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कार्तिक मेला स्थल भी डूबा, खेतों में बाढ़ का पानी लबालब
Updated Thu, 10 Aug 2017 01:51 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
गजरौला। गंगा का जलस्तर लगातार बढ़ने से तिगरी में लगने वाला कार्तिक मेला स्थल भी पानी डूब चुका है। वहीं, खेतों में बाढ़ का पानी लबालब भरा हुआ है। गंगा भी खतरे के निशान की ओर बढ़ती जा रही है। बुधवार को जलस्तर में कोई उतार-चढ़ाव देखने के नहीं मिला। लेकिन, बाढ़ को लेकर किसानों में दहशत बरकरार है। रविवार को सप्ताहभर में दूसरी बार तिगरी में नदी का जलस्तर 201 गेज मीटर तक पहुंच गया था। लेकिन इसके बाद जलस्तर में कमी दर्ज की गई। शीशोवाली की आबादी समेत कई गांवों के कृषि क्षेत्रफल में बाढ़ का पानी लोगों की मुसीबत बना हुआ है। सबसे ज्यादा परेशानी ओसीता जग्देपुर के वाशिंदों को है। खेतों में बीते 35 दिनों से बाढ़ का पानी भरा हुआ है। किसानों को खेतों से चारा लाने में ज्यादा मुश्किलों को सामना करना पड़ रहा है।
पहाड़ी इलाके में पिछले कई दिनों से लगातार हो रही तेज बरसात का सिलसिला थमने से इसका असर मैदानी इलाकों में दिखाई दिया। रविवार को सप्ताह में दूसरी बार गंगा का जलस्तर तिगरी में बढ़कर 201 गेज मीटर तक पहुंच गया था। लेकिन, सोमवार और मंगलवार को जलस्तर में करीब 25 सेमी की कमी दर्ज की गई। जबकि, बुधवार को मंगलवार की तरह ही जलस्तर स्थिर बना रहा है। यानि, बुधवार को भी जलस्तर तिगरी में 200.70 गेज मीटर ही रहा। गंगा का जलस्तर बढ़ने से तिगरी में लगने वाले कार्तिक मेला स्थल भी बाढ़ के पानी से पूरी तरह डूब चुका है। किसानों में बाढ़ की आशंका को लेकर बेचैनी बरकरार है। तिगरी और ओसीता जग्देपुर समेत आधा दर्जन गांवों में गंगा किनारे हजारों बीघा जमीन पर गन्ना, धान और बाजरे की फसल लहलहा रही थी, जिसमें इस वक्त पानी भरा हुआ है। किसानों को खेतों से चारा लाने में सबसे ज्यादा परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। ओसीता जग्देपुर के जंगल में तीन से चार फीट तक रास्तों पर भरे पानी से गुजर कर खेतों तक पहुंचना ग्रामीणों के लिए बहुत मुश्किल काम हो गया है। उधर, शीशोवाली गांव की आबादी में भरे बाढ़ के पानी से ग्रामीणों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। बाढ़ से बीमारी फैलने का डर सता रहा है। सोमवार को 200.70 और तिगरी में 200.95 गेज मीटर जलस्तर दर्ज किया गया था। जो मंगलवार को घटकर ब्रजघाट में 200.55 और तिगरी में 200.70 गेज मीटर दर्ज किया गया था। बुधवार को जलस्तर में कोई कमी या वृद्घि दर्ज नहीं की गई। फिलहाल जलस्तर खतरे के निशान से ब्रजघाट में 201.9 गेज मीटर और तिगरी में 202.5 गेज मीटर से करीब 100.30 सेमी नीचे बह रही है। बाढ़ अफसरों ने खादर किसानों को लगातार चेतावनी दी जा रही है। हालांकि बुधवार को बिजनौर बैराज से करीब एक लाख क्यूसेक पानी गंगा में छोड़ा गया। जिसका असर गुरुवार सुबह तक देखा जा सकता है।
एसडीएम ने पोषक नहर का लिया जायजा
गजरौला। गंगा के जलस्तर बढ़ने से रामगंगा पोषक नहर में भी उफान है। बुधवार को एसडीएम संजीव यादव गांव चकनवाला पहुंचे और वहां से गुजर रही रामगंगा पोषक नहर में उफान को देखा। नाव में बैठकर पानी का मुआयना किया। इस दौरान ग्रामीणों को सतर्क रहने की सलाह दी। एसडीएम ने कहा कि नहर पार करने के लिए नाव का सहारा लेने वाले लोग कतई लापरवाही न दिखाएं। एक बार में सात आठ लोगों को ही नाव में बिठाकर नहर पार कराएं। इसके साथ ही उन्होंने बाढ़ की स्थिति के निपटने के लिए पूरी तैयारियों का आश्वासन दिया।
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गंगा का जलस्तर में उतार चढ़ाव देखने को मिल रहा है। बुधवार को जलस्तर कोई बढ़ोत्तरी नहीं हुई, लेकिन बुधवार को बिजनौर बैराज से करीब एक लाख क्यूसेक पानी गंगा में छोड़ा गया। जो गुरुवार सुबह तक गंगा के जलस्तर को बढ़ा सकता है।
प्रदीप कुमार, जेई बाढ़ खंड तिगरी।
गजरौला। गंगा का जलस्तर लगातार बढ़ने से तिगरी में लगने वाला कार्तिक मेला स्थल भी पानी डूब चुका है। वहीं, खेतों में बाढ़ का पानी लबालब भरा हुआ है। गंगा भी खतरे के निशान की ओर बढ़ती जा रही है। बुधवार को जलस्तर में कोई उतार-चढ़ाव देखने के नहीं मिला। लेकिन, बाढ़ को लेकर किसानों में दहशत बरकरार है। रविवार को सप्ताहभर में दूसरी बार तिगरी में नदी का जलस्तर 201 गेज मीटर तक पहुंच गया था। लेकिन इसके बाद जलस्तर में कमी दर्ज की गई। शीशोवाली की आबादी समेत कई गांवों के कृषि क्षेत्रफल में बाढ़ का पानी लोगों की मुसीबत बना हुआ है। सबसे ज्यादा परेशानी ओसीता जग्देपुर के वाशिंदों को है। खेतों में बीते 35 दिनों से बाढ़ का पानी भरा हुआ है। किसानों को खेतों से चारा लाने में ज्यादा मुश्किलों को सामना करना पड़ रहा है।
पहाड़ी इलाके में पिछले कई दिनों से लगातार हो रही तेज बरसात का सिलसिला थमने से इसका असर मैदानी इलाकों में दिखाई दिया। रविवार को सप्ताह में दूसरी बार गंगा का जलस्तर तिगरी में बढ़कर 201 गेज मीटर तक पहुंच गया था। लेकिन, सोमवार और मंगलवार को जलस्तर में करीब 25 सेमी की कमी दर्ज की गई। जबकि, बुधवार को मंगलवार की तरह ही जलस्तर स्थिर बना रहा है। यानि, बुधवार को भी जलस्तर तिगरी में 200.70 गेज मीटर ही रहा। गंगा का जलस्तर बढ़ने से तिगरी में लगने वाले कार्तिक मेला स्थल भी बाढ़ के पानी से पूरी तरह डूब चुका है। किसानों में बाढ़ की आशंका को लेकर बेचैनी बरकरार है। तिगरी और ओसीता जग्देपुर समेत आधा दर्जन गांवों में गंगा किनारे हजारों बीघा जमीन पर गन्ना, धान और बाजरे की फसल लहलहा रही थी, जिसमें इस वक्त पानी भरा हुआ है। किसानों को खेतों से चारा लाने में सबसे ज्यादा परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। ओसीता जग्देपुर के जंगल में तीन से चार फीट तक रास्तों पर भरे पानी से गुजर कर खेतों तक पहुंचना ग्रामीणों के लिए बहुत मुश्किल काम हो गया है। उधर, शीशोवाली गांव की आबादी में भरे बाढ़ के पानी से ग्रामीणों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। बाढ़ से बीमारी फैलने का डर सता रहा है। सोमवार को 200.70 और तिगरी में 200.95 गेज मीटर जलस्तर दर्ज किया गया था। जो मंगलवार को घटकर ब्रजघाट में 200.55 और तिगरी में 200.70 गेज मीटर दर्ज किया गया था। बुधवार को जलस्तर में कोई कमी या वृद्घि दर्ज नहीं की गई। फिलहाल जलस्तर खतरे के निशान से ब्रजघाट में 201.9 गेज मीटर और तिगरी में 202.5 गेज मीटर से करीब 100.30 सेमी नीचे बह रही है। बाढ़ अफसरों ने खादर किसानों को लगातार चेतावनी दी जा रही है। हालांकि बुधवार को बिजनौर बैराज से करीब एक लाख क्यूसेक पानी गंगा में छोड़ा गया। जिसका असर गुरुवार सुबह तक देखा जा सकता है।
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एसडीएम ने पोषक नहर का लिया जायजा
गजरौला। गंगा के जलस्तर बढ़ने से रामगंगा पोषक नहर में भी उफान है। बुधवार को एसडीएम संजीव यादव गांव चकनवाला पहुंचे और वहां से गुजर रही रामगंगा पोषक नहर में उफान को देखा। नाव में बैठकर पानी का मुआयना किया। इस दौरान ग्रामीणों को सतर्क रहने की सलाह दी। एसडीएम ने कहा कि नहर पार करने के लिए नाव का सहारा लेने वाले लोग कतई लापरवाही न दिखाएं। एक बार में सात आठ लोगों को ही नाव में बिठाकर नहर पार कराएं। इसके साथ ही उन्होंने बाढ़ की स्थिति के निपटने के लिए पूरी तैयारियों का आश्वासन दिया।
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गंगा का जलस्तर में उतार चढ़ाव देखने को मिल रहा है। बुधवार को जलस्तर कोई बढ़ोत्तरी नहीं हुई, लेकिन बुधवार को बिजनौर बैराज से करीब एक लाख क्यूसेक पानी गंगा में छोड़ा गया। जो गुरुवार सुबह तक गंगा के जलस्तर को बढ़ा सकता है।
प्रदीप कुमार, जेई बाढ़ खंड तिगरी।