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ओसीता जग्देपुर में बाढ़ के पानी से बढ़ने लगी दुश्वारियां
Updated Fri, 11 Aug 2017 02:23 AM IST
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पहाड़ों में भारी बारिश से मैदान में चिंता बनी, हरिद्वार से छोड़ा जाएगा पानी
अमर उजाला ब्यूरो
गजरौला।
गंगा में उफान के चलते बाढ़ का पानी तटों का कटान करते हुए कृषि क्षेत्रफल की ओर बढ़ता जा रहा है। जबकि करीब पैंतीस दिन से ओसीता जग्देपुर के खेतों में डेरा डाले बाढ़ का पानी अब किसानों की दुश्वारियां बढ़ाने लगा है। पशुओं के चारे का संकट किसानों की मुसीबतें बढ़ा रहा है। करीब साढ़े चार फीट गहरे पानी से होकर खेतों तक पहुंचने का किसान साहस नहीं जुटा पा रहे हैं। किसानों की मुश्किलें हर दिन बढ़ती जा रही हैं।
बाढ़ के पानी से गन्ने व धान की फसल को अब नुकसान होने लगा है। उधर, तिगरी में भी मेला स्थल व कृषि क्षेत्रफल बाढ़ के पानी से जलमग्न हो गए हैं। लोगों को तिगरी में अंत्येष्टि के लिए भी सूखी जगह नहीं बची है। हालांकि नरौरा बैराज से भारी मात्रा में पानी आगे पास किए जाने से खादर किसानों को थोड़ी राहत जरूर मिली है। लेकिन गुरुवार को पहाड़ों पर हुई भारी बारिश ने चिंता बढ़ा दी है। अब हरिद्वार से भारी मात्रा में पानी छोड़े जाने की आशंका है जिससे गंगा में जलस्तर बढ़ने की आशंका है।
बुधवार व गुरूवार को जलस्तर मे कोई उतार चढ़ाव देखने को नहीं मिला। गुरूवार को भी तिगरी में जलस्तर 200.70 गेज मीटर ही रहा। तिगरी व ओसीता जग्देपुर समेत आधा दर्जन गांवों के गंगा किनारे हजारों बीघा कृषि क्षेत्रफल में लहलहा रही गन्ना, धान व बाजरे की फसल बाढ़ के पानी से लबालब हैं। गुरुवार को भी गंगा का जलस्तर ब्रजघाट में 200.55 व तिगरी में 200.70 गेज मीटर दर्ज किया गया। हालांकि गुरुवार को करीब 90 हजार क्यूसेक पानी बिजनौर बैराज से गंगा में छोड़ा गया।
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तीन चार दिन पहले खादर इलाके में बह रही गंगा में पानी अधिक हो गया था। नरौरा बैराज से पानी आगे पास करने पर यहां किसानों को थोड़ी राहत जरूर मिली है। लेकिन लगातार बिजनौर व हरिद्वार से गंगा में पानी छोड़ा जा रहा है। किसी भी समय बाढ़ की स्थिति बन सकती है।
- प्रदीप कुमार, जेई बाढ़ खंड तिगरी।
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अमर उजाला ब्यूरो
गजरौला।
गंगा में उफान के चलते बाढ़ का पानी तटों का कटान करते हुए कृषि क्षेत्रफल की ओर बढ़ता जा रहा है। जबकि करीब पैंतीस दिन से ओसीता जग्देपुर के खेतों में डेरा डाले बाढ़ का पानी अब किसानों की दुश्वारियां बढ़ाने लगा है। पशुओं के चारे का संकट किसानों की मुसीबतें बढ़ा रहा है। करीब साढ़े चार फीट गहरे पानी से होकर खेतों तक पहुंचने का किसान साहस नहीं जुटा पा रहे हैं। किसानों की मुश्किलें हर दिन बढ़ती जा रही हैं।
बाढ़ के पानी से गन्ने व धान की फसल को अब नुकसान होने लगा है। उधर, तिगरी में भी मेला स्थल व कृषि क्षेत्रफल बाढ़ के पानी से जलमग्न हो गए हैं। लोगों को तिगरी में अंत्येष्टि के लिए भी सूखी जगह नहीं बची है। हालांकि नरौरा बैराज से भारी मात्रा में पानी आगे पास किए जाने से खादर किसानों को थोड़ी राहत जरूर मिली है। लेकिन गुरुवार को पहाड़ों पर हुई भारी बारिश ने चिंता बढ़ा दी है। अब हरिद्वार से भारी मात्रा में पानी छोड़े जाने की आशंका है जिससे गंगा में जलस्तर बढ़ने की आशंका है।
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बुधवार व गुरूवार को जलस्तर मे कोई उतार चढ़ाव देखने को नहीं मिला। गुरूवार को भी तिगरी में जलस्तर 200.70 गेज मीटर ही रहा। तिगरी व ओसीता जग्देपुर समेत आधा दर्जन गांवों के गंगा किनारे हजारों बीघा कृषि क्षेत्रफल में लहलहा रही गन्ना, धान व बाजरे की फसल बाढ़ के पानी से लबालब हैं। गुरुवार को भी गंगा का जलस्तर ब्रजघाट में 200.55 व तिगरी में 200.70 गेज मीटर दर्ज किया गया। हालांकि गुरुवार को करीब 90 हजार क्यूसेक पानी बिजनौर बैराज से गंगा में छोड़ा गया।
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तीन चार दिन पहले खादर इलाके में बह रही गंगा में पानी अधिक हो गया था। नरौरा बैराज से पानी आगे पास करने पर यहां किसानों को थोड़ी राहत जरूर मिली है। लेकिन लगातार बिजनौर व हरिद्वार से गंगा में पानी छोड़ा जा रहा है। किसी भी समय बाढ़ की स्थिति बन सकती है।
- प्रदीप कुमार, जेई बाढ़ खंड तिगरी।