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जलस्तर बढ़ने से गंगा के तेज बहाव से कटान शुरू
Updated Sun, 16 Jul 2017 02:19 AM IST
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गंगा का बहाव हुआ तेज, खेतों का कटान शुरू
अमर उजाला ब्यूरो
गजरौला।
गंगा का जलस्तर बढ़ने से भूमि का कटान शुरू हो गया है। गंगा का पानी बाढ़ के रूप में फैल रहा है। गांव ओसीता जग्देपुर के जंगल में किसानों की करीब हजारों बीघा से अधिक भूमि पर लहलहा रहीं फसलें बाढ़ के पानी की चपेट में आ गई हैं। इससे किसानों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। बाढ़ खंड अफसरों ने हाईअलर्ट जारी कर दिया है। अफसर बाढ़ की हर स्थिति पर चौकसी बनाए हुए हैं। हालांकि शनिवार को गंगा का जलस्तर 20 सेमी कम हो गया।
तिगरी से लेकर ब्रजघाट तक उफनती गंगा से होने वाले भूमि कटान को रोकने के लिए प्रशासन फिर से उदासीन साबित हो रहा है। गंगा का जलस्तर बढ़ने से गांव ओसीता जग्देपुर में किसानों की करीब एक हजार बीघा से ज्यादा भूमि पर खड़ी धान व गन्ने की फसलें पूरी तरह से बाढ़ की गिरफ्त में आ गई हैं। इससे किसानों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। चारा लाने में सबसे ज्यादा परेशानी हो रही है। खेत पर बुग्गी से भी चारा लाना बहुत मुश्किल साबित हो रहा है। शुक्रवार को बाढ़ खंड के अधिकारियों ने तिगरी में जलस्तर का मुआयना करते हुए डेरा डाला था। देर रात जलस्तर में मामूली कमी दर्ज होने के बाद अफसर यहां से चले गए। लेकिन चौकसी बनाए रखने के सख्त निर्देश दिए गए हैं। शुक्रवार को ब्रजघाट में 200.55 व तिगरी में 200.95 गेज मीटर जलस्तर दर्ज किया गया था। जो शनिवार को घटकर ब्रजघाट में 200.35 व तिगरी में 200.70 गेज मीटर हो गया। शनिवार को भी हरिद्वार व बिजनौर बैराज से करीब 80 हजार क्यूसेक पानी गंगा में छोड़ा गया। जिसका असर मैदानी इलाकों में रविवार को देखा जा सकता है। अभी गंगा का जलस्तर और बढ़ने की आशंका है। जलस्तर बढ़ने से खादर क्षेत्र के किसानों की बैचेनी बढ़ती जा रही है। हालांकि प्रशासन बाढ़ की स्थिति से निपटने का दावा कर रहा है।
शुक्रवार के मुकाबले शनिवार को जलस्तर में बीस से पच्चीस सेमी तक गिरावट दर्ज की गई। लेकिन जलस्तर अभी और भी बढ़ सकता है, हरिद्वार व बिजनौर बैराज से पानी छोड़ा जा रहा है। बाढ़ की स्थिति से निपटने की पूरी तैयारी कर ली गई है।
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- प्रदीप कुमार, जेई, बाढ़ खंड तिगरी।
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अमर उजाला ब्यूरो
गजरौला।
गंगा का जलस्तर बढ़ने से भूमि का कटान शुरू हो गया है। गंगा का पानी बाढ़ के रूप में फैल रहा है। गांव ओसीता जग्देपुर के जंगल में किसानों की करीब हजारों बीघा से अधिक भूमि पर लहलहा रहीं फसलें बाढ़ के पानी की चपेट में आ गई हैं। इससे किसानों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। बाढ़ खंड अफसरों ने हाईअलर्ट जारी कर दिया है। अफसर बाढ़ की हर स्थिति पर चौकसी बनाए हुए हैं। हालांकि शनिवार को गंगा का जलस्तर 20 सेमी कम हो गया।
तिगरी से लेकर ब्रजघाट तक उफनती गंगा से होने वाले भूमि कटान को रोकने के लिए प्रशासन फिर से उदासीन साबित हो रहा है। गंगा का जलस्तर बढ़ने से गांव ओसीता जग्देपुर में किसानों की करीब एक हजार बीघा से ज्यादा भूमि पर खड़ी धान व गन्ने की फसलें पूरी तरह से बाढ़ की गिरफ्त में आ गई हैं। इससे किसानों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। चारा लाने में सबसे ज्यादा परेशानी हो रही है। खेत पर बुग्गी से भी चारा लाना बहुत मुश्किल साबित हो रहा है। शुक्रवार को बाढ़ खंड के अधिकारियों ने तिगरी में जलस्तर का मुआयना करते हुए डेरा डाला था। देर रात जलस्तर में मामूली कमी दर्ज होने के बाद अफसर यहां से चले गए। लेकिन चौकसी बनाए रखने के सख्त निर्देश दिए गए हैं। शुक्रवार को ब्रजघाट में 200.55 व तिगरी में 200.95 गेज मीटर जलस्तर दर्ज किया गया था। जो शनिवार को घटकर ब्रजघाट में 200.35 व तिगरी में 200.70 गेज मीटर हो गया। शनिवार को भी हरिद्वार व बिजनौर बैराज से करीब 80 हजार क्यूसेक पानी गंगा में छोड़ा गया। जिसका असर मैदानी इलाकों में रविवार को देखा जा सकता है। अभी गंगा का जलस्तर और बढ़ने की आशंका है। जलस्तर बढ़ने से खादर क्षेत्र के किसानों की बैचेनी बढ़ती जा रही है। हालांकि प्रशासन बाढ़ की स्थिति से निपटने का दावा कर रहा है।
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शुक्रवार के मुकाबले शनिवार को जलस्तर में बीस से पच्चीस सेमी तक गिरावट दर्ज की गई। लेकिन जलस्तर अभी और भी बढ़ सकता है, हरिद्वार व बिजनौर बैराज से पानी छोड़ा जा रहा है। बाढ़ की स्थिति से निपटने की पूरी तैयारी कर ली गई है।
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- प्रदीप कुमार, जेई, बाढ़ खंड तिगरी।