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जींस की सिलाई से 700 परिवारों की कमाई

Moradabad  Bureau मुरादाबाद ब्यूरो
Updated Mon, 06 Jan 2020 11:39 PM IST
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700 families works in jeans
सैदनगली (अमरोहा)। दादा मियां की जियारत से पहचाने जाने वाले सैदनगली कस्बे के जींस कारखाने अब उसकी नई पहचान बनने लगी है। दस साल पहले करीब दस से बारह कारखानों में शुरू हुई जींस की सिलाई का काम अब कस्बे के 45 कारखानों में पहुंच गया है। जींस की सिलाई कस्बे और आसपास के गांवों के करीब सात सौ परिवारों की कमाई का जरिया बन गया। गांव के पास ही रोजगार मिलने से युवाओं में खुशी है।
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नगर पंचायत की मुहर लगने के बाद सैदनगली सुर्खियों में है। बताया जाता है कि सैयदनगली से सैदनगली बना है। दादा मियां की दरगाह सैदनगली की पहचान है। इस पहचान के अलावा कस्बे की एक दूसरी भी पहचान बनने लगी है। वह है यहां के जींस कारखाने। कस्बे के अंसारी मोहल्ला, कुरैशियान, मनिहारियान मोहल्ला में जींस के करीब 45 कारखाने हैं। जहां जींस के पैंट और कपड़ों की सिलाई होती है। कारखानेदार दिल्ली से कटिंग हुई जींस लेते हैं, जिसकी अपने कारखाने में सिलाई कराते हैं। इस काम से क्षेत्र के करीब सात सौ परिवार जुड़े है। ये परिवार सैदनगली के आसपास के गांवों के हैं। कारखानों में जींस की सिलाई से इन परिवारों की कमाई हो रही है।
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जींस की रंगाई का भी काम होता है
सैदनगली। सैदनगली कस्बे में करीब दस बारह साल पहले जींस पैंट की सिलाई काम शुरू किया गया था। कारखानों में जींस पैंट सिलाई के लिए करीब तीस से चालीस मशीनें लगाई गई है। कुछ कारखानों में जींस की रंगाई का भी काम होता है। सिलाई के बाद रंगाई की जाती है।
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रोजाना दो से तीन गाड़ी जाती हैं दिल्ली
सैदनगली। रोजाना दिल्ली से करीब दो से तीन गाड़ी जींस कटिंग कर कस्बे में आती है। जो अलग-अलग कारखानों में भेजी जाती है। रोजाना इतनी की गाड़ी भरकर कपड़ा सिलाई के बाद दिल्ली भेजा जाता है।
जितनी अधिक सिलाई उतनी अधिक आमदनी
सैदनगली। जींस की कटिंग दिल्ली में होती है। जहां से कारखानेदार सिलाई के लिए जींस लेते हैं। सिलाई के लिए कारीगर को एक जींस के पंद्रह रुपये मिलते हैं। एक कारीगर बीस से अधिक जींस बड़े आराम से सिल देता है। इसके अलावा कुछ कारीगर ओवरटाइम भी करते हैं। ऐसे में जितनी अधिक जींस की सिलाई होगी कमाई उतनी ही अधिक होगी।
पिछले पांच साल से कारखाना चला रहे हैं। कारखाने में 10 मशीनें लगी हुई है। करीब बारह मजदूर रोजाना जींस सिलाई के लिए आते हैं। उन्हें प्रतिदिन 300 से 400 रुपये तक मजदूरी मिल जाती है।
- अनवर अंसारी, जींस कारखाना स्वामी
काफी समय से जींस कारखाना चला रहा हूं। आज युवाओं में जींस का क्रेज है। सैदनगली में चालीस से अधिक जींस कारखाने संचालित हैं। करीब एक हजार कारीगर आसपास के गांवों और सैदनगली से प्रतिदिन काम करने आते हैं। - अरकान अहमद, जींस कारखाना
प्रति जींस की सिलाई के बदले पंद्रह रुपये मजदूरी के रूप में मिलती है। वह रोजाना 300 से 400 रुपये काम कर लेते हैं। यदि ओवरटाइम में जींस सिलाई का काम करते हैं और अधिक मजदूरी मिलती है। - मोहम्मद यूसुफ, कारीगर

आसपास के गांवों से रोजाना बड़ी संख्या में लोग जींस कारखाने में काम करने आते हैं। शाम तक कारखानों में मजदूरी करते हैं। जींस सिलाई से मिलने वाले पैसों परिवार को गुजर बसर करते हैं। इससे आसपास के बेरोजगार युवाओं को सहूलियत होती है। - मोहम्मद इंतजार, कारीगर
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