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विंटर डायरिया की चपेट में बच्चे, अस्पताल में लगी भीड़
Updated Sun, 09 Dec 2018 01:19 AM IST
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गजरौला। मौसम के सर्द होते ही अपना असर दिखाना शुरू कर दिया है। मौसम की सबसे अधिक मार बच्चों पर पड़ रही है। इस समय अस्पताल में विंडर डायरिया से पीड़ित बच्चों की भीड़ लगी है। अस्पताल पहुंचने वाले बच्चों में 40 प्रतिशत बच्चे विंडर डायरिया से पीड़ित है। चिकित्सक बच्चों को ठंड से बचाव की सलाह दे रहे है।
सर्दी के मौसम का सबसे अधिक असर छोटे बच्चों व बुजुर्गो पर होता है। बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. एसके चौधरी ने बताया कि बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होती है। हल्की सी ठंड लगते ही बच्चों को रूटा वायरस अपनी गिरफ्त में ले लेता है। रूटा वायरस से बच्चे को दस्त शुरू हो जाते है और उसके बाद उल्टी आनी शुरू हो जाती है। ऐसे में बच्चों के साथ बरती गई थोड़ी की लापरवाही घातक साबित हो सकती है। कई बार समय से उपचार न कराना जानलेवा भी साबित हो जाता है।
बरतें सावधानी
बच्चों को गर्म कपड़े पहनाकर रखें।
ठंड़ से बचाव को नवजात शिशुओं को गोद में छुपाकर रखे।
गर्म पानी का इस्तेमाल करे।
दूध पिलाने वाली मां भी ठंड़ से बचकर रहे।
बीमारी बच्चे को ओआरएस का घोल पिलाए।
ठंड लगने पर तुरंत विशेषज्ञ चिकित्सक को दिखाए।
नियमित रूप से टीका लगवाएं।
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विंटर डायरिया ठंड लगने पर रूटा वायरस से होता है, ये मौसमी बीमारी भी है। ठंड से बचाव रखे ही एक मात्र उपाय है। बच्चों में रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होती है, इस कारण जल्दी से बच्चे ठंड़ की चपेट में आ जाते है।
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डॉ. एसके चौधरी, बाल रोग विशेषज्ञ।
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इस समय अस्पताल में विंटर डायरिया से पीड़ित बच्चों की संख्या काफी है। ठंड से बचाकर रखे। साथ ही रूटा वायरस से बचाव के लिए सरकारी अस्पताल में टीके भी आ गए है। ये टीके छह माह, दस माह और 14 माह की आयु पर लगते है।
डॉ. योगेंद्र सिंह, एमओआईसी गजरौला।
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सर्दी के मौसम का सबसे अधिक असर छोटे बच्चों व बुजुर्गो पर होता है। बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. एसके चौधरी ने बताया कि बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होती है। हल्की सी ठंड लगते ही बच्चों को रूटा वायरस अपनी गिरफ्त में ले लेता है। रूटा वायरस से बच्चे को दस्त शुरू हो जाते है और उसके बाद उल्टी आनी शुरू हो जाती है। ऐसे में बच्चों के साथ बरती गई थोड़ी की लापरवाही घातक साबित हो सकती है। कई बार समय से उपचार न कराना जानलेवा भी साबित हो जाता है।
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बरतें सावधानी
बच्चों को गर्म कपड़े पहनाकर रखें।
ठंड़ से बचाव को नवजात शिशुओं को गोद में छुपाकर रखे।
गर्म पानी का इस्तेमाल करे।
दूध पिलाने वाली मां भी ठंड़ से बचकर रहे।
बीमारी बच्चे को ओआरएस का घोल पिलाए।
ठंड लगने पर तुरंत विशेषज्ञ चिकित्सक को दिखाए।
नियमित रूप से टीका लगवाएं।
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विंटर डायरिया ठंड लगने पर रूटा वायरस से होता है, ये मौसमी बीमारी भी है। ठंड से बचाव रखे ही एक मात्र उपाय है। बच्चों में रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होती है, इस कारण जल्दी से बच्चे ठंड़ की चपेट में आ जाते है।
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डॉ. एसके चौधरी, बाल रोग विशेषज्ञ।
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इस समय अस्पताल में विंटर डायरिया से पीड़ित बच्चों की संख्या काफी है। ठंड से बचाकर रखे। साथ ही रूटा वायरस से बचाव के लिए सरकारी अस्पताल में टीके भी आ गए है। ये टीके छह माह, दस माह और 14 माह की आयु पर लगते है।
डॉ. योगेंद्र सिंह, एमओआईसी गजरौला।