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Amroha News: गली-गली झोलाछापों का जाल...नहीं थम रहा अवैध इलाज
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अमरोहा। जिले में अवैध अस्पताल और क्लीनिकों का जाल लगातार फैलता जा रहा है। शहर की गलियों से लेकर गांवों तक झोलाछाप दुकानें चला रहे हैं। सामान्य बीमारी की दवा देने से लेकर प्रसव और ऑपरेशन तक किए जाते हैं। स्वास्थ्य विभाग समय-समय पर छापा मारकर ऐसे केंद्रों को सील करने का दावा करता है, लेकिन कार्रवाई के आंकड़े ही सवाल खड़े कर रहे हैं। जनवरी से सितंबर 2026 तक विभाग ने करीब 135 अपंजीकृत नर्सिंगहोम और क्लीनिकों को सील कर संचालकों को नोटिस दिए, लेकिन इनमें केवल करीब 35 के खिलाफ ही प्राथमिकी दर्ज कराई गई। ऐसे में सवाल है कि सीलिंग और नोटिस के बाद बाकी मामलों में कार्रवाई किस स्तर तक पहुंची।
स्वास्थ्य विभाग के रिकॉर्ड में जिले में करीब 130 निजी अस्पताल और क्लीनिक पंजीकृत हैं। दूसरी ओर विभागीय कार्रवाई में ही इतने कम समय में 135 अपंजीकृत केंद्र पकड़े जा चुके हैं। स्थानीय स्तर पर अवैध क्लीनिक, अस्पतालों की संख्या 5000 से ज्यादा बताई जा रही है। इससे साफ है कि पंजीकृत चिकित्सा संस्थानों की तुलना में अवैध चिकित्सा कारोबार की समस्या कहीं बड़ी है। इसके बावजूद ऐसे झोलाछापों की नियमित निगरानी और बंद कराए गए संस्थानों के दोबारा संचालन पर रोक लगाने की प्रभावी व्यवस्था नजर नहीं आती।
झोलाछापों के खिलाफ स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई अक्सर किसी शिकायत या घटना के बाद तेज होती है। शनिवार को दो झोलाछाप विल्सन और मुस्तफा को उम्रकैद की सजा सुनाए जाने वाले मामले में तत्कालीन डीएम और सीएमओ की भूमिका पर भी सवाल उठे थे और अदालत ने उनके खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए गए है। शनिवार को आदेश जारी होने के बाद रविवार को स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने कार्रवाई की, लेकिन इसे भी केवल औपचारिकता तक सीमित रखा।
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कम खर्च और तत्काल इलाज की उम्मीद वाले मरीजों की खतरा
सबसे बड़ा खतरा उन मरीजों के लिए है जो कम खर्च और तत्काल इलाज की उम्मीद में झोलाछापों तक पहुंचते हैं। प्रशिक्षित चिकित्सक और जरूरी सुविधाएं नहीं होने के बावजूद उपचार, प्रसव या ऑपरेशन होने से मरीजों की जान जोखिम में पड़ सकती है। विभाग यदि वास्तव में अवैध चिकित्सा व्यवस्था पर अंकुश लगाना चाहता है तो केवल सील करने और नोटिस देने के बजाय संचालकों के खिलाफ मुकदमे, सील किए केंद्रों की नियमित निगरानी और दोबारा खुलने पर सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करनी होगी। वरना छापेमारी के आंकड़े बढ़ते रहेंगे और गांव-गांव झोलाछापों का कारोबार भी चलता रहेगा।
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बगैर पंजीकरण तीन क्लीनिक सील, संचालक भागे
मंडी धनौरा। स्वास्थ्य विभाग ने रविवार को छापेमारी कर बगैर पंजीकरण चल रहे तीन क्लीनिक सील कर दिए। कार्रवाई के दौरान तीनों संचालक भाग निकले। सीएमओ डॉ. रमाकांत सागर के नेतृत्व में हुई कार्रवाई से झोलाछापों में खलबली मच गई।
टीम ने शेरपुर रोड के क्लीनिक से दो मरीजों को सरकारी अस्पताल भेजा। पंजीकरण न मिलने पर क्लीनिक सील कर दिया। इसके बाद ढ्यौटी के मेडिसिटी और कैसरा के नवीन क्लीनिक की जांच की गई। दोनों के पास भी पंजीकरण नहीं मिला और उन्हें सील कर दिया गया।
सीएमओ ने बताया कि अवैध अस्पतालों और क्लीनिकों के खिलाफ कार्रवाई जारी रहेगी। नोडल अधिकारी डॉ. योगेंद्र सिंह, चिकित्सा अधीक्षक डॉ. राहुल आदि मौजूद रहे। संवाद
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अवैध अस्पतालों के खिलाफ रविवार को भी अभियान चलाया गया। अपंजीकृत तीन अस्पतालों को सील कर नोटिस दिया गया है। सोमवार को भी अभियान चलाया जाएगा। -डॉ. रमाकांत सागर, सीएमओ
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स्वास्थ्य विभाग के रिकॉर्ड में जिले में करीब 130 निजी अस्पताल और क्लीनिक पंजीकृत हैं। दूसरी ओर विभागीय कार्रवाई में ही इतने कम समय में 135 अपंजीकृत केंद्र पकड़े जा चुके हैं। स्थानीय स्तर पर अवैध क्लीनिक, अस्पतालों की संख्या 5000 से ज्यादा बताई जा रही है। इससे साफ है कि पंजीकृत चिकित्सा संस्थानों की तुलना में अवैध चिकित्सा कारोबार की समस्या कहीं बड़ी है। इसके बावजूद ऐसे झोलाछापों की नियमित निगरानी और बंद कराए गए संस्थानों के दोबारा संचालन पर रोक लगाने की प्रभावी व्यवस्था नजर नहीं आती।
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झोलाछापों के खिलाफ स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई अक्सर किसी शिकायत या घटना के बाद तेज होती है। शनिवार को दो झोलाछाप विल्सन और मुस्तफा को उम्रकैद की सजा सुनाए जाने वाले मामले में तत्कालीन डीएम और सीएमओ की भूमिका पर भी सवाल उठे थे और अदालत ने उनके खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए गए है। शनिवार को आदेश जारी होने के बाद रविवार को स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने कार्रवाई की, लेकिन इसे भी केवल औपचारिकता तक सीमित रखा।
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कम खर्च और तत्काल इलाज की उम्मीद वाले मरीजों की खतरा
सबसे बड़ा खतरा उन मरीजों के लिए है जो कम खर्च और तत्काल इलाज की उम्मीद में झोलाछापों तक पहुंचते हैं। प्रशिक्षित चिकित्सक और जरूरी सुविधाएं नहीं होने के बावजूद उपचार, प्रसव या ऑपरेशन होने से मरीजों की जान जोखिम में पड़ सकती है। विभाग यदि वास्तव में अवैध चिकित्सा व्यवस्था पर अंकुश लगाना चाहता है तो केवल सील करने और नोटिस देने के बजाय संचालकों के खिलाफ मुकदमे, सील किए केंद्रों की नियमित निगरानी और दोबारा खुलने पर सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करनी होगी। वरना छापेमारी के आंकड़े बढ़ते रहेंगे और गांव-गांव झोलाछापों का कारोबार भी चलता रहेगा।
बगैर पंजीकरण तीन क्लीनिक सील, संचालक भागे
मंडी धनौरा। स्वास्थ्य विभाग ने रविवार को छापेमारी कर बगैर पंजीकरण चल रहे तीन क्लीनिक सील कर दिए। कार्रवाई के दौरान तीनों संचालक भाग निकले। सीएमओ डॉ. रमाकांत सागर के नेतृत्व में हुई कार्रवाई से झोलाछापों में खलबली मच गई।
टीम ने शेरपुर रोड के क्लीनिक से दो मरीजों को सरकारी अस्पताल भेजा। पंजीकरण न मिलने पर क्लीनिक सील कर दिया। इसके बाद ढ्यौटी के मेडिसिटी और कैसरा के नवीन क्लीनिक की जांच की गई। दोनों के पास भी पंजीकरण नहीं मिला और उन्हें सील कर दिया गया।
सीएमओ ने बताया कि अवैध अस्पतालों और क्लीनिकों के खिलाफ कार्रवाई जारी रहेगी। नोडल अधिकारी डॉ. योगेंद्र सिंह, चिकित्सा अधीक्षक डॉ. राहुल आदि मौजूद रहे। संवाद
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अवैध अस्पतालों के खिलाफ रविवार को भी अभियान चलाया गया। अपंजीकृत तीन अस्पतालों को सील कर नोटिस दिया गया है। सोमवार को भी अभियान चलाया जाएगा। -डॉ. रमाकांत सागर, सीएमओ