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Amroha News: नौकरी दिलाने का झांसा देकर 14 लाख हड़पे, केस दर्ज
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अमरोहा। ट्रेन में मुलाकात के बाद दिल्ली के व्यक्ति ने डिडौली के युवक को सुप्रीम कोर्ट में नौकरी दिलाने का झांसा दिया। बाद में उससे 14 लाख रुपये हड़प लिए। पीड़ित ने मामले में न्यायालय की शरण ली। न्यायालय ने आरोपी के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने के आदेश दिए हैं।
डिडौली कोतवाली क्षेत्र के हसनपुर कलां में मुदित कुमार गुप्ता का परिवार रहता है। 2021 में वह ट्रेन से दिल्ली जा रहे थे। ट्रेन में उनकी मुलाकात दिल्ली के मदन गिरी निवासी महेंद्र सिंह गुसाईं से हुई। महेंद्र सिंह ने खुद को आईबी में सिक्योरिटी अफसर बताया और विभाग का परिचयपत्र भी दिखाया। बातचीत के दौरान कहा कि वर्ष 2021 में सुप्रीम कोर्ट में कोर्ट अटेंडेंट की वैकेंसी आ रही है। तुम फॉर्म भर देना, मैं तुम्हारी नौकरी लगवा दूंगा। इसके बाद मुदित कुमार गुप्ता और महेंद्र सिंह गुसाईं ने आपस में मोबाइल नंबर ले लिए और बातचीत करने लगे। इसके बाद महेंद्र सिंह गुसाईं मुदित कुमार गुप्ता के घर पर भी आए और एक फॉर्म दिया, जो सुप्रीम कोर्ट के सब रजिस्ट्रार कार्यालय में कोर्ट अटेंडेंट की वैकेंसी का था। नौकरी लगवाने की आवाज में 14 लाख रुपये मांगे। मनोज कुमार गुप्ता ने दो लाख रुपये नकद दे दिए। 29 अक्तूबर 2021 को आरोपी महेंद्र सिंह गुसाईं द्वारा सुप्रीम कोर्ट आफ इंडिया सब रजिस्ट्रार कार्यालय का एक एडमिट कार्ड दिया गया। इससे पहले महेंद्र सिंह गुसाईं द्वारा ही मुदित कुमार गुप्ता की परीक्षा दिलवाई गई थी। इसके बाद अलग-अलग तारीखों में मुदित कुमार गुप्ता ने 14 लाख रुपये का भुगतान महेंद्र सिंह गुसाईं को कर दिया। जबकि कुछ रुपये बैंक खाते में ट्रांसफर किए गए।
दो जून 2022 को महेंद्र सिंह गुसाईं ने एक जॉइनिंग लेटर दे दिया और बताया कि 27 जून को वह अपनी नौकरी ज्वाइन कर सकते हैं लेकिन सीधे सुप्रीम कोर्ट कार्यालय जाने से मना कर दिया था। झांसा दिया कि अभी दो लेटर और आएंगे, इसके बाद में आपको जॉइनिंग करा दूंगा। इसके बाद महेंद्र सिंह गुसाईं पीड़ित मुदित कुमार गुप्ता न तो किसी कार्यालय ले गए और न सुप्रीम कोर्ट के कार्यालय में किसी प्रकार की नौकरी लगवाई। तब मुदित कुमार गुप्ता को धोखाधड़ी का एहसास हुआ।
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मुदित ने मामले की शिकायत पुलिस से की तो कोई कार्रवाई नहीं हुई। लिहाजा उन्होंने न्यायालय की शरण ली। अब मुख्य न्यायाधीश मजिस्ट्रेट अमर प्रताप चौधरी ने डिडौली कोतवाली पुलिस को आरोपी महेंद्र सिंह गुसाईं के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने के आदेश दिए हैं।
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डिडौली कोतवाली क्षेत्र के हसनपुर कलां में मुदित कुमार गुप्ता का परिवार रहता है। 2021 में वह ट्रेन से दिल्ली जा रहे थे। ट्रेन में उनकी मुलाकात दिल्ली के मदन गिरी निवासी महेंद्र सिंह गुसाईं से हुई। महेंद्र सिंह ने खुद को आईबी में सिक्योरिटी अफसर बताया और विभाग का परिचयपत्र भी दिखाया। बातचीत के दौरान कहा कि वर्ष 2021 में सुप्रीम कोर्ट में कोर्ट अटेंडेंट की वैकेंसी आ रही है। तुम फॉर्म भर देना, मैं तुम्हारी नौकरी लगवा दूंगा। इसके बाद मुदित कुमार गुप्ता और महेंद्र सिंह गुसाईं ने आपस में मोबाइल नंबर ले लिए और बातचीत करने लगे। इसके बाद महेंद्र सिंह गुसाईं मुदित कुमार गुप्ता के घर पर भी आए और एक फॉर्म दिया, जो सुप्रीम कोर्ट के सब रजिस्ट्रार कार्यालय में कोर्ट अटेंडेंट की वैकेंसी का था। नौकरी लगवाने की आवाज में 14 लाख रुपये मांगे। मनोज कुमार गुप्ता ने दो लाख रुपये नकद दे दिए। 29 अक्तूबर 2021 को आरोपी महेंद्र सिंह गुसाईं द्वारा सुप्रीम कोर्ट आफ इंडिया सब रजिस्ट्रार कार्यालय का एक एडमिट कार्ड दिया गया। इससे पहले महेंद्र सिंह गुसाईं द्वारा ही मुदित कुमार गुप्ता की परीक्षा दिलवाई गई थी। इसके बाद अलग-अलग तारीखों में मुदित कुमार गुप्ता ने 14 लाख रुपये का भुगतान महेंद्र सिंह गुसाईं को कर दिया। जबकि कुछ रुपये बैंक खाते में ट्रांसफर किए गए।
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दो जून 2022 को महेंद्र सिंह गुसाईं ने एक जॉइनिंग लेटर दे दिया और बताया कि 27 जून को वह अपनी नौकरी ज्वाइन कर सकते हैं लेकिन सीधे सुप्रीम कोर्ट कार्यालय जाने से मना कर दिया था। झांसा दिया कि अभी दो लेटर और आएंगे, इसके बाद में आपको जॉइनिंग करा दूंगा। इसके बाद महेंद्र सिंह गुसाईं पीड़ित मुदित कुमार गुप्ता न तो किसी कार्यालय ले गए और न सुप्रीम कोर्ट के कार्यालय में किसी प्रकार की नौकरी लगवाई। तब मुदित कुमार गुप्ता को धोखाधड़ी का एहसास हुआ।
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मुदित ने मामले की शिकायत पुलिस से की तो कोई कार्रवाई नहीं हुई। लिहाजा उन्होंने न्यायालय की शरण ली। अब मुख्य न्यायाधीश मजिस्ट्रेट अमर प्रताप चौधरी ने डिडौली कोतवाली पुलिस को आरोपी महेंद्र सिंह गुसाईं के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने के आदेश दिए हैं।