UP: दिल्ली समेत दूसरे राज्यों के 9235 वाहनों का अमरोहा में पंजीकरण, एनजीटी की सख्ती.. चलाने की अनुमति हुई खत्म
दिल्ली एनसीआर समेत अन्य राज्यों से 10 साल पुराने डीजल और 15 साल पुराने पेट्रोल वाहनों के 9235 पंजीकरण अमरोहा एआरटीओ में किए गए। इससे वाहनों को पांच साल और चलाने की अनुमति मिल गई है। एनजीटी की सख्ती के बाद वाहन मालिकों ने अमरोहा का रूख किया गया है।
विस्तार
दिल्ली समेत दूसरे राज्योंं से अपनी अवधि पूरी कर चुके 9235 वाहनों को अमरोहा एआरटीओ में पंजीकरण हुआ है। यह सभी वाहन दस साल पुराने डीजल और पंद्रह साल पुराने पेट्रोल के हैं। सभी की एनओसी दिल्ली एनसीआर समेत दूसरे राज्यों से ट्रांसफर होकर आई थी। अमरोहा में पंजीकरण होने के बाद इन वाहनों की उम्र पांच साल बढ़ गई है।
दिल्ली एनसीआर, हरियाणा, राजस्थान और मेरठ समेत यूपी के कई जिलों में दस साल से अधिक के डीजल और पंद्रह साल के पेट्रोल वाहन का प्रयोग नहीं कर सकते हैं। ऐसा करने पर पुलिस प्रशासन को वाहन को सील करने का अधिकार है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) की सख्ती के बाद दिल्ली एनसीआर के उम्र निकले अधिकांश डीजल और पेट्रोल के वाहन मालिकों ने अपने क्षेत्र के एआरटीओ कार्यालयों से एनओसी लेकर अमरोहा में पंजीकरण कराया है।
जिससे वाहन की पांच साल की उम्र बढ़ गई हैं। बीते पांच सालों में 9235 वाहन ऐसे हैं, जिनका अमरोहा एआरटीओ कार्यालय में पंजीकरण हुआ है। जिसमें दिल्ली एनसीआर के डीजल वाहनों की संख्या अधिक रही है।
एनओसी पर ही होता है अन्य जिले में पंजीकरण
जिस वाहन मालिक का जहां पर भी वाहन पंजीकरण है। वहां से यदि उसको अन्य राज्य और जनपद में ट्रांसफर कराना है, तो अपने जिले के एआरटीओ कार्यालय से एनओसी लेनी होगी। तभी दूसरे जिले में उसका पंजीकरण किया जा सकता है।
फिटनेस पास होने पर ही मिलती है एनओसी
जिन वाहनों का प्रदूषण, बॉडी या अन्य कोई आपत्ति नहीं होती है। उसी वाहन की फिटनेस तैयार होती है। फिटनेस प्रमाण पत्र मिलने के बाद ही एनओसी जारी होती है। जिसके बाद अन्य किसी स्थान पर पंजीकरण कराया जा सकता है।
एनसीआर में यह है नियम
दिल्ली में वायु प्रदूषण न हो, एनजीटी द्वारा डीजल के दस साल से अधिक अवधि वाले वाहनों के संचालन पर प्रतिबंध है। एनसीआर में सिर्फ दस साल तक ही डीजल के वाहनों का संचालन किया जा सकता है। दिल्ली में पेट्रोल वाहनों को सिर्फ 15 साल ही चलाया जा सकता है, उसकी फिटनेस बढ़ाने के बाद एनसीआर से बाहर ही चलाया जा सकता है। डीजल के अधिकांश वाहनों को वाहन स्वामियों द्वारा बाहरी जनपदों में एनओसी लेकर पंजीकरण कराने का प्रयास किया जाता है।
अन्य जनपदों में यह है नियम
दिल्ली एनसीआर क्षेत्र से अलग जनपदों में वाहनों की फिटनेस प्रमाण पत्र जारी कर उसकी अवधि को बढ़ा दिया जाता है। वे जनपद जहां पर वायु प्रदूषण की अधिक समस्या नहीं होती है। समय पूरा होने पर डीजल वाहन स्वामी अपने वाहनों को भी अन्य जनपदों में बेचने का प्रयास करते हैं, जिससे अच्छी वाहन की अच्छी कीमत मिल सके। साथ ही वाहन की अवधि बढ़ जाती है। जिसके लिए एनओसी की आवश्यकता होती है।
इन वर्षों में मिली एनओसी
वर्ष वाहनों की संख्या
2020-21 1442
2021-22 1594
2022-23 2098
2023-24 2091
2024-25 2010