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ओसीता जग्देपुर में बाढ़ के पानी से काली पड़ने लगी गन्ने की फसल
Updated Mon, 24 Jul 2017 02:18 AM IST
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रविवार को 20 सेमी बढ़ा जलस्तर, 200.40 गेज मीटर पहुंचा
89 हजार क्यूसेक पानी डैम से छोड़ा गया
अमर उजाला ब्यूरो
गजरौला।
गंगा में जलस्तर बढ़ने से ओसीता जग्देपुर के खेतों में लहलहा रही फसलों में घुसा पानी अब फसलों को प्रभावित करने लगा है। करीब दो सप्ताह से बाढ़ का पानी भरा रहने से गन्ने की फलस काली पड़ने लगी है। इससे किसानों की चिंता और बढ़ गई है। किसान परेशान है कि उसकी फसल बच पाएगी या नहीं। रविवार को जलस्तर में 20 सेमी की बढ़ोत्तरी दर्ज की गई। जबकि डैम से 89 हजार क्यूसेक पानी और छोड़ा गया है। इससे खादर क्षेत्र में बाढ़ का खतरा मंडरा है। बाढ़ अफसरों द्वारा तटबंधन का कार्य कराया जा रहा है।
पहाड़ों पर लगातार तेज बरसात का सिलसिला फिर शुरू हो गया है। इससे पहाड़ी इलाकों के जलाशयों में जमा हुए पानी को मैदानी इलाकों में छोड़ा जा रहा है। शनिवार को 85 हजार क्यूसेक पानी डैम से छोड़ा गया था। जिससे एक साथ गंगा का जलस्तर बीस सेमी बढ़ गया। इससे गंगा, खतरे के निशान की ओर तेजी से बढ़ती जा रही है। गंगा किनारे बसे खादर क्षेत्र के गांवों में बाढ़ का पानी घुसना शुरू हो गया। ओसीता जग्देपुर के जंगल में बोई गईं करीब एक हजार बीघा से ज्यादा क्षेत्रफल में लहलहा रही फसलों में बाढ़ का पानी दो सप्ताह से भरा रहने से फसलों पर कुप्रभाव पड़ने लगा है। गन्ने की फसलों की पत्ती नीचे की तरफ से काली पड़ने लगी है। गन्ने की जड़ काली होनी लगी है। इससे किसानों की चिंता और बढ़ गई है। किसानों को इस बात का खतरा सता रहा है कि आखिर कैसे फसलों को बचाया जाए। जबकि रविवार को भी हरिद्वार व बिजनौर बैराज से 89 हजार क्यूसेक पानी गंगा में छोड़ा गया। इसका असर मैदानी इलाकों में सोमवार को जरूर दिखाई देगा। शनिवार को तिगरी में 200.20 व तिगरी में 200.00 गेज मीटर जलस्तर दर्ज किया गया था। जो रविवार को बढ़कर तिगरी में 200.40 व ब्रजघाट में 200.20 गेज मीटर हो गया। फिलहाल जलस्तर ब्रजघाट में खतरे के निशान 201.9 गेज मीटर और तिगरी में 202.5 गेज मीटर से अभी बहुत नीचे है। बाढ़ खंड द्वारा तटबंधन का कार्य लगातार कराया जा रहा है।
गंगा का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। तटों को मजबूत करने के लिए लगातार कार्य कराया जा रहा है। डैम से पानी लगातार छोड़ा जा रहा है। अभी और जलस्तर बढ़ने की अशंका है।
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- प्रदीप कुमार, जेई, बाढ़ चौकी तिगरी।
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89 हजार क्यूसेक पानी डैम से छोड़ा गया
अमर उजाला ब्यूरो
गजरौला।
गंगा में जलस्तर बढ़ने से ओसीता जग्देपुर के खेतों में लहलहा रही फसलों में घुसा पानी अब फसलों को प्रभावित करने लगा है। करीब दो सप्ताह से बाढ़ का पानी भरा रहने से गन्ने की फलस काली पड़ने लगी है। इससे किसानों की चिंता और बढ़ गई है। किसान परेशान है कि उसकी फसल बच पाएगी या नहीं। रविवार को जलस्तर में 20 सेमी की बढ़ोत्तरी दर्ज की गई। जबकि डैम से 89 हजार क्यूसेक पानी और छोड़ा गया है। इससे खादर क्षेत्र में बाढ़ का खतरा मंडरा है। बाढ़ अफसरों द्वारा तटबंधन का कार्य कराया जा रहा है।
पहाड़ों पर लगातार तेज बरसात का सिलसिला फिर शुरू हो गया है। इससे पहाड़ी इलाकों के जलाशयों में जमा हुए पानी को मैदानी इलाकों में छोड़ा जा रहा है। शनिवार को 85 हजार क्यूसेक पानी डैम से छोड़ा गया था। जिससे एक साथ गंगा का जलस्तर बीस सेमी बढ़ गया। इससे गंगा, खतरे के निशान की ओर तेजी से बढ़ती जा रही है। गंगा किनारे बसे खादर क्षेत्र के गांवों में बाढ़ का पानी घुसना शुरू हो गया। ओसीता जग्देपुर के जंगल में बोई गईं करीब एक हजार बीघा से ज्यादा क्षेत्रफल में लहलहा रही फसलों में बाढ़ का पानी दो सप्ताह से भरा रहने से फसलों पर कुप्रभाव पड़ने लगा है। गन्ने की फसलों की पत्ती नीचे की तरफ से काली पड़ने लगी है। गन्ने की जड़ काली होनी लगी है। इससे किसानों की चिंता और बढ़ गई है। किसानों को इस बात का खतरा सता रहा है कि आखिर कैसे फसलों को बचाया जाए। जबकि रविवार को भी हरिद्वार व बिजनौर बैराज से 89 हजार क्यूसेक पानी गंगा में छोड़ा गया। इसका असर मैदानी इलाकों में सोमवार को जरूर दिखाई देगा। शनिवार को तिगरी में 200.20 व तिगरी में 200.00 गेज मीटर जलस्तर दर्ज किया गया था। जो रविवार को बढ़कर तिगरी में 200.40 व ब्रजघाट में 200.20 गेज मीटर हो गया। फिलहाल जलस्तर ब्रजघाट में खतरे के निशान 201.9 गेज मीटर और तिगरी में 202.5 गेज मीटर से अभी बहुत नीचे है। बाढ़ खंड द्वारा तटबंधन का कार्य लगातार कराया जा रहा है।
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गंगा का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। तटों को मजबूत करने के लिए लगातार कार्य कराया जा रहा है। डैम से पानी लगातार छोड़ा जा रहा है। अभी और जलस्तर बढ़ने की अशंका है।
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- प्रदीप कुमार, जेई, बाढ़ चौकी तिगरी।