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Amroha News: किसानों से चकबंदी के नाम पर धांधली की शिकायत पर लखनऊ से जांच को पहुंची टीम
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हसनपुर। तहसील क्षेत्र के जेबड़ा एतमाली गांव में चकबंदी के नाम पर किसानों के साथ की गई वसूली की शिकायत का मामला शासन स्तर पर भी पहुंच चुका है। शिकायत मिलने पर लखनऊ से टीम ने गांव पहुंचकर मामले की जांच पड़ताल की है। किसानों के बयान दर्ज किए गए हैं। करीब एक माह पहले इसी गांव के एक किसान से रिश्वत लेने के आरोप में एंटी करप्शन की टीम ने चकबंदी लेखपाल उत्तम बालियान को गिरफ्तार किया था।
तहसील क्षेत्र के गांव जेबड़ा एतमाली के कई किसानों से की गई वसूली का मामला सामने आने पर क्षेत्र में यह बात आम हो गई। इसी गांव के रहने वाले उत्तर प्रदेश पिछड़ा वर्ग आयोग के पूर्व सदस्य चंद्रपाल खड़गवंशी ने इस मामले को 30 सितंबर को लखनऊ पहुंचाया था। उन्होंने लखनऊ में चकबंदी आयुक्त को शिकायती पत्र देकर मामले की जांच कराने की मांग की थी। चकबंदी आयुक्त के निर्देश पर शुक्रवार को पांच सदस्यीय टीम गांव पहुंची। टीम ने कई किसानों के बयान दर्ज किए गए। ग्रामीणों ने जांच टीम को बताया कि बताया कि गांव में चकबंदी प्रक्रिया दो साल पहले शुरू हुई थी। किसानों ने अपनी भूमि पूरी कराने और अच्छे चक के लालच में किसानों ने लेखपाल व अन्य अधिकारियों को पैसे देने का आरोप लगाया। लेकिन, नक्शा 23 में मूलजोत पर चक नहीं होने, एक-एक किसान के चार-चार चक बनाने, अनेक किसानों की भूमि की कीमत नहीं लगाकर उन्हें चकबंदी से बाहर करने जैसी समस्याएं सामने आने पर किसानों ने इसकी शिकायत की। लखनऊ से आई टीम से किसानों ने चकबंदी अधिकारियों को दी गई रिश्वत को वापस कराने की भी मांग की है। एसडीएम पुष्कर नाथ चौधरी ने बताया कि लखनऊ से किसी टीम ने गांव पहुंचकर जांच की है। जांच के बाद टीम अपनी रिपोर्ट चकबंदी आयुक्त को ही सौंपेगी।
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तहसील क्षेत्र के गांव जेबड़ा एतमाली के कई किसानों से की गई वसूली का मामला सामने आने पर क्षेत्र में यह बात आम हो गई। इसी गांव के रहने वाले उत्तर प्रदेश पिछड़ा वर्ग आयोग के पूर्व सदस्य चंद्रपाल खड़गवंशी ने इस मामले को 30 सितंबर को लखनऊ पहुंचाया था। उन्होंने लखनऊ में चकबंदी आयुक्त को शिकायती पत्र देकर मामले की जांच कराने की मांग की थी। चकबंदी आयुक्त के निर्देश पर शुक्रवार को पांच सदस्यीय टीम गांव पहुंची। टीम ने कई किसानों के बयान दर्ज किए गए। ग्रामीणों ने जांच टीम को बताया कि बताया कि गांव में चकबंदी प्रक्रिया दो साल पहले शुरू हुई थी। किसानों ने अपनी भूमि पूरी कराने और अच्छे चक के लालच में किसानों ने लेखपाल व अन्य अधिकारियों को पैसे देने का आरोप लगाया। लेकिन, नक्शा 23 में मूलजोत पर चक नहीं होने, एक-एक किसान के चार-चार चक बनाने, अनेक किसानों की भूमि की कीमत नहीं लगाकर उन्हें चकबंदी से बाहर करने जैसी समस्याएं सामने आने पर किसानों ने इसकी शिकायत की। लखनऊ से आई टीम से किसानों ने चकबंदी अधिकारियों को दी गई रिश्वत को वापस कराने की भी मांग की है। एसडीएम पुष्कर नाथ चौधरी ने बताया कि लखनऊ से किसी टीम ने गांव पहुंचकर जांच की है। जांच के बाद टीम अपनी रिपोर्ट चकबंदी आयुक्त को ही सौंपेगी।
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