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खादर के गांव दारानगर को मरीज बना गया बाढ़ का पानी
Updated Thu, 23 Aug 2018 12:45 AM IST
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गजरौला। गंगा के बाढ़ का पानी तो उतर गया लेकिन यह दारानगर गांव को पूरी तरह से बीमार कर गया है। गांव के बच्चे, महिलाएं, बुजुर्ग सब बुखार से जूझ रहे हैं। करीब आठ सौ लोगों को बीमारी ने जकड़ लिया है। यहां के लगभग प्रत्येक घर में लोग बीमार हैं।
गांव दारानगर मुस्तकम की आबादी 1100 और मतदाता करीब पांच सौ हैं। इस गांव लोगों को हर साल बाढ़ से होने वाले नुकसान को झेलना पड़ता है। बाढ़ में पूरा गांव जलमग्न हो जाता है। जो घर गहरे में बने हैं उन घरों में पानी भर जाता है।
पिछले एक महीने से गांव में बाढ़ का पानी घुसा हुआ था। पानी तो उतर गया लेकिन लोगों को बीमार कर दिया। दारानगर में महेश के परिवार में तीन लोग बीमार हैं। वहीं हरिओम के यहां चार, रत्ना के यहां पांच, तेजपाल के घर छह, रुमाली के यहां पांच, कुंवर के परिवार में दो, जसवंत के दो, मोमराज के दो, गंगाशरण के तीन और लोकेश के घर में चार लोग बीमार पड़े हैं। इनमें बच्चे अधिक बीमार हैं। बुजुर्ग और महिलाएं भी बुखार की चपेट में हैं। इन घरों के साथ ही गांव के प्रत्येक घर में बीमारी पहुंच गई है। ग्रामीण मंगत ने बताया कि अस्सी प्रतिशत लोग बीमार पड़े हैं। हर घर में कोई न कोई बीमार है। यानी आठ सौ लोगों को बाढ़ का पानी मरीज बना गया है।
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नहीं मिल रहा सरकारी इलाज
गजरौला। दारानगर के लोगों को सरकारी इलाज मुहैया नहीं हो रहा है। ग्रामीण झोलाछाप डाक्टरों से इलाज कराने को मजबूर हैं। ग्रामीणों को काफी रुपया खर्च कर इलाज कराना पड़ रहा है। वहीं इलाज समय पर नहीं मिल पा रहा है। गांव वालों ने बताया कि एक निजी चिकित्सक उनके गांव में आते हैं। उन्हीं से दवा मिल जाती है। गांव वालों के लिए स्वास्थ्य विभाग ने कोई इंतजाम नहीं कराया है। ग्रामीणों का कहना है कि बाढ़ का पानी लोगों को हर साल बीमार करता है तो विभाग ने पहले से तैयारी क्यों नहीं की।
जलभराव और कीचड़ ने दिया मर्ज
गजरौला। गांव के रास्तों पर बाढ़ के पानी के कारण कीचड़ जमा है। गांव के अधिकांश रास्तों पर खड़ंजा भी नहीं बना हुआ है। जिसके चलते पानी भरने से कीचड़ हो जाता है। वहीं जलभराव से मच्छर भी पनप रहे हैं। लोगों का मानना है कि जलभराव और कीचड़ से ही बीमारी बढ़ रही है।
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डेंगू और मलेरिया का अंदेशा
गजरौला। जिस तरह से पिछले कई दिनों से लोग बुखार से पीड़ित हैं। इससे अंदेशा लगाया जा रहा है कि ग्रामीणों को मलेरिया और डेंगू हो सकता है। ग्रामीणों की जांच रिपोर्ट में प्लेटलेट्स कम होने की जानकारी सामने आ रही है।
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हालत बिगड़ी तो नहीं मिलेगा इलाज
गजरौला। गांव की भौगोलिक स्थिति ऐसी है कि रात में गांव से बाहर आना संभव नहीं है। ग्रामीणों को शहर आने के लिए नाव का सहारा लेना पड़ता है। वहीं रात में नाव चलाना बहुत मुश्किल और जोखिम भरा काम है। ऐसे में ग्रामीणों को रात में हालत खराब होने पर इलाज नहीं मिल सकेगा। यही चिंता ग्रामीणों को सता रही है।
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गांव दारानगर मुस्तकम की आबादी 1100 और मतदाता करीब पांच सौ हैं। इस गांव लोगों को हर साल बाढ़ से होने वाले नुकसान को झेलना पड़ता है। बाढ़ में पूरा गांव जलमग्न हो जाता है। जो घर गहरे में बने हैं उन घरों में पानी भर जाता है।
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पिछले एक महीने से गांव में बाढ़ का पानी घुसा हुआ था। पानी तो उतर गया लेकिन लोगों को बीमार कर दिया। दारानगर में महेश के परिवार में तीन लोग बीमार हैं। वहीं हरिओम के यहां चार, रत्ना के यहां पांच, तेजपाल के घर छह, रुमाली के यहां पांच, कुंवर के परिवार में दो, जसवंत के दो, मोमराज के दो, गंगाशरण के तीन और लोकेश के घर में चार लोग बीमार पड़े हैं। इनमें बच्चे अधिक बीमार हैं। बुजुर्ग और महिलाएं भी बुखार की चपेट में हैं। इन घरों के साथ ही गांव के प्रत्येक घर में बीमारी पहुंच गई है। ग्रामीण मंगत ने बताया कि अस्सी प्रतिशत लोग बीमार पड़े हैं। हर घर में कोई न कोई बीमार है। यानी आठ सौ लोगों को बाढ़ का पानी मरीज बना गया है।
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नहीं मिल रहा सरकारी इलाज
गजरौला। दारानगर के लोगों को सरकारी इलाज मुहैया नहीं हो रहा है। ग्रामीण झोलाछाप डाक्टरों से इलाज कराने को मजबूर हैं। ग्रामीणों को काफी रुपया खर्च कर इलाज कराना पड़ रहा है। वहीं इलाज समय पर नहीं मिल पा रहा है। गांव वालों ने बताया कि एक निजी चिकित्सक उनके गांव में आते हैं। उन्हीं से दवा मिल जाती है। गांव वालों के लिए स्वास्थ्य विभाग ने कोई इंतजाम नहीं कराया है। ग्रामीणों का कहना है कि बाढ़ का पानी लोगों को हर साल बीमार करता है तो विभाग ने पहले से तैयारी क्यों नहीं की।
जलभराव और कीचड़ ने दिया मर्ज
गजरौला। गांव के रास्तों पर बाढ़ के पानी के कारण कीचड़ जमा है। गांव के अधिकांश रास्तों पर खड़ंजा भी नहीं बना हुआ है। जिसके चलते पानी भरने से कीचड़ हो जाता है। वहीं जलभराव से मच्छर भी पनप रहे हैं। लोगों का मानना है कि जलभराव और कीचड़ से ही बीमारी बढ़ रही है।
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डेंगू और मलेरिया का अंदेशा
गजरौला। जिस तरह से पिछले कई दिनों से लोग बुखार से पीड़ित हैं। इससे अंदेशा लगाया जा रहा है कि ग्रामीणों को मलेरिया और डेंगू हो सकता है। ग्रामीणों की जांच रिपोर्ट में प्लेटलेट्स कम होने की जानकारी सामने आ रही है।
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हालत बिगड़ी तो नहीं मिलेगा इलाज
गजरौला। गांव की भौगोलिक स्थिति ऐसी है कि रात में गांव से बाहर आना संभव नहीं है। ग्रामीणों को शहर आने के लिए नाव का सहारा लेना पड़ता है। वहीं रात में नाव चलाना बहुत मुश्किल और जोखिम भरा काम है। ऐसे में ग्रामीणों को रात में हालत खराब होने पर इलाज नहीं मिल सकेगा। यही चिंता ग्रामीणों को सता रही है।