉल कर उससे बात भी की, लेकिन कोई हल नहीं निकला। पुलिस का कहना है कि गलती खाताधारक की थी। एटीएम का कोड क्यों बताया।
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सोमवार को बताया कि सीएचसी गजरौला में प्रसव कराने वाली रूबी के पति दीपू कुमार पर फोन पहुंचा और उसे स्वास्थ्य अधिकारी बताकर सरकारी सहायता राशि ट्रांसफर करने के लिए खाता संख्या पूछी गई। दीपू ने नासमझी में गजरौला में सिंडीकेट बैंक की शाखा में खाता संख्या, एटीएम संख्या के साथ ही एटीएम का कोड भी बता दिया। बताते हैं कि इसके बाद कुछ ही देर में उसके खाते से तीन बार में 18 हजार रुपए निकाल लिए गए। गांव बांसली निवासी शशिबाला स्वास्थ्य विभाग में आशा कार्यकर्ता हैं। शनिवार को उसके फोन पर भी कॉल आई। फोन करने वाले ने खुद को लखनऊ में स्वास्थ्य अधिकारी बताते हुए उससे क्षेत्र में कराए गए प्रसव, नसबंदी आदि कार्यों की जानकारी ली। साथ ही पूछा कि अब तक कितनी प्रसूताओं के खाते में रकम नहीं पहुंची है। आशा ने उसे उन महिलाओं के नाम और फोन नंबर दे दिए। जिसके चलते जालसाज ने प्रसूता के पति के नंबर पर कॉल कर फंसा लिया। जिससे उसके खाते से रुपये निकल गए। इसी को लेकर प्रसूता के पति और आशा कार्यकर्ता से नोकझोंक हुई। सोमवार को उसने अपना खाता ब्लाक करा दिया। इसके बाद सीएचसी पहुंचकर केंद्र अधीक्षक डा. योगेंद्र सिंह से आशा की शिकायत की। डा. योगेंद्र सिंह ने आरोपी के नंबर पर कॉल कर उससे बात भी की, लेकिन कोई हल नहीं निकला। पुलिस का कहना है कि गलती खाताधारक की थी। एटीएम का कोड क्यों बताया।
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